समय की नाप


बीत रहा है समय हर क्षण
और हम करते हैं बातें सिर्फ समय की
समय क्या है? किसे पता है
बीत हुआ समय है या चल रहा है जो
किसे कहेंगें आप!
या कि जो आने वाला है।
फँसे रहेंगें इसी के मध्य आप,
हम और वो जो बनते हैं विद्वान
समय को मापने के।
पर क्या समय को मापा या नापा जा सकता है
क्योंकि उसे नापने में
जो बीतेगा समय उसे कैसे नापेंगे आप।
एक समय को नापने में
बीत जायेगा दूसरा समय
और हम करते रहेंगें चर्चा समय पर।
क्यों न कोशिश करें उसके अनुरूप
स्वयं को बदलने की
याद रखें बस इस समय को जो
हर क्षण साथ चल रहा है।
सम्भव नहीं समय को आगे या पीछे नापना-
बल्कि उसके साथ चलना ही उचित
समय है समय का…

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24 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

24 responses to “समय की नाप

  1. प्रवीण पाण्डेय

    सच कहा, नापा तो उसे जा सकता है जिस पर वश चलता हो।

  2. सुन्दर रचना. जब हम किसी से पूछते हैं , कैसे टाइम पास हो रहा है, हम भूल ही तो जाते हैं की वास्तविकता तो कुछ और है.

  3. आप ने इस रचना के माध्यम से बहुत ही सार्थक भाव प्रस्तुत किया है की हमें समय के साथ खुद को ढालना चाहिए ताकि जीवन में हम हर पल हम तरक्की प्राप्त कर सकें| शुभकामनाएं!

  4. सच में समय बहुत बलवान होता है इसलिए तो कहा गया है ….`मानुष बली होत नहीं, समय होत बलबान /भीलन लूटी गोपिका ,वही अर्जुन वही बाण |
    जिसने समय की महत्ता समझी वही महान बन गया….नापा तो बिलकुल नहीं जा सकता …विचारपूर्ण कविता के लिए बधाई …..

  5. Alpesh Arya

    याद रखें बस इस समय को जो
    हर क्षण साथ चल रहा है।
    सम्भव नहीं समय को आगे या पीछे नापना-
    बल्कि उसके साथ चलना ही उचित
    समय है समय का…

    Nice

  6. Very profound thought expressed in such few lines. Instead of doing meaningless things, it is best to move with the times, because the time now is what we have and can use.

  7. बहुत ही खूबसूरत मन और विचारों से सुंदर कविताएँ लिखी जाती हैं और मुझे यहाँ कुछ ऐसी ही कविताएँ पढ़ने को मिलीं बधाई और शुभकामनाएं |

  8. सुन्दर ब्लॉग और सुन्दर कविताएँ बधाई और शुभकामनाएं |

  9. रचना पसंद आई आप सभी को,लिखना सार्थक हुआ…
    ह्रदयाभार…

  10. एक समय को नापने में
    बीत जायेगा दूसरा समय
    और हम करते रहेंगें चर्चा समय पर

    अति सुन्दर.. रचना की प्रशंसा में क्या कहूँ, मुझे ऐसे शब्द ही नहीं मिल रहे हैं जो रचना की उत्कृष्टता के साथ पूरा न्याय कर सकें…. एक समय को नापने में बीत जायेगा दूसरा समय और हम निन्यानबे के फेर में उलझ कर बस यूँ ही समय गंवाते जायेंगे. समय पर सिर्फ चर्चा करने के बजाय समय का सदुपयोग करें… यह जो सन्देश दिया है अपने अपनी रचना का माध्यम से यह ज़िंदगी की बहुत बड़ी सीख है.

  11. कल 17/10/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

  12. mridula pradhan

    एक समय को नापने में
    बीत जायेगा दूसरा समय
    kitna sahi kaha hai…….maan gaye aapko.

  13. एक समय को नापने में बीत जायेगा दूसरा समय … गहन अभिव्यक्ति ..

  14. वाह! बहुत बढ़िया विश्लेषण….
    सादर बधाई…

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