भावों के अक्षर


यूं तो भावों के अक्षर दिखते नहीं
फिर भी पढ़े जाते हैं भाव सदा से
हैं जिसके लिये जो भी दिल में उठे
कहे अनकहे व्यक्त हो ही जाते हैं
भावों को कहने की ज़रूरत तो नहीं
फिर भी हैं आज इतने निरक्षर
जो पढ़ नहीं पाते,इन भावों के अक्षर
उन्हें साक्षर बनाने के लिये
भावों को भी कहना पड़ता है।
भावों को बयाँ करना मुश्किल तो नहीं
फिर भी हम यही कर नहीं पाते
उससे भी आसां है उनको समझना
अफ़सोस! उन्हें हम समझ नहीं पाते
भावों के रूप हैं इतने सारे
नित नये विद्यार्थी,खूब नज़ारे
फिर भी रह जाते हैं भाव अधूरे
है इनकी ये किस्मत,ये भाव नहीं पाते
उठते हैं रोज ही,कहते भी रोज
मैं हूं एक भाव जो प्यार से भरा
हर रोज ही जीता हर रोज ही मरा…

Advertisements

28 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

28 responses to “भावों के अक्षर

  1. It’s very difficult to understand feelings, even if we speak it aloud. It’s still easy to convey but impossible to feel. Beautiful poem and fine expression…

  2. प्रवीण पाण्डेय

    भावों की भाषा में अक्षर नहीं होते, सब ही क्षरणशील होता है।

  3. “फिर भी हैं आज इतने निरक्षर
    जो पढ़ नहीं पाते,इन भावों के अक्षर”

    सुन्दर बहुत सुन्दर
    इंदुजी लिखते रहो भावों को
    प्रकट करते रहो
    समझ आये उन्हें भी सलाम
    जिन्हें समझ नहीं आये
    उन्हें भी सलाम करते रहो
    कोशिश में निरंतर लगे रहो

    “कुछ होते
    निखट्टू निरक्षर
    लाख समझाओ
    समझना नहीं चाहते
    कुछ होते जिद्दी निरक्षर
    जानते हुए भी,
    जानना नहीं चाहते “

  4. भावों को शब्‍दों में पिरो दो तो काव्‍य बना जाता

    भावों और शब्‍दों इसलिए गहरा नाता है।

    सच में भावों को भांगिमा दे दी आपने।

  5. वाह बहुत सुन्दरता से भावो को सही व्यक्त करने में जो मुश्किलें कभी कभी आती है उन्हें बयां किया है. सच शब्दों की कमी नहीं पर जो दिल की बात सही ढंग से कह सके शायद वही कलाकार भावो की अभिव्यक्ति आसन नहीं पर दिल से कही बात किसी को ना छुए यह भी संभव नहीं

  6. जहाँ न पहुंचे रवि, वहाँ पहुंचे कवी
    बहुत खूब इंदु जी…….

  7. हर युग में लगता है कि भावों के निरक्षर जितने उस युग में हैं, उतने कभी नहीं रहे। हर युग में अभिव्यक्ति की नयी विधायें खोजी जाती हैं, वे भी पूरी नहीं पड़तीं।

    यह कशमकश सतत चलती है।

  8. sanjay bhaskar

    कोमल भावों से सजी ..
    ……….दिल को छू लेने वाली प्रस्तुती

  9. सच में मनुष्य निरक्षर हो गया है यह संवेदनशून्यता की स्थिति बड़ी ही भयावह है …अब लोगो को मौन की शान्ति नहीं शब्दों की वाचालता पसंद है ..हर युग की एक तासीर होती है …परिणाम तो वक्त बताएगा | काव्याभिव्यक्ति के लिए शब्द संयोजन,सम्प्रेषनीयता एवं गतिशीलता अत्यंत महत्वपूर्ण है जिसका ध्यान हर लेखक-कवि को रखना चाहिए … सुन्दर रचना के लिए बधाई ….

  10. इसीलिए जो बिना कहे ही हमारे दिल की बात समझ ले, वह हमें बहुत प्रिय होता है!

  11. भावों की अभिव्यक्ति बहुत ही मार्मिक है

  12. भावों को समझने की जन्मजात कुशलता हम सब पाते हैं…. लेकिन शायद समाज में अपने अस्तित्व और स्व के लिए जूझते-जूझते हम भूल जाते हैं दूसरों के भावों को समझना, या शायद अब समझना ही नहीं चाहते हम…. शायद अपने में ही इतने विलीन हो जाने लगे हैं हम।

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s