औरत का जीवन


औरत का जीवन भी
जीवन है क्या
हर दिन नया जन्म
नयी शुरुवात है
इक ही जीवन के हैं
कई-कई रूप
इन रूपों में डूबी
औरत है कहाँ ?
कहते हैं लोग औरत को महान
क्या सच में कर पाते हैं
उसका मान…
माँ,बहन,बेटी न जाने कितने नाम
इन सब के बीच में
औरत ही रही गुमनाम
कोई एक रूप वो
चुने भला कैसे
सम्पूर्णता पे उसकी ये
प्रश्न चिन्ह कैसे!
हर रूप में जीकर ही
बनती वो महान
अपने मूल रूप की न
कोई पहचान
निर्बल भी वो है सबल भी वो
ममता भरी है मृदुल भी वो
फिर भी है अपने आप से अंजान
रिश्तों में ही समाई है उसकी जान
कहते हैं लोग औरत है महान..

28 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

28 responses to “औरत का जीवन

  1. nobody can understand the pain of a woman ,more than woman,
    Nicely written as always

  2. सच है की महिलाओं के बिना ये दुनिया नहीं चल सकती, पर फिर भी सबसे बुरी दशा उन्ही की है, ओरतों की उसी दशा को शब्दों मैं लिखा है, सच ही कहा है आपने “कविता लिखी नहीं जाती,स्वतः लिख जाती है”

  3. ओरतों के जीवन के उतर चढ़ाव को अपने बखूबी प्रस्तुत करा है, इसमें कही दर्द है तो कही गर्व (इस बात का की औरत भी कुछ है) औरत सम्पूर्ण है और कोई उनकी “सम्पूर्णता” पे प्रश्न चिन्ह नहीं लगा सकता है

  4. माँ,बहन,बेटी न जाने कितने नाम
    इन सब के बीच में
    औरत ही रही गुमनाम।

    I can not agree more! I so feel lost at times, I just wish I could be a human being and not worry about all the relationships I need to care about 🙂

  5. औरत धरती की तरह सहनशील होती है, इसीलिये महान कहलाती है ,इंदु जी बहुत अच्छा लिखा है |बधाई

  6. औरत का जीवन पड़ने के बाद मैनें आपको ३ कवितायेँ, औरत से जुडी हुई ,भेज दी हैं |कृपया पड़ें औरअपने प्रतिक्रिया लिखें |वर्डप्रेस,कॉम पर भी हैं

  7. Everyone has his/her own importance but without woman life is incomplete… Nicely written…

  8. औरत के विविध रूपों में औरत का अपना अस्तित्व खो ही जाता है । इसी तथ्य को शब्दों में ढालती सुंदर कविता ।

  9. इंदु जी ,
    औरत जीवन की अच्छी कविता …औरत हर रूप को बखूबी जीती है इसलिए महान है लेकिन अब गुमनाम नहीं है उसकी छबि बदल रही है थोड़ा ही सही वह अपनी पहचान बना रही है ….यथार्थपरक कविता के लिए बधाई ….

  10. अंतर्मन को झकझोरती पंक्तियाँ …
    आप की अभिव्यक्ति की तारीफ के लिए शब्द नहीं रहे हमारे पास
    निर्बल भी वो है,सबल भी वो
    ममता भरी है,मृदुल भी वो
    फिर भी है अपने आप से अंजान
    रिश्तों में ही समाई है उसकी जान
    कहते हैं लोग,औरत है महान..

  11. इंदु जी बहुत सुन्दर रचना ..नारी तो देवी है महान तो है ही ..काश सब लोग इसे यों ही कहें जाने माने ..लेकिन आज समाज ..
    सुन्दर उद्देश्य मूल भाव सुन्दर
    भ्रमर५

  12. आपकी इस सुन्दर रचना पर कोई बात कह पाना पहाड़ चढ़ने से भी कठिन लग रहा है. पुरुषों की अपेक्षा नारी की ही चर्चा हमेशा होती रही है. अनेकों रूपों में सबसे महानतम मै मातृत्व को मानता हूँ.

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