रिश्ते


हमने देखा है रिश्तों को खोते हुए
धन के आगोश में सोते हुए…
सब रिश्तों से ऊपर दिखता है धन
चाह में उसी के डूबा रहता है मन
ऐसा कौन जिसने तुझे प्यार न किया
ऐसा कौन जिसे तूने फटकार न दिया
फिर भी सब रिश्तों से ऊपर है धन
हमने देखा है रिश्तों को खोते हुए
धन के आगोश में सोते हुए…
छुप-छुप के तुझसे प्यार सब करते यहाँ
नहीं करता कोई इस रिश्ते को बयाँ
हर दिल की है तू पहली पसंद
इसीलिए तुझे सब रखें नज़र बंद
हमने देखा है रिश्तों को खोते हुए
धन के आगोश में सोते हुए…

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2 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

2 responses to “रिश्ते

  1. Leo

    Quite true.. Love happens first, and then the money becomes a factor, where it really shouldn’t. Well put.

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