शायराना अंदाज़-7


“वो ठण्डी हवा के साथ कुछ बूँदें बारिश की
अलसाई हुई रात, सजी है दु्ल्हन सी
वो तसव्वुर में उतरा एक चेहरा,
जो समाया है मन में,कहीं दिखा तो नहीं।”

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13 टिप्पणियाँ

Filed under शेरो-शायरी

13 responses to “शायराना अंदाज़-7

  1. sundar

    इतना भी परेशाँ ना हुआ कीजिये
    मन की आँखों से देख लीजिये
    दिल के कौने में छुपा होगा
    ज़रा अन्दर भी झाँक लीजिये

  2. nice lines , but thodi aduri si lag rahi hai…. may be padne vala isse age bhi expect kar raha ho….I suggest you can put some more connecting lines and make it large….

  3. वाह!

    —-
    कल 07/12/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

  4. digamber

    बहुत खूब … मन की अंकों से देख लिया तो सब कुछ देख लिए … लाजवाब शेर …

  5. एक दूनिया मन की ..बहुत सुंदर पंक्तियाँ …

  6. तसव्वुर में कैसा समाया है यह चेहरा जो दिखा नहीं? सचमुच में समाया होता तो हर चेहरे में वही दिखता, यानि जिधर भी मैं देखूँ, वहीं तु ही तू है.

    ठण्डी हवा, बारिश और अलसायी दुल्हन की छवि बहुत सुन्दर है.

  7. वाह!! आपका शायराना अंदाज़ भी पसंद आया… 🙂

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