सुबह का वक्त है ड्राइंग रूम में अकेले सोफे पर बैठे हुए आँखें बंद करीं कि न जाने कहाँ से सुधा और चंदर याद आ गए.चेहरे पे मुस्कान पर दिल में गहरी टीस उठी ये वो किरदार हैं जिनसे आप सभी परिचित हैं,हर घर में सुधा हर घर में चंदर है ,बस हर घर की कहानी अलग है.यूँ तो प्यार जन-जन्मान्तर का रिश्ता होता है पर बनने में ज़रा भी वक्त नहीं लगता और बनाना भी नहीं पड़ता स्वतः ही अपने हर रूप को धर लेता है प्यार.सुधा कश्मीर कि वादियों में जन्मी अपने घर कि सबसे बड़ी और सबसे छोटी भी, मतलब संजय श्रीवास्तव की इकलौती संतान .संजय जी पेशे से बैंक कर्मचारी हैं .सुधा की माँ यानि अरुणा जी घरेलु महिला हैं और पूर्णतयः पति और परिवार को समर्पित .शीला जी को घूमने का नई-नई जगहें देखने का बहुत शौक है किन्तु पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते ये शौक मन में ही रहे.सुधा है तो एक साधारण से नयन नक्श वाली लड़की लेकिन कश्मीर ने अपनी खूबसूरती की छाप उस पर बखूबी छोड़ी है.साँवला रंग,मोती से दांत,कमर तक लहराते काले घने बाल,छोटी मगर बोलती हुई आँखें ,हंसती है तो लगता है गौरैया ने अपनी गर्दन ऊपर उठा ली हो .सुधा ने बी. कोम किया है और अब अरुणा जी को बस उसके लिए उपयुक्त वर की तलाश है.सुधा को अभी तक प्यार नहीं हुआ जबकि वह २१ वर्ष की हो चुकी है पर अभी तक वह इस अहसास से कोसों दूर है.हाँ ! दूसरी लड़कियों की तरह आकर्षित होती है वह भी पर कोई अलग सा अहसास उसे न हुआ अब तलक.खैर ! प्यार कब उम्र देख कर होता है बस होना होता है जब कोई रोक न पाया आज तक..अब हम आपको यहीं छोड़ते हैं सुधा के साथ और आप ये न सोचें कि चंदर का परिचय कौन कराएगा क्यूंकि चंदर अपना परिचय स्वयं ही देगा.और आप अब सुने सुधा और चंदर कि सीधी बात ,हम यहीं से हटते है.क्यूंकि जो आनंद फिल्म देख कर महसूस किया जा सकता है वो उसकी कहानी सुनकर नहीं…सुधा बाज़ार में सहेलियों के संग खा रही है अपनी मनपसंद वनीला आइसक्रीम…
चंदर : आइसक्रीम वाले भईया ज़रा एक डिस्क चोकलेट कौर्नैटो देना .
सुधा : लोग कड़वी चीज़ें कैसे खाते हैं भला रश्मि !
चंदर : जीवन का रूप यही होता है सुंदरी.
सुधा : सुंदरी ! किसे कहा ,और हम अपनी सखी से बात कर रहे हैं..आप कौन ??
चंदर : मै ! मै चंदर … आपकी परछाई…
सुधा : क्या मतलब…
चंदर : आपकी खूबसूरती के समक्ष तो मै दिखूंगा नहीं कहीं सो इस तरह मै परछाई हुआ …सुंदरी….:)
सुधा : मेरा नाम सुधा है ! सुंदरी नहीं….
चंदर : हाँ पर मेरे लिए तो सुंदरी ही रहेगा …
( सुधा वहां से चली जाती है )
घर आकर भी चंदर के कहे शब्द न जाने क्यूँ बार-बार याद आ रहे हैं ऐसा लग रहा है की कोई कानो में कह रहा है सुंदरी ,सुंदरी …ये क्या हो रहा है मुझे ,भला क्यूँ इतना खिंचाव महसूस कर रही हूँ मै उस चंदर के लिए.. हाँ ! पर उसका मुझे सुंदरी बुलाना बुरा भी नहीं लगा बल्कि अच्छा-बहुत अच्छा लगा .शायद चंदर तो मुझे भूल गया होगा ,आखिर लड़का है बदमाशी में ही छेड़ रहा होगा और मै यहाँ उसके ख्यालों में गुम हूँ .शाम हो गई आज तो रश्मि के घर जाना है ओह ! मै तो भूल ही गई थी… माँ मै रश्मि के घर जा रही हूँ ,आज सब दोस्त मिल रहे हैं वहां और मै भूल ही गयी थी देर हो गई .
अरुणा जी : अँधेरा होने से पहले घर आ जाना सुधा, नहीं तो फिकर लगी रहती है और हाँ उसके घर पहुच कर फ़ोन कर देना…
सुधा : जी माँ .
सुधा : मन ही मन काश ! इक बार तुम दिख जाओ चंदर,देखो ये आँखे तुम्हे ही खोज रही हैं .नहीं दिखा कहीं चंदर और रश्मि का घर भी आ गया .
रश्मि : वाह ! सुधा रानी सबसे देर से आई है तू ,कहीं रास्ते में तेरा वो ..क्या नाम था ?? मिल तो नहीं गया था.
सुधा : कौन … चंदर ! उफ्फ्फ ये क्या बोल गई मै …छोड़ न अब आ गई हूँ चल बताओ तुम सब की क्या बाते चल रही हैं…
रश्मि के घर सबने खूब मजे किये और सभी अपनी-अपनी भविष्य की तैयारियों में कैसे जुटना है यही चर्चा खास रही …पर मुझे तो कोई नौकरी नहीं करनी ,माँ बस मेरी शादी ही चाहती है अब ,उनकी इकलौती संतान हूँ वो भी लड़की सो वो अपनी ज़िम्मेदारी शीघ्र से शीघ्र पूरी कर देना चाहते हैं .रात भर नींद ठीक से न आई न जाने कैसी बेचैनी सी थी .सुबह ये निश्चय किया की आज से सुबह की सैर शुरू की जाये और बस फिर क्या था पहुँच गए हम घर के पास ही के पार्क में और शामिल हो गए उसी भीड़ में जहाँ न जाने कितने अजनबी एक साथ सैर करते हैं कोई किसी को न जनता है न किसी से बात करता है फिर भी उनकी आँखे एक दुसरे के लिए अपरिचित नहीं ,उनकी हल्की मुस्कान रोज़ ही बातें करती है एक – दुसरे से. आज पहला दिन है सो थकान हो रही है ,आदत जो नहीं इतना तेज़ चलने की ,इस लिए एक बेंच पर बैठ जाती हूँ की थोड़ी देर सुस्ता लूँ फिर चलूँ … आहा कितनी साफ़ शुद्ध हवा है इस अहसास को सिर्फ महसूस ही किया जा सकता है .माँ तो हर रोज़ सैर करती हैं तभी वो मुझे भी रोज़ जल्दी उठकर सैर करने को कहती थी,अब समझ आ रहा है … सुंदरी ! आप यहाँ ….कहते हुए चंदर ठीक मेरे बगल में बैठ जाता है और मै हतप्रभ ! आप यहाँ क्या कर रही हैं ,और बताइए आपके घर में कौन-कौन है …. मेरी खुशनसीबी आज तो पूरा दिन ही अच्छा गुज़रेगा…
सुधा : हम आप से कोई बात नहीं करना चाहते …
चंदर : सॉरी ,मुझे लगा की शायद आप मुझसे बात करना चाहें ,खैर ! रहने दीजिये…हम चलते हैं…
सुधा : नहीं हमारा मतलब …हम एक दूसरे को जानते भी तो नहीं …इसलिए…
चंदर : क्या अभी भी आपको लगता है की हम एक दूसरे को नहीं जानते ,क्या हमारे दिल ने एक -दूसरे को नही पहचाना है ,सच बताना सुंदरी …मै यहाँ रोज़ इसी वक्त आता हूँ,कल मिलता हूँ कह कर चंदर चला जाता है..
सुधा : ये क्या हो रहा है मुझे ,न जाने क्यूँ चंदर पर गुस्सा नहीं आ रहा. इससे पहले भी तो न जाने कितने ही लड़कों ने अपने प्रेम का इज़हार किया है,मनुहार भी की पर कोई मुझे, मेरे अंतर्मन को छू भी न सका ,मेरे दिल में कभी कोई दस्तक न हुई फिर आज मै ,क्यूँ बार-बार मै चंदर को याद कर रही हूँ …क्या वो भी मुझे ? नहीं-नहीं ,उसने तो ऐसा कुछ नहीं कहा और सिर्फ दो मुलाकातों में प्यार तो नहीं हो सकता .शायद जानकार भी स्वयं को बहला रही हूँ मै .अगले दिन सुबह खुद को पार्क जाने से रोक न सकी मै और चंदर को भी वहीं मौजूद पाया .आज चंदर से बात करने को भी जी चाहा,मन में आया कह दूं सारे जज़्बात पर शर्म ,हिचक ने कुछ कहने न दिया. कुछ पल शांत बैठे रहने के बाद ख़ामोशी को तोड़ते हुए बातो ही बातो में चंदर ने मेरा दाहिना हाँथ पकड़ कर अपने हांथों में रख लिया और बोला तुम्हारा हाँथ कितना मुलायम हैं सुंदरी ! और देखो मेरे कितने रफ ,कहकर उसने धीरे से मेरे हाँथों को चूम लिया .झट से मैंने अपना हाँथ चंदर से छुटाया और दूसरी तरफ देखने लगी ,न जाने क्यूँ फिर भी चंदर की इस हिमाकत पर मुझे गुस्सा न आया.चंदर ने माफ़ी मांगी और अपना फ़ोन नंबर देते हुए बोला यदि माफ़ कर देना तो इस नंबर को तुम्हारी प्रतीक्षा रहेगी . अब समझा मैंने कि प्यार हो गया और उसके लिए मुलाकातों की गिनती ज़रूरी नहीं… अब हम दोनों रोज़ घंटो फ़ोन पर बातें करने लगे,हर पल बस खयालों में चंदर ही रहते .मै सुधा, जो अब तक किसी की न हुई थी चंदरमय हो गई .अपना नाम भी सुधाचंदर माथुर लिखने लगी .चंदर एक इंजीनियर था और उसके माँ-पापा बंगलौर में रहते थे वह अपनी नौकरी के कारण यहाँ अकेला पेइंग गेस्ट बनकर रहा था .आज न जाने चंदर को क्या हुआ अचानक ही कह बैठे – सुधा मै तुमसे शादी करना चाहता हूँ,प्यार इतना करता हूँ कि अपना भविष्य बस तुम्हारे साथ ही जीना चाहता हूँ …मेरी स्वप्न सुंदरी सुधे …
उसके मुख से ये अलफ़ाज़ सुन न जाने कहाँ की लज्जा मेरे मुख पर आ गिरी ,नज़रें गडी रह गई और मुख से बस इतना ही निकल सका जी चंदर मै भी…
चंदर ने मेरे चेहरे को ऊपर उठाया और प्यार से मेरी पलकों को चूम लिया ये कहते हुए कि जल्द ही हम एक होंगे सुंदरी
कुछ दिन पश्चात ही चंदर के माता-पिता हमारे घर आए और हमारा रिश्ता चंदर से जोड़ दिया ,पर लग गए थे हम दोनों को अब ,शादी कि तिथि भी करीब ही है ,सोच-सोच कर धडकेने बढ़ जाती हैं.आज अहसास हुआ कि प्यार में कितनी ताजगी होती है,प्यार कि सुगंध ने सुधा को डुबो दिया और अब से मै खुद का अस्तित्व भी चंदर में ही देखने लगी हूँ .मै जितनी चंचल हूँ चंदर उतने ही गंभीर फिर भी हमे एक दूसरे का साथ सर्वाधिक भाता है ,ईश्वर आप से बस यही प्रार्थना है कि कभी हमारा साथ न छूटे …. न जाने कितनी बार कहानी का किरदार रहे सुधा और चंदर जो कभी मिल न सके इस कहानी में उनका मिलन हो गया है ,आज ही उनकी शादी सभी के आशीर्वाद से संपन्न हुई है और तभी ये कहानी एक रूप ले पाई है .अब से सुधा और चंदर किसी कहानी के किरदार नहीं बल्कि स्वयं का प्रेम से परिपूर्ण जीवन बिताएंगे .इसी शुभकामना के साथ….
” सुधा और चंदर ” हमारी कहानी पश्चिम बंगाल के सर्वाधिक पढ़े जाने वाले दैनिक समाचार पत्र ‘ प्रभात वार्ता ‘ के रविवारीय अंक में प्रकाशित हुई है, आप सभी की अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा है .
सादर
इंदु
कोमल अहसासों से भरा अंदाज़ ,आपके विभिन्न रूपों में एक और रूप उजागर हुआ,सुन्दर अति सुन्दर
आदरणीय डा. साहब, बेहद ख़ुशी हो रही है कि कहानी भी आपको पसंद आई .हमारे ब्लाग कि ये दूसरी कहानी है .सदा और बेहतर लिख सकूँ यही कोशिश रहेगी…
सादर
induji ,
aap behtar hee nahee bahut behtar likhtee hein aur likh saktee hein,maine hameshaa aapko yahee kahaa ,yahee wish kiyaa hai,mere shubhkaamnaayein thee hein aur rahengee
बेहतरीन कहानी
सादर
धन्यवाद , यशवंत जी…
प्यार के जन्म लेने से उसके फलीभूत होने तक का सफर बहुत कोमल भावनाओं के रास्ते होकर गुज़रा और सबसे अच्छी बात ये लगी कि ये सफर कितना सुहाना बन गया दोनों के मन में भावनाओं की एक सी लहर पाकर …काश हमारे सभी सुधा और चंदर ऐसे ही अपनी मंजिल को पायें …बहुत अच्छा प्रयास इंदु जी …सुन्दर सोच …बधाई !!!
आदरणीय प्रशांत वर्मा जी , बहुत-बहुत आभार …
सादर
आधुनिक परिवेश की एक चिरन्तन प्रेम कथा
बहुत-बहुत आभार, अरविन्द जी…
सादर
बेहतरीन कहानी| आपकी रचनात्मकता के एक और पहलू से रूबरू होकर बहुत अच्छा लगा| इस प्रेम कहानी का सुखद अंत भी अच्छा लगा| वरना ख़बरों में, टीवी पर उन्हीं प्रेम कहानियों को दिखाया जाता हैं जिनका अंत दुखद होता है|
बहुत-बहुत आभार सतीश जी , कहानी आपको पसंद आई जानकर बेहद ख़ुशी हो रही है. सही कहा आपने ज़्यादातर समाज की बुराइयों और दुःख-दर्द को कहानी का रूप मिलता है और हमारी कोशिश ही यही थी कि हम एक साधारण सी किन्तु सुखद अंत कि कहानी लिख सकें ….
सादर
bahut acchi kahani ek alag roop dekhne ko mila ….sabhi charitra , aur samaj ka aaina …mujhe kahani padhna bahut pasand hai …….phir se aur dubara aaungi ise padhne ..bahut acchi indu ji badhai aapko
धन्यवाद शशि जी, बेहद ख़ुशी हुई कि आपको कहानी पढ़ने का शौक भी है और आपको हमारी कहानी पसंद भी आई … सदा बेहतर लिख सकूँ यही कोशिश रहेगी …
कहानियों सा प्रेम सफल भी रहा …सुखद कोमल एहसासों की सादा संवाद अदायगी ने मन को छू लिया !
कहानी पसंद आई,संवाद ने दिल को छुआ … लिखना सफल रहा …
सादर
सुखद एहसास …
आभार अंजू जी..
सादर
कल 29/07/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!
बहुत-बहुत धन्यवाद यशवंत जी…
सादर
बहुत ही प्यारी कहानी..पढ़कर आनन्द आ गया।
कहानी ने आपको आनंदित किया जानकर बेहद ख़ुशी हो रही है, प्रवीण जी….
सादर
इंदु जी आपकी लेखनी में जान है …धन्यवाद्
ह्रद्याभार ,अतुल जी…
सादर
Induji,
very good.
Why not reach out more viewers by adding script converters into other Indian languages to your blog.
जी शुक्रिया …
हम कोशिश करेंगे …
सादर
खुबसूरत एहसास… सुन्दर कथा….
सादर बधाई.
सुन्दर अहसास करा सकी कहानी,जानकर बेहद ख़ुशी हो रही है…
सादर
सुंदर कहानी ….. वरना तो हम गुनाहों का देवता के सुधा चंदर ही देखते हैं …
बहुत-बहुत आभार संगीता जी …..
सादर
बहुत सुंदर कहानी…
धन्यवाद
सादर
A beautiful narrative…:)
Thanks a lot…
Regards
Wow…a refreshing story with very much predictable climax…i liked u positiveness across d whole story…
Thanks a lot Hemant ji…
Regards
very nice story. romantic and simple!
Thanks a lot…
Regards
Hi! I’ve nominated you for the Kreative Blogger award! Check out the link http://justanotherwakeupcall.wordpress.com/2012/08/27/rainbows-on-my-windscreen/
कहानी तो बहुत अच्छी है. और भावनाओं को काफी अच्छी तरह व्यक्त किया गया है.
कुछ छोटी छोटी चीज़ें – जैसे मोर्निंग वाल्क पे लोगों की नज़रों की जान पहचान, सुधा की माँ का किरदार मुझे बहुत अछि लगी….
और सभी कहानियों में प्यार ज़्यादातर दर्द या तकलीफ देता है, इतनी खूबसूरत प्यार की कहानी पढ़ के अच्छा लगा….
Great work…!!! Keep writing
धीरज जी, आपकी प्रतिक्रिया पाकर बेहद ख़ुशी हो रही है …आपको कहानी पसंद आई …ह्रदयआभार
सादर
इंदु
mujhe kab milegi meri “sudha”
जी गुरु जी ,शीघ्र ही
सादर
इंदु
बहुत खूबसूरत एहसास और उस से भी खूबसूरत अल्फाज़ …ऐसा लगा मानो यही जिन्दगी तो जी है …..बिलकुल अपनी सी ….बेहतरीन ..इंदु बेटा ))))))
धन्यवाद नीरजा माँ, आपका आशीष सदा ही चाहिए होगा …
सादर
इंदु
Ati sunder likhthi hai aap induji aise hi likthi rahiye aur hum parhte rahe
Thanks a lot , Shalini ji…
Regards
बेहतरीन कहानी
BADHAI HO PRAKASHIT HONE KI ……..
धन्यवाद, मिश्रा जी…
सादर
इंदु