शायराना अदांज़-1


आसां न होगा राहे इश्क पे चलना
पर हो गया जब,फिर क्या गिला करना,
रोके कब रुका है राहगीरों के इश्क
गज़ब का अहसास है किसी से प्यार करना।

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21 टिप्पणियाँ

Filed under शेरो-शायरी

21 responses to “शायराना अदांज़-1

  1. बेहद खूबसूरत…
    “लाख रोको रुकता नहीं
    होना हो तो होता ज़रूर है “

  2. बहुत खूब, कठिन राह है प्रेमनगर की।

  3. आसां न होगा आप के शेर के तारीफ़ न करना
    पर जब मुँह से वाह निकल ही गयी तो क्या गिला करना 🙂

  4. गजब का अहसास है किसी से प्यार करना ………
    बहुत ही सटीक अभिव्यक्ति ……..

  5. that was wonderful….even with my limited skills in hindi lit i loved the entire sound of it.

  6. शायराना अंदाज़ आप सभी को लुभा सका…शुक्रिया…

  7. प्रेम..एक संवेदनशील अनुभूति जिसकी छुअन मात्र से उठी सिहरन…किसी सुनामी से कम नहीं……..बेहतरीन पंक्तियां

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