पहली बार का इंतजार


भर आए थे आँखों में आँसू
जब कहा था आपने,
हँस दोगी तुम
वो पहली बार आपका
बाहर कहीं जाना
पहाड़ो को छूना-होटल का रुकना
ट्रेन का पहला वातानुकूलित सफ़र।
सुन कर बात सारी
आँखें हुई थी नम
हाँ,इक खुशी थी होठों पर
लेकिन हँसे नहीं थे हम।
पार होती उम्र के
इस पड़ाव पर, मिला ये अवसर
खुशी है कि आया तो जीवन में
आपके ये-पहली बार
दिल दुखा था लेकिन नहीं रोये थे हम
न जाने कितने जीवन
गुज़र जाते होंगे,करते इंतजार
कि फिर लेंगें जनम हम पहली बार…

2 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

2 responses to “पहली बार का इंतजार

  1. alok

    Jeevan bhar chalna hi hai
    khush ho ke rahna he hai
    dil to dukhte he rahen ge
    hme rato ke bad subh ka intjar karna hi hai
    khush to rahna hi hai………….

    ye hi to jeevan hai…….

    Good………..

  2. आलोक जी आपकी टिप्पणियों का अन्दाजे़ बयाँ बहुत ही खूब है।शुक्रिया…

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