जीते हैं लोग


जीते हैं लोग पर जीते नहीं
हाँ चलता है जिस्म और मन भी कभी
खा़मोश दिल,खा़मोश रहता नहीं।
दिखावा छलावा व्यापार है घना
हाड़ मांस का एक इंसान है बना
हैं जज़बात कितने,ये किसने सुना।
सही-गलत चर्चा ज़ोरों से रही
नज़रिया बदलना मुश्किल तो नहीं
पर ये चाह भी,सदा औरों से रही।
दुखा दिल कितना,न कोई ख़बर
नज़र का फेर है,या मन का वहम
सोच अपनी-अपनी,हैं अपने मरम।
उलझे हर पल,न सुकूं हैं कहीं
जीते हैं लोग पर जीते नहीं…

24 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

24 responses to “जीते हैं लोग

  1. sahee aur sundar tareeke se kahaa aapne

    मजबूरी में हँसता हूँ
    क्या करूँ?
    मजबूरी में हँसता हूँ
    ग़मों को छुपा कर
    रखता हूँ
    लोगों से डरता हूँ
    सवालों से बचता हूँ
    दिलासा के नाम पर
    सैकड़ों सवाल पूछेंगे
    जवाब पर यकीन
    ना करेंगे
    निरंतर नश्तर चुभायेंगे
    ग़मों को भूलने ना देंगे
    ज़ख्मों को फिर से हरा
    कर देंगे
    मुझे जीने ना देंगे
    06-11-2011
    1751-20-11-11

  2. इंदु जी बहुत सुन्दर सार्थक …सुन्दर सीख …सब लोगों से ही चाह है अपने कदम रुके पड़े …..
    आभार आप का
    भ्रमर ५
    सही-गलत चर्चा ज़ोरों से रही
    नज़रिया बदलना मुश्किल तो नहीं
    पर ये चाह भी,सदा औरों से रही।
    दुखा दिल कितना,न कोई ख़बर
    नज़र का फेर है,या मन का वहम

  3. indu ji satik varnan ………sacchai ko bayan karti huyi aapki rachna ……….bilkul sach ka aaina .

  4. नज़रिया बदलना मुश्किल तो नहीं
    पर ये चाह भी,सदा औरों से रही।
    Behatareen….Jivan ki kadavi sacchai ko khubise bayan kiya hai..
    Achchi Rachana Induji

  5. दिखावा छलावा व्यापार है घना
    हाड़ मांस का एक इंसान है बना
    हैं जज़बात कितने,ये किसने सुना।
    किसी नश्तर की तरह चुभता सवाल है…..बेहतरीन ईन्दु जी….

  6. Indu ji aap ki har prastuti dil ko khush kar deti hai. my fav lines
    “नज़रिया बदलना मुश्किल तो नहीं
    पर ये चाह भी,सदा औरों से रही।” excellent work

  7. I have been reading your poems for sometime now. You write with passion and thoughtfulness. This one is very telling commentary on how we live. I write in Hindi too sometimes on my blog. Must learn how to comment in Hindi. Keep up the good work

  8. Ashish kumar

    very nice… u have written so smoothly… its very touchy… really liked it…

  9. संजय भास्कर

    बहुत अच्छी प्रस्तुति

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