बच्चे बड़े होने के इंतज़ार में हैं
तो युवा सफ़र पर मंज़िल के इंतज़ार में
मुसाफ़िर प्लेटफॉर्म पर ट्रेन के इंतज़ार में
ट्रेन में घूमता चाय वाला ग्राहक के इंतज़ार में
सरहद पर जाते सैनिक का परिवार उसकी वापसी के इंतज़ार में
तो सरहद अपने सिपाही के इंतज़ार में
दुश्मन ताक में है बस एक भूल के इंतज़ार में
और सैनिक उसकी किसी हरक़त के इंतज़ार में।
जाड़ा घटता हुआ बसन्त के इंतज़ार में
गरमी परेशान है बारिश के इंतज़ार में
कर्ज़ में डूबा किसान सुरक्षित फसल के इंतज़ार में
बेटी के माँ-बाप अच्छे वर के इंतज़ार में
सज गया जनवासा बारातियों के इंतज़ार में
भीगी आँखों से बैठी माँ, विदाई के इंतज़ार में
कहीँ कट नहीं रहा समय नव बधू के इंतज़ार में
पूरा परिवार है ख़ुश नई पीढ़ी के इंतज़ार में
कुछ बुज़ुर्ग भी हैं अंतिम सफ़र के इंतज़ार में।
चाँद से सूरज तक का इंतज़ार…
नव जीवन से मृत्यु तक…
सब इंतज़ार में हैं !!!

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जनवरी 20, 2019 · 7:56 पूर्वाह्न

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ये दुनिया एक मेला ही तो है !


सब अलग- अलग रंग रूप लिए

अपने विचारों के साथ अपनी नज़र की दुनिया से जुड़े हुए

ज़रूरी नहीं कि आपको सब भाएँ

ज़रूरी नहीं कि आप उन्हें गले लगाएँ

ज़रूरी बस इतना कि सब के प्रति कोई दुर्भाव न पालें

परिस्थितियाँ और अनुभव सभी के अलग ही हैं

हमें नहीं पता कौन किस हाल में है और फिर भी मुस्कुरा रहा है

क्यों न ख़ुद को जानें और छोड़ दें उन्हें उनके हाल पर

कि किसी को उबरनें दें ख़ुद से, जबकि सिवा तकलीफ़ बढ़ाने के

कुछ और कर नहीं सकते

छोटा बड़ा,मोटा या पतला कोई नहीं होना चाहता

सब सुंदर हैं और सुंदर दिखना चाहते हैं

ज़रूरत एक साफ़ और तेज नज़र भर की है।

ये किताबें अलग – अलग विधा की

विषय भी अलग हैं फिर भी सब एक हैं मेले में

सब एक हैं बस्ते में

ये किताबों का मेला ये ज़िंदगी का मेला

फ़र्क क्या है ….ये दुनिया एक मेला ही तो है।

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नज़रिया !


भारत गंगा
पाकिस्तान इंडस
बांग्लादेश पदमा
नेपाल घाघरा
चीन ब्रम्हपुत्र
और अमेरिका ?
अब ये न पूछना कि ये क्या है
कहूँ कविता
तो आँखें न फैलाना
कयोंकि
ये चंद नाम नहीं कविता के
विश्व के कैनवास पर
भूत भविष्य और वर्तमान हैं।

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