साथ तेरा


तू साथ नहीं मेरे इसका गम नहीं
तू पास है मेरे,है इसकी खुशी मुझे
तुझे पा न सकने का गिला नहीं कोई
क्योंकि तुझे खोने का डर नहीं मुझे
तू याद मुझे आए इसकी कोई वजह नहीं
दिल में ही मैंने समाया है तुझे
ख़्वाबों के टूटने की गुंजाइश ही नहीं
सच के रूबरू मैंने पाया है तुझे
अनकहे लफ़्जों की दस्तक हूँ मैं
भावनाओं में मैंने है समाया तुझे…

8 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

8 responses to “साथ तेरा

  1. ख़्वाबों के टूटने की गुंजाइश ही नहीं
    सच के रूबरू मैंने पाया है तुझे
    अनकहे लफ़्जों की दस्तक हूँ मैं
    भावनाओं में मैंने है समाया तुझे…

    OMG… wo kaun disha hai jo tujhse nahin judti… 🙂

    wow… jst awesome work… induji…

  2. Leo

    I don’t think I can transliterate to Hindi 🙂 but I really loved the poem. It was very romantic and wonderfully written. Loved it.

  3. रूबरू has some specific meaning? I thought it is a rhythmic word

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