इंतज़ार समझते हैं ?


इंतज़ार समझते हैं ?

जब कोई किसी के इंतज़ार में होता है
तो वह और कहीं नहीं होता है।
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इंतज़ार की दुनिया में फूलों से लदे कैक्टस
पानी की सतह पर तैरते हैं।
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दूर खिला कोई कमल किसी के इंतज़ार में नहीं रहता

लोग उसके इंतज़ार में रहते हैं।
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जलकुंभी इंतज़ार में कैसे खत्म होती है
फिर उगती है
यह कमल को कभी नहीं मालूम होता।
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कैक्टस के फूल झड़ जाते हैं
उन्हें नमी की आदत नहीं।
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कैक्टस फिर भी बचाए रखता है हरापन
कहता है सख्त कंटको से
मैं इंतज़ार में हूँ
तुम साथ ही रहना।
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दम मारो दम !


अपनी चिलम अपना नशा खुद बनाएँ
ताकि नशे का अनुपात बराबर रहे।
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नशे की भिन्न प्रजातियाँ हैं
हर नशे के न आप आदी होते हैं
न वो नशा आपका।
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नशे की अपनी प्रवृत्तियाँ भी होती हैं।
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कभी कोई तेज़ नशा भी आपको हिट नहीं करता
कभी माइल्ड डोज़ भी ओवरडोज़ हो जाती है।
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नशे की तासीर ही तय करती है सब।
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हर नशा चिलम का मोहताज नहीं होता
हर चिलम भी अपना नशा खुद ही चुनती है।
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चिलम से उठते धुँए को नशा न समझ लेना
ये वो फिक्र है जो नशे से बाहर हुई जाती है।
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ज़रूरी चिलम भी है और नशा भी
बात ये कि
चिलम किसकी हो और नशा किसका।
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चिलम और नशे के बीच सबसे ज़रूरी
आप नहीं आग का होना है।
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खिलते हैं गुल यहाँ …!


न चाहते हुए भी आज उसने कहा
तुम जैसा हो जाना चाहती हूँ
याद ही न रहे कि तुम हो कहीं।
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उसके पास सबके लिए वक्त था
सिवाय उसके
जो अपना सारा वक्त
उसके नाम किए बैठी रही।
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कभी-कभी वो पूछती
याद आती है मेरी ?
जवाब आता
बेहद ।
फिर वो कुछ न पूछ पाती ।
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किसी रूमानी शाम में वो सोचती
छोड़ो जाने दो उदास नहीं होना है
ठंडी हवा उसे उदास चादर ओढ़ा जाती।
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उसकी मुस्कान संक्रामक थी।
वो देख रही थी खुद को बर्बाद होते
एक दिन वो पूरी ख़त्म हो गई।
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वो हर बार सोचती कि अब इंतज़ार न करेगी
फिर थोड़ी ही देर में मैसेज भेजती
और खुश हो जाती
क्योंकि रिप्लाय ज़रूर आता।
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उसकी सारी शिकायतें धरी रह जातीं
वो सिर्फ अपना हाल बताता
वो नम आँखों से मुस्कुराती रहती।
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जब उसने सोचा वो कभी न पूछेगी
कि वो कुछ भी है उसके जीवन में
तभी उसके मन ने कहा
जो सच है उसे स्वीकार कर लो।
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प्यार करने वाला बेहद तन्हा होता है
उसके पास उसका मन तक नहीं रहता।
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बसंत की सुबह !


सजीव और निर्जीव को
साथ-साथ देखना कैसा होता है
कभी दोनों एक से प्रतीत होते हैं।

जैसे अभी तेज़ हवा चल रही है
और बैलक्नी में पौधों के साथ ही
झूला,विंडचाइम लगभग उसी गति से झूम रहे हैं
जैसे कि पौधे।

गमलों के पौधों की पत्तियाँ
खुद को पौधे के तने के साथ
मजबूती से संभाले जा रही हैं।

फूल हैं जो कि हवा की लहरों के साथ झूमे जा रहे हैं। फूलों को परवाह नहीं कि वे बचेंगे
या शाख से दूर हो जाएँगे।

एक कमज़ोर फूल बैलक्नी की फर्श पर गिर गया है
वो अब उसी दिशा में घिसट रहा है
जिधर हवा उसे घुमा दे रही है।

गमले के बाकी फूल इन सबसे बेपरवाह
अभी भी झूमे जा रहे हैं।

हर पौधे में हवा के वेग को सहने की
अलग क्षमता होती है।

पौधों और हवा का साथ बड़ा गहरा है
हवा न हो तो पौधे उदास हो जाते हैं।

उदास पौधों के लिए हवा ख़ुराक है।
कभी-कभी हवा इतनी अधिक होती है
कि पौधे सहम जाते हैं।

पौधे हवा से कभी नहीं पूछ पाते
कि वो उनसे कितना प्रेम करती है।

पौधे ये ज़रूर सोचते हैं
कि उनसे क्या भूल हुई
जो हवा ने ही उन्हें झकझोर दिया।

कभी हवा के साथ पौधों को
ख़ुशी में झूमते हुआ देखा है
और कभी हवा के वेग से घबराए हुए भी।

हवा पौधों को तैयार कर रही होती है
अदृश्य आकस्मिक घटना से सुरक्षा के लिए।

कहीं दूर किसी पक्षी की मोहक आवाज़
सुनाई दे रही है।
दूर उड़ते हुए पक्षी को देखकर जी चाहता है कि काश कभी वो पास आ सके।

अभी-अभी हवा की गति कुछ कम हुई है।
अब सारे पौधे हल्की ठण्ड से
कपकपाते हुए दिख रहे है।

पौधों का हिलना सुंदर है।
रुकी हुई चीज़ें पुराने को दोहराती हुई होती हैं।

पौधों का हिलना सजीवता के लिए ज़रूरी है
और सजीवता के लिए हवा का चलना !

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यात्रा !


यात्रा कितनी भी कर ली जाए
बहुत कुछ छूट ही जाता है।

सफ़र पर
सब जल्दी में रहते हैं
गंतव्य तक
थक चुके होते हैं।

उसने कहा
वह सफ़र पर है
वह इंतज़ार में रही
कि सफ़र कब खत्म हो।

मुझे यात्राएँ पसंद हैं लेकिन
यात्राएँ मुझे थका देती हैं।

यात्रा में लोगों के साथ
कोई वह भी होता है
जो वहाँ नहीं होता है।

बड़ी यात्रा पर निकलने से पूर्व
छोटी यात्राएँ ज़रूर करनी चाहिएँ।

यात्राएँ बहुत कुछ देती हैं
यात्राएँ बहुत कुछ ले भी लेती हैं।

मैं अपनी पर यात्रा अकेले हूँ
लेकिन यात्रा में बहुत लोग हैं।

लोगों में और यात्रा में गहरा संबंध होता है।

यात्रा के अनेक पड़ाव होते हैं
कुछ अच्छे,कुछ ठीक तो कुछ बेहद बुरे।

पड़ाव न हों तो यात्री थकान से भर जाएँगे।

पड़ाव यात्रा के चलते रहने के लिए आवश्यक हैं।

कभी-कभी अप्रत्याशित पड़ाव
यात्रा को बाधित कर देते हैं।

कुछ लोग आपको धकेल कर
यात्रा में आगे भागते हैं
आप उन्हें सर उठा कर देखते हैं।

अक्सर सहयात्रियों को लोग याद नहीं रखते
आखिर क्या-क्या याद रखा जाए।

यात्रा लंबी हो या छोटी
समतल कभी नहीं होती है।

कुछ नदियाँ लंबी यात्रा की भागीदार होती हैं।

कुछ पेड़ स्वयं चुनते हैं
अपने मार्ग और यात्रा को।

यात्रा सदैव “यात्रीगण कृपया ध्यान दें”
कहकर सचेत नहीं करती
यात्रा में सचेत रहना पड़ता है।

हवा,पानी,व्यक्ति और शब्द निरंतर यात्रा में रहते हैं।

शब्दों की यात्रा सहयात्रियों के लिए खुराक है।

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चिड़िया को नहीं मालूम !


चिड़िया को नहीं मालूम
कोई रख देता है दाने उसके इंतज़ार में
चिड़िया आती है और उसे चुगते हुए देखकर
खुश होता है कोई।
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चिड़िया उसकी भाषा नहीं जानती लेकिन
वो चिड़िया से रोज़ बात करती है
कि तुम यूँ ही आती रहना
तुमसे मेरे जीवन में गहरी खुशी बसती है।
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क्या चिड़िया कभी सोचती होगी
ये दाना मैं रोज़ खत्म कर देती हूँ
ये दाना रोज़ कैसे आ जाता है।
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कितना अच्छा होता जो एक दिन
चिड़िया बता पाती
कि सब समझती हूँ
तभी हर दिन आ जाती हूँ।
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कोई है जो मेरे इंतज़ार में है
और मैं उसे बेहद प्यार करती हूँ।
***** 

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ज़िंदगी सवालों का घर है।


एक अच्छी ज़िंदगी क्या होती है
एक अच्छी ज़िंदगी के लिए
लोग कितना स्ट्रगल करते हैं
क्या स्ट्रगल करने से ज़िंदगी अच्छी हो जाती है
क्या ज़िंदगी की दुश्वारियाँ स्ट्रगल को समझती हैं
नहीं ना !
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ज़िंदगी हर बार आपको ग़लत साबित कर दे ऐसा ज़रूरी नहीं
मगर ज़िंदगी अक्सर ऐसा ही करती है।
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हम कुछ भी कर लें
ज़िंदगी से मुतमइन नहीं हो सकते हैं।
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जहाँ हर कोई अपना मुस्तकबिल बनाने में
जुटा हुआ है
हर किसी की परेशानियाँ अलग हैं
चैलेंजेज़ अलग हैं।
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हमें कोई हक नहीं कि हम अपने अंदाज़े लगाते रहें
कि कौन कितना खुशकिस्मत है या किसके ऊपर ज़िम्मेदारी कितनी अधिक है।
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ज़िंदगी की छोटी-छोटी ख़ुशियों से उतनी खुशी नहीं होती
जितना उनके खो जाने का डर रहता है।
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ज़िंदगी एक साथ महफ़िल में बैठे हुए
लोगों की तरह ही है
सब साथ लेकिन सब अलग।
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ज़िंदगी की नेमत हो तुम
तुम रहना।
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मुझे नहीं मालूम !


मुझे नहीं मालूम तुम्हारी लिखावट कैसी होगी लेकिन मैं देखती हूँ तुम्हारी अँगुलियों को
मेरा नाम लिखते हुए।
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मैंने सुना है जब-जब तुमने कहा
तुम्हारी बहुत याद आती है लेकिन
मैंने नहीं देखा तुम्हें ये कहते हुए।
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कितना फर्क है ना
सुन लेने और देख लेने के बीच।
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शब्द अपने प्रयोग भर से भर सकते हैं प्राण
बहा सकते हैं प्रेम की लहरें
या खड़े कर सकते हैं उदासी के शिखर।
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शब्द ही वो डोर हैं जो जोड़ देते हैं
कितने ही पुराने प्रेम को लेकिन
शब्द ही ख़त्म भी कर देते हैं सब कुछ।
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शब्दों को सिर्फ सुनना या पढ़ना
काफी नहीं होता कई बार
उन्हें कहते हुए देख लेने को जी चाहता है।
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खिले हुए फूल !


खिले हुए फूल 

सभी को भाते हैं लेकिन 

सिर्फ तब तक 

जब तक वह खिले रहते हैं 

उनके सूखते 

झुकते और गिरते ही 

वह किसी को याद नहीं रहते।

मिट्टी के तले दबकर वह फूल

प्रतिदिन मरते हैं

लोगों के चाहने के भ्रम को 

सच समझने के बाद ! 

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नहीं समझा जा सकता ठीक-ठीक कुछ भी !


नहीं समझा जा सकता ठीक ठीक कुछ भी !
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वो बातें जो कभी हुई थीं
वो बातें जो कभी नहीं होतीं
वे सब बातें घटती रहती हैं निरंतर।
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मन की दशा को
कौन अभिव्यक्त कर सकता है
उसे सिर्फ मन ही जान रहा होता है।
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हज़ार निराशाएँ  सिर्फ आँखें ही कह पाती हैं।
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वो बातें जो कभी कहीं नहीं जा सकीं
वे बातें ही सबसे अधिक सुनाई पड़ती हैं।
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भर आया मन कितना सूखा होता है
ये बस वही जान रहा होता है।
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आँखों को इतना मुखर भी नहीं होना चाहिए
कि सामने वाले की जान निकल जाए।
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आँखें चुराना क्या होता है
ये आँखे चुराने वाला ही जानता है।
***
हर दर्द, हर बात, हर बार नई होती है
हर बार पहले से अधिक झंझोड़ देती है।
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कौन कब किस हाल में है
ये कोई नहीं जान सकता
मन डूबा रहता है और साथ रहती हैं
बस बातें और यादें !
***

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