क्यों कि हर एक पल ज़रूरी होता है


15.11.2011
रोचक विषय कि यदि आपको 2 घंटे अतिरिक्त मिल जायें तो आप क्या करेंगें। पिछले कई दिनों से यही सोच रहे हैं कि आखिर करेंगें क्या? क्योंकि जबतक आपको कोई चीज़ न मिले आपकी चाहत,उत्सुकता सब बरकरार रहती है और आप ये भी सोचते हैं कि हम ये करेंगे,ऐसा होगा आदि-आदि किंतु जब आपको चाहा मिल जाता है तो सच है कि कई बार समझ ही नहीं आता कि हमें करना क्या है और कुछ ऐसा ही ऑफर है ये। सच कहे तो अच्छी अनुभूति है जो चेहरे पर मुस्कुराहट बिखेर रही है और साथ ही स्वयं से पूछताछ भी चल रही है कि वाकई हम करेंगें क्या??? यही सोच कर आज….टिंगं टॉंग-टिंगं टॉंग..,शायद कोई आया है अतः लेखनी को यहीं अर्ध विराम दे रही हूँ!
16.11.2011
आज दूसरा दिन है और कोशिश है कि दिल से कुछ लिख सकूं। यूँ तो हमें कविता लिखना बहुत पसंद है खासकर जब हम खुश हों,परेशान हों,उदास हों या दुखी या कोई और इन पलों से गुज़र रहा हो । उस वक्त ह्रदय के भाव स्वतः ही शब्द रूप धर मुखर हो उठते हैं चाहे कितनी ही थकान हो या तनाव, लिखने के बाद सब छू मंतर हो जाता है। जीवन की भागदौड़ में समयाभाव सभी को सताता है क्यों कि अधिकाधिक कार्यों को करना,समय सदा कम ही लगता है। जब चाहे जो आज़मा ले अनेकानेक सवालों का जवाब एक ही मिलेगा कि “समय ही नहीं मिलता” जीवन की व्यस्तताओं में सभी जकड़े हुए हैं। ऐसे में यदि हमें पूरे 2घंटे अधिक मिल जाएं तो यकीन जानिए ये किसी लॉटरी निकलने से कम नहीं होगा। हमारा मानना है कि’समय ही समय है समय का’। यदि आप हमें अतिरिक्त दो घंटे दे हे हैं,वह समय हम अपनी लेखनी के लिए ही चुनेंगें क्यों कि जीवन में सारी ज़िम्मेदारियों को पूरा करते हुए यदि कभी…टिंगं टॉंग-टिंगं टॉंग..,शायद कोई फिर आया है दरवाज़े की घंटी पुनः बज ही गई..
17.11.2011
यदि कभी समय की कमी महसूस होती है तो वह अपने लेखन के प्रति। अतः शायद नहीं,यकीनन यदि हमें दो घंटे अतिरिक्त मिल सकें तो वो समय हमारे लेखन या पठन के लिए ही होगा। ये पोस्ट हमने तीन दिन में पूरी की है जब कि लिखा कुछ खास नहीं है बस अपने समयाभाव को दर्शाया है जो कि स्वतः ही दिख रहा है परंतु अतिरिक्त दो घंटे मिलने के अनुभव मात्र से जो खुशी हो रही है उसके लिए ‘सर्फ ऐक्सल’ का दिल से धन्यवाद।

25 टिप्पणियाँ

Filed under प्रतियोगिता

25 responses to “क्यों कि हर एक पल ज़रूरी होता है

  1. sach kahu toh mujhe nahi pata ki main atirikt do ya teen ghanto ka ya mein kya karungi, shayad jyaada so lu ya sochu ki yah din kab khatam ho,bhai sunday aane main jitni der utni baichaini…par aapne ek baat bilkul sach kaha..jo maza intezaar main voh visaale yaar main kaha us tadap ki baat hii kuch aur..
    bohut achha vishay aur usey itni maturity se handle karna..bhadhai

  2. दरवाज़े की घंटी बजती रहेगी
    रुकावटें आती रहेगी
    ज़िन्दगी नाम इसका
    शौक पूरा करने के लिए
    समय फिर भी निकालना
    पड़ता
    दिल खुश रखना हो तो
    ज़ब भी दो लाइनें बने
    मोबाइल में रेकोर्ड कर
    लिया करो
    बाद में लिख दिया करो

  3. Durgesh Arsia

    थैंक गॉड, मेरे घर घंटी नहीं है!!!

  4. i’ll draw and draw and draw … and yeah I’ll make sure that for those two hours door-bell button is off🙂 … liked your post !

  5. दिन में दो घण्टे ज्यादा का खास मायने नहीं मेरे लिये। सवेरे 6 से इग्यारह का समय व्यस्ततम है मेरे लिये। उसमें से कभी दो घण्टे ज्यादा मिलने लगें, तब जिंदगी सुधर सकती है!
    और लेखन तो हमारे लिये पास टाइम है – कोई प्रतिबद्धता नहीं!🙂

  6. बिलकुल सही बात की है आपने आज समय बहोत ही महत्वपूर्ण हो गया है ! अगर कोइ हमें २ घंटे ज्यादा समय दे तो बहोत ही खुसी होती है ! लेकीन समय का सही आयोजन इतना ही जरुरी लगता है ! बिना समय का आयोजन किये कोइ भी काम हम सही तरीके से पूर्ण नहीं कर सकते ! अधिक समय मिला यो जैसे इनाम मिला हो इतनी खुशी होती है !

    आभार

    नितिन
    वदगाम से..

  7. मैं तो प्रतीक्षा करता हूँ कि किस समय कोई अच्छा विचार सृजन हो जा़े।

  8. समय का मूल्य समय सीमा में निहित है अतिरिक्त मिलेगा कहाँ से ..हाँ आपको समय को मैनेज करना आना चाहिए …अगर हमें मैनेज करना नहीं आता तो हम समय का रोना रोते ही रहेगे …..सार्थक विषय की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए धन्यवाद व बधाई ….

  9. How to type in Hindi? These WP people ask me to set it in Settings, General, language but I find I still cannot type in Hindi. Kya Karun? Kripaya aap meri madad kijiye.
    Thanks, Dhanyavad

  10. main to sochna hi shuru ker deti hun … kaun atirikt samay barbaad kare

  11. Umda!… apke likhne ka tareeka behad khoobsurat hai…aap vichaaron ko shabdon mein daalna bakhoobi jaanti hain…. All the best contest ke liye🙂

  12. जब समय मिले तब लिखा कैसे जा सकता है! भाव भी तो आने चाहिए। हां, पढ़ा जा सकता है।

  13. Because we think that we should not waste a single bit of time that is why we need to utilize our extra time in writing. U have written with very fine a thinking.

  14. बस दो घँटे और? उससे क्या होगा? हमे तो दो दिन का वीकएँड भी कुछ कम लगता है🙂

  15. i like i fallow this i love to poem muje hindi se pyar hai muje kavita bahut acchi lagati thi hai yase hi lkiate rahe

  16. Rakesh Kumar

    अरे वाह! घंटी बजते बजते भी आपने इतना लिख डाला.
    सोचिये घंटी न बजती तो क्या होता.
    आप सुन्दर सुन्दर सोचे और अच्छा अच्छा लिखें यही दुआ और
    कामना है.
    कुछ समय मिले तो मेरे ब्लॉग पर भी कभी कभी आ जाएँ.
    उसकी कृपा से लिखते – पढते शायद ‘परमानन्द’ को भी पा जाएँ.

    सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार.

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