तेरी जुस्तजू


तेरी जुस्तजू है,तेरी आरज़ू
तेरा ही ख़याल है,बस तू ही तू
तुझे न ख़बर हम यूँ,हुए बेख़बर
तेरी चाह में कब यूँ,बीती सहर
तेरी जुस्तजू है,तेरी आरज़ू
तेरा ही ख़याल है,बस तू ही तू…
देखा कभी जब भी,निगाहों ने हमको
हुआ कुछ हमें था,न तुम्हे है ख़बर
धड़का है दिल फिर से,धड़की हैं साँसें
कैसे कहें तुमसे,हाल ये मगर
तेरी जुस्तजू है,तेरी आरज़ू
तेरा ही ख़याल है,बस तू ही तू…
आवाज़ तेरी है,हमें ही पुकारे
तुम्ही न समझ हो,न समझो इशारे
दिल चाहे कहना तुमसे,यही बार-बार
तुम हो हमारे हम ही,हैं तुम्हारा प्यार
तेरी जुस्तजू है,तेरी आरज़ू
तेरा ही ख़याल है,बस तू ही तू…
दिल की इन बातों को तो,समझो कभी
पास आओ ले लें,तुमको आगोश भर
तेरी जुस्तजू है,तेरी आरज़ू
तेरा ही ख़याल है,बस तू ही तू…

26 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

26 responses to “तेरी जुस्तजू

  1. इंदुजी सुन्दर अभिव्यक्ति

    “मैं अंदाज़ लगा रहा हूँ
    दिल उनका भी
    धड़कता होगा
    धड़कती होंगी
    उनकी भी सांसें
    दिल मिलने को
    करता होगा
    ज़रूर होगी उनकी भी
    कोई मजबूरी
    या फिर पता ना होगा
    आपके ज़ज्बात का “

  2. very nice Indu…..do listen to ‘tu hi tu’ from Nagesh Kuknoor’s ‘Mode’ releasing next week, music by my friend Tapas ‘Hanuman’ Relia…

  3. जितनी सुन्दर कविता उतनी ही सुन्दर निरंतर जी की टिपण्णी…बहुत खूब..

  4. kya baat hai teri hi justajoo
    teri hi arjoo…….baas tera hi khayal hai ……..
    indu ji isilye humko aapse pyar hai ……
    shabdo ke saath har pal har lamha
    tera hi intajar hai ………bar -bar padte rahe ham aapki kavitao ko …….
    isliye dil bekara hai ………!
    aapko dekhna aur aapki kavitao ko padna………….. hamesha accha lagata hai . ..! aapki rachnaye dil ko phir se nayi tajgi de jati hai ….is bar late ho gayi aapke blog par aane ke liye ……… any way badhai ho aapko ………isi tarah har bar naya pan liye aapki rachnao ka intajar ……… 🙂

  5. इंदु जी ,जज्बातों को पिरोना ,माला बनाना ,उस माला को फिर शब्द -पुष्पों से सजाना.
    कुदरत ने दिया है आपको ,अनमोल अद्भुत ये खज़ाना .. सुंदर रचना ,बधाई

  6. sunil kumar

    खुबसूरत अहसासों को लफ़्ज दे दिए बहुत खूब …..आपके ब्लॉग पर शायद पहली बार आया .

  7. Kamlendra Pandey

    Teri justju teri arzoo me,
    roz marte rahe hum yaha is kadar
    chah hai aaj bhi.. tu jo aaye idhar
    kahe sake hum kahi kisi bhi dagar
    kitna chaha tumhe , manga rab se kis kadar
    Teri ulfat , teri bewafai sahi hai agar
    aaj bhi intejar hai , rahega umr bhar

    Indu ji , You simple rocks…You lines were touching up the heart….
    appreciate !!!!!

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