ज़िंदगी के रंग कई


गिरगिट की तरह रंग बदलती है ज़िंदगी
बचपन की हरकतों का बयाना है ज़िंदगी
जवानी की धड़कनों का गुनगुनाना है ज़िंदगी
बुढ़ापे की रुकी सांसों का आना है ज़िंदगी
मौत को चुपके से बुलाना है ज़िंदगी
गम ए दिल का समंदर है ज़िंदगी
तिल-तिल कर हर रोज मिटाना है ज़िंदगी
हजार आँसुओं का आना है ज़िंदगी
हर नाम पर रहती तू कु्र्बान ए ज़िंदगी
ऐ जिंदगी तेरे ग़म से परेशान ए जिंदगी
तुझे समझ पाना है मुश्किल ए ज़िंदगी
हँसा कर रुलाना ही आदत है ज़िंदगी
एक खुशी देकर बहलाना है ज़िंदगी
हर रूप में एक नयी बसती है ज़िंदगी
नयी धड़कनों की आवाज़ है ज़िंदगी
हर सुबह एक नयी शुरुआत है ज़िंदगी
ऐ ज़िंदगी तू है बड़ी अजीब ज़िंदगी
तू ही बता क्या यही तेरा नाम ज़िंदगी…

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25 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

25 responses to “ज़िंदगी के रंग कई

  1. पर फिर भी ज़िंदगी कुछ नहीं तेरे बिना…

  2. uff yeh zindagi…wah wah yeh zindagi.. indu ke shabdo mein yeh zindagi 🙂 🙂 lovely lovely, just beautiful 🙂

  3. jo ho gaya so ho gaya…
    aage badhte rehna ka naam hai zindagi..
    jo hona hoga..wo ho kar rahega..
    phir bhi apna kaam karte rehna ka naam hai zindagi.. 🙂

    padh kar achha laga..

    Kunal

  4. alok

    rote hue ko hansana hai jindgi
    atma se rubru hojana hai jindgi
    jeevan ke har pal ko jee jana hai jindgi
    samaj ko kuch de jana hai jindgi
    mout se yarana hai jindgi…………….

  5. again beautiful . …….
    aage chalte rahane ka naam hai jindagi .,
    or aapki kavitaon ke sang jine ka naam hai jindagi . 🙂

  6. Alpesh Arya

    बहुत सुन्दर , प्यारी, दिलकस और गहन काव्य है
    तू हमेशा हस्ती रहे जिंदगी और हर पल सत्य के करीब ले चले जिंदगी

  7. Nice poem. Best part is that you can keep adding to it newer verses so in some sense the poem is never complete.

  8. प्रवीण पाण्डेय

    जीवन के हजारों रंग, जीने के लिये।

  9. जो गुज़र गया, उसे न याद कर
    है जो गुम, एक पल ना बरबाद कर
    जो है ना तेरी काबू में, काहे उनपे वार कर

    बसा ले…..
    एक दुनिया सपनोकी…..
    है न कभी वहां इंतजार
    ना लूट सके कोई एक भी बार

    जनक – ०८-१७-2011

  10. निश्‍चित रूप से जीवन के रंग कई है। गरीबी का रंग एक ही रहता है। ‘सर्जना’ पर पढिये —-फिर दिल्‍ली में बात चली है सारा सिस्‍टम बदलेगा’

  11. संजय

    एकदम अद्भुत कविता है

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