शायराना अंदाज़-5


“इश्क ने किया बेबस हमें इतना
न ख़बर हो तेरी,सुकूं मिलता ही नहीं
हौसलाए ख़्वाहिशों का आलम न पूछो
बिन तेरे दीदार,दिल लगता न कहीं”

11 टिप्पणियाँ

Filed under शेरो-शायरी

11 responses to “शायराना अंदाज़-5

  1. और खबर मिल भी जाये या दीदार हो जाये तो दिल चाहता है कि और मिले, यानि सकूँ तो फ़िर भी दूर ही रहता है! 🙂

  2. इश्क करने वाले
    ना खबर का इंतज़ार करते
    ना बहाना बनाते
    माशूक के घर जा पहुँचते
    क्यूं खफा मुझ से ?
    गला पकड़ कर पूछते

  3. माशाल्लाह क्या अंदाज है | बहोत खूब |

  4. “हौसलाए ख़्वाहिशों का आलम न पूछो” … it springs up so many possibilities the wish can take … very nice …

  5. हौसलाए ख़्वाहिशों का आलम न पूछो…

    Beautiful !!

  6. किसी ने क्या खूब कहा है `हजारो ख्वाहिशे मेरी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले /बहुत निकले मेरे अरमान फिर भी कम निकले ….ख्वाहिशे पूरी हो जाएं और सुकूं मिल जाए यह कुछ पल का तो हो सकता है ज्यादा देर का नहीं ….

  7. tumhen gairon se kab fursat
    hum apne gam se kab khali
    chalo bas ho chuka milna
    na tum khali na hum khali

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