आज भी है याद


आज भी है याद
तेरी खुशबू का अहसास
कितनी ताज़ा कितनी साफ़
वो छुप के तुझे देखना
वो आँखो से,तेरा छूना
आज भी है याद…
वो शरीर की सिहरन
वो साँसों का तेज चलना
चाह में तेरी,यूँ खुद में सिमटना
आज भी है याद…
हर दिन तेरा आना,और बिन कहे
सब कछ बोल जाना
हर दिन का वो मिलना
और बिन मिले,एक दूजे मे
समा जाना
आज भी है याद…
सालों बाद भी आज करीब है,वो अहसास
बसा है इन साँसों में
तेरा हर जज़बात
अनछुए,अनकहे हर पल
सिमटे हए हैं मेरे पास
आज भी है याद…

38 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

38 responses to “आज भी है याद

  1. नोस्टाल्जिया होता है – ऐसा ही होता है!

  2. “आज भी है याद
    तेरी खुशबू का अहसास
    कितनी ताज़ा कितनी साफ़
    वो छुप के तुझे देखना
    वो आँखो से,तेरा छूना
    आज भी है याद…” इन पंक्तियों का माधुर्य मर्मस्पर्शी है , इन्दु जी ! बधाई !

  3. It’s so romantic Indu…Who will forget such experiences? After reading your poem, I have a smile on my face…Lovely

  4. प्रवीण पाण्डेय

    स्मृतियाँ ऐसे ही सहेजी जाती हैं।

  5. I am subscribing to email posts as wordpress doesn’t have followers option. I miss a lot of your work otherwise…

  6. एक उम्र तक ही याद रहता है .. एक समय ऐसा भी आता है जब सोच कर भी नाम याद नहीं आता .. इस बूढ़ों वाली टिप्पणी के क्षमा चाहता हूँ 🙂

  7. “आज भी है याद
    तेरी खुशबू का अहसास
    कितनी ताज़ा कितनी साफ़
    वो छुप के तुझे देखना
    वो आँखो से,तेरा छूना
    आज भी है याद…”

    इन्दु जी,

    ये मधुर अहसास सच में ऐसे ही याद रहते हैं …सुन्दर प्रस्तुति एवं मधुरतम अहसास …..शुभकामनाओं सहित…

  8. सुंदर कविता.
    इंदु जी, इस थीम में अक्षर छोटे दिखते हैं, बेहतर होगा यदि आप Pilcrow थीम लगा लें. उसमें ब्लॉग बहुत सुंदर लगेगा.

  9. भावनाओं को संजो कर लिखी हुई कविता – “आज भी याद है|”

  10. aaj bhi yaad hai
    आज भी है याद
    तेरी खुशबू का अहसास
    कितनी ताज़ा कितनी साफ़
    वो छुप के तुझे देखना
    वो आँखो से,तेरा छूना
    आज भी है याद………….. wow wonderfull

    सालों बाद भी आज करीब है,वो अहसास
    बसा है इन साँसों में
    तेरा हर जज़बात
    अनछुए,अनकहे हर पल
    सिमटे हए हैं मेरे पास
    आज भी है याद…

  11. kitani sundar wording ………wo pal aaj bhi yaad hai ……… pryari si kushbu ki tarah ……. well written .
    its very true ………..
    कविता लिखी नहीं जाती स्वतः लिख जाती है…………
    ek praya eahsas……….ek khusbu …!
    love your poetry ……!

  12. Shazoor Mirza

    बहुत ही सुन्दर लिखा है.. मेरा ह्रदय तो झूम उठा !

  13. PRAVEEN

    Gyandutt Pandey ji ne sahi kaha “NOSTALGIA” hi kehte hain ise…..kitna sundar ehsas… maa saraswati aapki lekhni ko yun hi bhawnayein pradan karein……..oops. i mean aapke laptop ke keypad ko…..
    wonderful work. ab to aapki kavita ka intezar karte hain, har baar ek naya bhav, ek naya ehsas aur ek har baar chehre par muskurahat barbas aa jati hai…….

  14. लेकि‍न केवल यादें ही रह जाते हैं, वो अनुभव दुबारा नहीं रहता… हर अनुभव अनूठा ही होता है, उसकी ताजकी उसके उसके महसूसने के लम्‍हों में ही होती है… नदी में पानी तो होता है पर वैसा ही, दुबारा नहीं।

  15. याद आना और याद आने की अनुभूति के तले
    किसी की यादों की खुशबू से बुनी चादर
    में सिमट कर सर को छुपाकर
    यूँही जीवन के पलों को समेट लेना
    फिर यादें याद आती रहेंगी
    दिल की दिल से बिन मिले मुलाकातें होती रहेंगी

  16. धन्यवाद ईश्वर जी…
    आपने भाव-भरी रचना कर दी…

  17. Aisa lagta hai mera comment koi mayne nahi rakhega…kyunki yeh doosro ke comments se kuch alag nahi…kyunki sabhi ki tarah is kavita ne mere bhi dil ko chuaa hai…

    Admired your lines v much. Congratulations for your beautiful words.

    -Shef

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s