उदासी


उदासी क्यों आ बैठती है 

यह ठीक-ठीक पता तो रहता है

लेकिन इसकी वजह को स्वीकारना 

मुश्किल होता है।

दुनिया में उदासी किसी को नहीं पसंद 

तो क्या हुआ 

हमेशा पसंद ही साथ रहे 

ऐसा कब होता है।

पसंद ही प्रायः उदासी की वजह होती है।

कोई चिड़िया उदास है 

यह कैसे जाना जा सकता है।

उदास व्यक्ति ठहाकों के बीच भी 

ठहरा हुआ पकड़ा जाता है।

“मुझे फर्क नहीं पड़ता” कहने वाले 

दुनिया के सबसे उदास लोग होते हैं।

कभी सोचा है

कि उदासी में बुराई क्या है

गलत क्या है?

उदासी कभी चलकर आप तक नहीं आती 

व्यक्ति ही लौट लौट कर 

उदासी के दरवाजे पर सर पटकता है।

प्रेम में पड़े लोग 

प्रेम से दूर उदासी की तरफ भागते हैं।

उदासी कभी निराश नहीं करती 

वो सभी को खुद में समाने देती है।

कभी लगता है कि उदासी और पृथ्वी एक ही तो नहीं !

“ज़िंदगी मेरे घर आना” की तरह 

कोई उदासी को नहीं बुलाता 

सब अपने-अपने दुख लिए 

उदासी तक खुद ही पहुंच जाते हैं।

खिले हुए फूल को देखकर भी 

मुस्कान में यदि उदासी है 

तो यह दोष फूल का नहीं लेकिन उदासी का भी नहीं है।

उदासी सदा एक सी रहती है 

लोग उसे अपने अनुपात में रखते हैं।

उदासी का कोई घर नहीं होता

उदासी से कोई प्यार नहीं करता।

मैं उदास हूँ कहने वालों को 

बहुत प्यार करना 

उदासी चुपचाप वहाँ से चली जाएगी…

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जाने वाले कभी लौटते नहीं !


जाने वाले कभी लौटते नहीं !

आप किसी से कितना भी प्यार कर लें 

एक दिन साथ छूटना ही है …

जाना तय है तो दुख न करें

समझाने वाले 

क्या किसी के आने से खुश भी नहीं होते होंगे ?

असमय जाना 

या समय से जाना क्या होता है 

यह कौन तय करेगा ?

पत्थर होना भला होता होगा शायद 

नियति में चोटों को सहना ही लिखा होता है।

वह माटी क्या करे जो नर्म है बहुत

बात बात पर बिखरने लगती है।

जाने वाले कहाँ चले जाते हैं ?

यह आसमान के तारों को भी नहीं मालूम !

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जीवन अकेला नहीं चलता


किसी का भी आना या जाना अकेला नहीं होता है

हम कहते आए हैं,सुनते आए हैं,पढ़ते आए हैं
कि इंसान अकेला आता है और अकेला ही चला जाता है
जबकि ऐसा नहीं है…

कोई भी इंसान कभी अकेला नहीं आता
वह आता है बहुत सारी दुआओं के साथ
भरे पूरे प्यार के साथ,आशीर्वाद के साथ
अनेक रिश्तों के साथ वह जन्म लेता है

उसके आने की खुशी उसकी अकेली नहीं होती
उसके आने में उठा प्रसव पीड़ा का दर्द भी उसका होता है

ठीक इसी तरह कोई अकेला नहीं जाता
किसी का जाना किसी एक की निजी क्षति नहीं होती है
वह अनगिनत लोगों की क्षति होती है

वह एक इंसान अपने साथ इतने रिश्ते
इतने संबंधों को जोड़ता जाता है
कि जब वह जाता है तो वह अकेला नहीं जाता
उसके साथ उसके चाहने वालों का
उसे प्यार करने वालों का
सभी का थोड़ा-थोड़ा कुछ ज़रूर चला जाता है !

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आग और हवा


उसने कहा कि आग लिखो 

तुम्हारी लेखनी में आग नहीं है 

सवाल तो बहुत सारे हैं

लेकिन शिकायतें और आक्षेप नहीं हैं

हर पक्ष पर लिखना तो बात को साधना हुआ 

बात साधारण सी हो तो बात

बात नहीं होती 

बात को असाधारण बनाने की कला ही 

लेखनी में आग भरती है और

जीवन में भी।

जल उठना चाहिए लिखते वक्त हर पृष्ठ और 

उठ जाना चाहिए धुँआ स्याही से 

कि पढ़ने वाला तिलमिला उठे या डूब जाए गहरे अवसाद में

तभी सफल है तुम्हारा लिखना

इसलिए खुद को शांत रखो 

आग लिखो और शीतल बयार की तरह बहो

कि आग और हवा का गहरा संबंध है।

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आम का महीना


आम का महीना बहुत खास होता है 

ठीक उतना ही 

जितना बेटियों का मायके आना।

इस महीने आम बेटियाँ 

खास हो जाती हैं मायके में 

फलाने की बिटिया आई है की चर्चा 

गाँव के घर घर में फैल जाती है 

बौर आने की महक की तरह।

इन आम बेटियों को देख 

माँ-बाप उतना ही खुश होते हैं 

जितना बौर से लदे हुए पेड़ को देखकर

कि सब ठीक है।

घर में कुछ के लिए अमिया की तरह होती हैं ये

कि आई हैं तो काम बढ़ा दिया 

उनकी दिनचर्या का।

खटास से भरी ये अमिया 

पिस जाती हैं 

घर के सब के स्वाद के हिसाब से 

सिलबट्टे पर 

कि चटनी तो सिल पर ही स्वाद देती है।

आम के पकने और मीठे होने तक

ये वापस लौट जाती हैं अपने-अपने घर 

ताकि आम की पूरी मिठास ले सकें

इनके मायके वाले 

अपने हिस्से की मिठास भी 

छोड़ जाती हैं पीहर में

कि बना रहे आने-जाने का जरिया।

फलों के राजा आम का इंतज़ार

सब करते हैं साल भर 

और खुश होती हैं ये कि इंतज़ार 

आम का नहीं इन आम लड़कियों का है

जो हर साल जम आती हैं

फेंकी हुई गुठलियों की तरह घर-घर 

आम होकर भी आम नहीं 

और खास होकर भी खास नहीं 

बस खास मौसम में ही 

मायके में नजर आती हैं यह आम लड़कियाँ।

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धागा


धागा कमज़ोर हो तो उसे चाहे जितने फेरे घुमा लें वो टूट ही जाता है।


एक कमज़ोर धागा मजबूत से मजबूत परिधान को भी उधेड़ सकता है एक ही पल में।


लोग पोशाक को दोष देते हैं। धागे पर किसी का ध्यान नहीं जाता।


मन का धागा जिससे जुड़ता है ज़रूरी नहीं उसे इस धागे की ज़रूरत हो।


चित्त खुश होता है धागे को अपनी ओर खिंचता देखकर
आखिर एक दिन मुझे इसे तोड़ ही देना है।


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जो हम साथ होते


रात को रात में याद नहीं करते 
ठीक उसी तरह दिन को 
दिन में याद नहीं करते ।
दिन की याद आती है 
दिन के बिछड़ने के बाद 
एक दिन
जब मैं बिछड़ जाऊँगी तुमसे 
उस दिन
तुम याद करोगे
कि कितना अच्छा होता
जो हम साथ होते 
काश !
तुम्हें मुझे याद न करना पड़े
जिस तरह मैं तुम्हें याद करती हूँ।

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नदी और समुद्र


नदी कभी नहीं मिटा पाती है
खारापन समुद्र का।


नदी की मिठास का
समुद्र को कोई मोल नहीं होता।


नदी जानी जाती है जीवन के लिए
समुद्र अभिशप्त है ज्वार भाटा के लिए।


जल की अलग-अलग प्रवृत्ति को
दर्शाते हैं नदी और समुद्र।


नदी कभी समुद्र नहीं बन सकती
समुद्र नदी से अनभिज्ञ ही रहता है।


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मुझे न मालूम !


मैं एक पहेली भर हूँ
जो खुद को ही न समझ आए।
*****
एक मैं वो हूँ
जो आप जानते हैं
एक मैं वो
जो मुझे ही न मालूम।
*****
कभी लगता है
मैं सब ख़त्म कर सकती हूँ
एक ही पल में
कभी ये भी
कि मैं खुद ही खत्म हो रही हूँ।
*****
कभी… मुझे कोई न चाहिए।
*****
कभी मैं किसी को प्रिय नहीं
और कभी
यही सच है,
हाँ… बस यही।
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कभी मैं गलत का विरोध करती
कभी मैं घनी चुप्पी हो जाती
कभी मैं प्यार
तो कभी आक्रोश से भरी।
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कभी खुद को तलाशती
कभी गुम होती हुई
मुझे न मालूम कौन हूँ मैं।
*****

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इंतज़ार समझते हैं ?


इंतज़ार समझते हैं ?

जब कोई किसी के इंतज़ार में होता है
तो वह और कहीं नहीं होता है।
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इंतज़ार की दुनिया में फूलों से लदे कैक्टस
पानी की सतह पर तैरते हैं।
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दूर खिला कोई कमल किसी के इंतज़ार में नहीं रहता

लोग उसके इंतज़ार में रहते हैं।
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जलकुंभी इंतज़ार में कैसे खत्म होती है
फिर उगती है
यह कमल को कभी नहीं मालूम होता।
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कैक्टस के फूल झड़ जाते हैं
उन्हें नमी की आदत नहीं।
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कैक्टस फिर भी बचाए रखता है हरापन
कहता है सख्त कंटको से
मैं इंतज़ार में हूँ
तुम साथ ही रहना।
*****

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