रूमानी अहसास


रेशमी अहसास कुछ चाँदनी
सा आज
बहके हुए जज़बात,हैं
हमारे साथ
दूर तक फैली हुई तेरी
आरजू़ है बस
पलकों में बंद सिमटा वो
अनछुआ सा सच
न चाँद है साथ न तारों
की है छाँव
फिर भी है रौशन तेरे
होने की चाह
बहके से हम हैं,
बहके कदम
इक आगोश तेरा
गुम न जाएं हम
ये प्यार है कि बस
खुद को पाने की चाह
रेशमी अहसास… कुछ रेशमी अहसास…

28 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

28 responses to “रूमानी अहसास

  1. Alpesh Arya

    बहुत ही अच्छी और क्या बताऊ … कुछ रेशमी अहसास…

  2. nice one…..semms from heart as always
    अहसासों की चांदनी
    मन में आग लगाती
    दूर तक फ़ैली हुयी आरजू
    चुप नहीं बैठने देती
    निरंतर ख्यालों के
    आगोश में खोयी रहती
    आपके शब्सों को तोड़ मरोड़ने के लिए क्षमा

  3. “न चाँद है साथ न तारों की है छाँव
    फिर भी है रौशन तेरे होने की चाह”

    …इसको पढ़ना ही है एक रेशमी अहसास!!

  4. Induji,aapki meri rchna ko sarahne ke liye dhanaywad..aur aapke shabd ”kavita likhi nahi jati swatah likh jati hai ”poori tarah ‘sateek”abhivkti hai …aap kcverma.blogspot.com

  5. न चाँद है साथ न तारों
    की है छाँव
    फिर भी है रौशन तेरे
    होने की चाह

    इन पंक्तियों की छुअन मानो रेशमी राश्मियों की पराकाष्ठा हो …बहुत मनभावन

  6. प्रवीण पाण्डेय

    भावों के क्षितिज पर आरूढ़ रहें।

  7. जीवन बड़ा खुरदरा है, धुंधलकों से नि‍कलें

    ना अंधेरों में फि‍सलें, सच, सच का ककहरा है

  8. bahut hi sundar…kuch ankahe ahsaas yun hi lehro se uth rahe hain….yeh panktiyan padne ke baad

  9. Passionate and full of desire are the words that come to my mind after reading it. Har shabd, har bhaav mai prem hai…Loved reading it, many times!
    Congratulations on such beautiful words.

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