लिखते हैं हम


न चाह है कोई न ही कोई अपेक्षा
खुशी के लिये बस लिखते हैं हम
न उन्हें है खबर न उनसे गिला
मिलता क्या सुकूं,जो लिखते हैं हम
घुमड़ता सा मन है,ये चंचल पवन
मंद पुरवाई में बैठ फिर सोचते हैं हम
फैला है विस्तार सा जीवन यहाँ
बस समेट लाने को पिरोते हैं हम
जब भाव खोजते हैं,तब शब्द बोलते हैं
शब्दों के रंगों को भरते हैं हम
लिखने की चाह न छूटे कभी
मन झंझोड़ने को अपना,लिखते हैं हम…

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25 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

25 responses to “लिखते हैं हम

  1. फैला है विस्तार सा जीवन यहाँ
    बस समेट लाने को पिरोते हैं हम
    आपके शब्दों का विस्तार अनंत है…..लाजवाब

  2. जब भाव खोजते हैं,तब शब्द बोलते हैं ……

    bahut acchi pankti …… badhayee

  3. कुछ भी कहो
    दिल की बात
    बताते हो तुम
    क्या है मन में
    बिना लाग लपेट
    कहते हो तुम
    अहसास नहीं तुमको
    कितने मनों को
    झंझोड़ते हो तुम
    कितने दिलों को
    निरंतर लुभाते
    हो तुम

  4. “….लिखने की चाह न छूटे कभी
    मन झंझोड़ने को अपना,लिखते हैं हम…” kya baat hai kitni saralta se aapne mano mere dil ki bhi kah di..bohut hii sundar

  5. एक छोटे से झंरोखे से आपके शब्दों की दुनिया निहारते रहे |

  6. जब भाव खोजते हैं,तब शब्द बोलते हैं

    मिलता क्या सुकूं,जो लिखते हैं हम

    Bahot khub

  7. “खुशी के लिये बस लिखते हैं हम” … absolutely … do it for its love and everything will follow … perfect …

  8. शब्दों का ये रूप कभी इतना कुरूप हो जाता है
    भावों के प्रतिकूल कभी एक भाव स्वरुप हो जाता है
    तब लिखने से अबला चपला , मन का ये कूप घबराता है
    तब समझ न आता जीवन में क्यूँ लिखना कुछ ये जरूरी है
    जब शब्द बने हो मधुर जाल , क्यूँ फंसना कुछ मजबूरी है ….

  9. लिख लेने से मन हल्का होता है, लिखती रहें।

  10. इश्वर की अनुकंपा है , जो भावनाओंको शब्दोंमे लिख पाते है तुम और हम ,
    जिन भावनाओंको ना मिले शब्द , क्या दुनियाने कभी जाना है उनका गम ?
    जैसे हमारे ब्लॉग पर ,आपकी टिप्पणी का इंतज़ार करते बैठे है, कबसे हम ,
    विपरीत उसके सुन्दर कविता के लिएँ आपकोबहोत बधाइयाँ देते है, दिलसे हम |

  11. kitni khoobsoorat kavita likhi hai…purvaai jaisa kuch chhoo gaya man ko abhi!

  12. स्वान्तः सुखाय:उत्कृष्ट लेखन

  13. लगे रहिये… लिखते रहिये और खुश रहिये!!

  14. Indu they are exactly the feeling of a new blogger like me, who doesn’t why they are writing for whom are writing but they just do because they like it. Love it.

  15. Bus tum yoon hi likhti raho aur hum yoo hi padte rahe..Now I know why poets write 🙂

  16. खुशी के लिये लिखना – अच्छा लगा। मानो तुलसी कह रहे हों – स्वांत: सुखाय!

  17. Barun Jha

    खुशी के लिये बस लिखते हैं हम
    that is why I write what I write

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