ये कैसी सुबह ?


फिर धमाका फिर गईं जानें
कैसे इस दर्द को अब
नया दर्द मानें
हर बार है होता यही
हर बार हम खोते सभी
हमारे अपनों की जानें।
मानवता कहाँ गई
टूट कर बिखर गई
खोकर अपनों को
टूट गए हम भी
यूं तो लाल रंग पसंद था कभी
रक्त से भरा इसे
कैसे स्वीकारें
हमने खोया क्या
कैसे उन्हें बतायें
जो करते बार-बार
हैं प्राण पे प्रहार
काश! ईश्वर कहीं से
उन्हें ये बताये-
वो भी हैं इंसान
फिर क्यूं ये हैवानियत
कैसे,लोगों की जानों से
उन्हें सुकून आये
हमारा लहू भी है उन्हीं की तरह
फिर कैसे ये उसमें रंग भेद लाये
ले लेकर जानें इतनी
वो अभी भी,मर न पाये ?…

आँखे शून्य हैं ज़ुबां भी खामोश,ह्रदय है रोता हुआ देख आज सुबह का रूप…

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12 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

12 responses to “ये कैसी सुबह ?

  1. Today,s fact,nicely expressed ,I am happy you choose life related and current issues,keep it up
    best wishes

  2. प्रवीण पाण्डेय

    पीड़ाजनित सुबह।

  3. Don’t have much to say, just condolences for the families who lost their loved ones.

  4. इस दर्दनाक सुबह को क्या कहें इससे तो रात भली । जिनकी सोच ही नही है उनसे क्या आशा क्या अपेक्षा !

  5. सुबह भी दर्दनाक और रात भी कहां भली रही… रात को तो भूकम्‍प से पूरी दिल्‍ली ही बाल-बाल बची है…

  6. Though I know Hindi, I have not acquired the knowledge to comprehend the meaning of a hindi poem.Will you add a google translate widget on your blog? Follow this link for adding google translate :http://translate.google.com/translate_tools

  7. हृदय विदारक सुबह ..हैवानियत की हद हो गई है …पता नहीं यह कब तक चलेगा …ईश्वर भी कूछ करता क्यों नहीं ….

  8. sanjay bhaskar

    एक सम्पूर्ण पोस्ट और रचना!

  9. आँखे शून्य हैं ज़ुबां भी खामोश,ह्रदय है रोता हुआ देख आज सुबह का रूप…
    मन का दर्द शब्द भी सहेजने में अश्मार्थ नजर आते हैं कभी कभी …

    जलती है हर भीड़ यहाँ |
    बेबस नयना लाचार है मन | |
    हर गली में जब इन्शान ही है |
    फिर क्यूँ लुटता हर पल जीवन | |

  10. हम सब भारतवासियों के उदगार आपने सशक्त शब्दों मे व्यक्त किये हैं ……

  11. Hey! I could have sworn I’ve been to this website before but after browsing through some of the post I realized it’s new to me. Anyways, I’m definitely delighted I found it and I’ll be book-marking and checking back frequently!

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