जीवन हो तुम


लगते हो मुझे कितने प्यारे से तुम
जीवन के अंधेरों में उजियारे से तुम
वो हँसना तुम्हारा लगे यूँ मुझे
जैसे सागर में कोई लहर सी उठे
वो आँखें तुम्हारी हैं इतनी मासूम
गहराइयों में इनकी भरा है सुकून
हर बात तुम्हारी लगे सबसे न्यारी
सारी खुशियों की हो तुम इक क्यारी
जब भी ह्र्दय से आ लिपटते हो तुम
जीवन को नयी सुबह दे देते हो तुम
हमारे जीवन का आधार हो तुम
खुद में नहीं रहे हम
हमारा जीवन हो तुम…!

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1 टिप्पणी

Filed under कविता

One response to “जीवन हो तुम

  1. Har kavita ka ek ek shabd “HRIDYANUBHUTI’ naam ko sarthak karta hai….the expressive power is immense and the word selection perfect. keep on discovering yourself through this gift of god to you “an excellent power to express yourself”. keep writing. god bless.

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