प्यार एक भ्रम है


प्यार एक मात्र भ्रम है इससे अधिक कुछ नहीं,हाँ सभी को इसका अलग-अलग ग़ुमां ज़रूर होता है। कोई प्यार में बावरा हुआ जाता है कोई प्यार में खुद को तलाशता है। प्यार भी एक बार नहीं बार-बार होता है क्योंकि भ्रम जीवन में अनेकानेक बार होते ही हैं,या यूँ कह लें कि जीवन स्वयं ही भ्रम है तो भी कुछ अधिक न होगा। प्यार में जीने-मरने वाले भरे पड़े हैं और उन्हें आप गलत भी नहीं ठहरा सकते क्योंकि यही तो उनका भ्रम है और वो इससे ग्रसित। प्यार से बड़ा वायरस आज तक नहीं फैला जो दिखता तो नहीं लेकिन आपको कब डस लेता है आप समझ ही नहीं पाते। आप सही गलत सब प्यार की नज़र से देखते हैं और यही भ्रम आपको खोखला करता चला जाता है,पूरी तरह।
भ्रम हुआ,कि प्यार हुआ किंतु यही यदि दूसरे को नहीं हुआ तो भी मन दुखी और यदि हो गया तो फिर उसकी शिकायतों से दुखी। प्यार में यदि एक गुलाब भी मिला,दिल में पूरी क्यारी खिल जाती है और यदि नहीं तो बबूल के कांटे सीने पे बिछ जाते हैं। गज़ब का है ये भ्रम जो लोगों को कभी हँसाता-कभी रुलाता बल्कि एक कठपुतली सा नचाता है।
‘हमें तुमसे प्यार है,तुम न मिले हम जी न सकेंगे’ पर फिर भी जीते हैं और यदि तुम मिल गए तो पूरा जीवन कोसेंगे कि इससे तो बेहतर था हम मिलते ही नहीं,एक भ्रम तो रहता कि हम मिल न सके। प्रेम रूपी वायरस पहले आपको मज़बूत बनाने का भ्रम दिखाता है फिर धीरे-धीरे आपको अपने अधीन कर कमज़ोर करता जाता हैऔर आप फिर भी उसी भ्रम के पीछे भागते रहते हैं जिसका कोई अंत नहीं कोई वजूद नहीं। ‘प्यार बाँटते चलो’गाना सुनना अच्छा तो लगता है किंतु यथार्थ के धरातल पर सच्चाई से बहुत दूर क्योंकि किसी को भ्रमित करने से बेहतर होगा कि ‘ज़िंदगी जीते चलो’की तर्ज़ पर ही लोगों का हौसला बढ़ाया जाए।
“ऐ ज़िंदगी तेरे ग़म से डर लगता नहीं अब
बस ख़ुदा के लिए हमसे ‘प्यार’ मत करना।”

35 टिप्पणियाँ

Filed under अभिलेख

35 responses to “प्यार एक भ्रम है

  1. Some times love is nothing but the feeling that you are going to feel a feeling that you have never felt before…

    Shashi
    ॐ नमः शिवाय
    Om Namah Shivaya
    http://shadowdancingwithmind.blogspot.com

  2. द डर्टी पिक्चर इस पोस्ट का जवाब देती है🙂

  3. sunil kumar

    प्यार एक इबादत हैं भ्रम नहीं

  4. sudarshansingh

    bhram me jina bhi sukune jindgi hai,
    gar hakikat hi hakikat ho jindgi kat na sakegi.

  5. प्रेम के अनेक आयाम होते हैं | वर्तमान साहित्यिक परिदृश्य में प्रेम को सदैव एक
    ही स्वरुप में निरुपित करना ,इस दैविक अनुभूति के साथ अन्याय प्रतीत होता है | मातृत्व का प्रेम, संतान के प्रति प्रेम ,भाई बहन का प्रेम ,मित्र का मित्र के प्रति प्रेम, अन्यान्य संबंधों के प्रति प्रेम इत्यादि कुछेक ऐसे पहलू हैं जिनपर मंथन की आवश्यकता तो है ही साथ ही साथ एक रचनाकार का नैतिक दायित्व भी बन जाता है कि वह इन विभिन्न आयामों को एक जीवंत स्वरुप प्रदान करे | प्रेम या प्यार की संवेदना केवल एक ही सन्दर्भ में परिलक्षित होती है , यह धारणा शायद एक भ्रामक परिवेश का सृजन करती है | ‘अज्ञेय’ ने अपनी रचनाओं में जिस प्रेम को अभिव्यक्त करने का प्रयास किया वह महादेवी वर्मा, जयशंकर प्रसाद या सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की रचनाओं से एकदम अलग प्रतीत होता है | आज यह नितांत आवश्यक हो गया है कि प्यार की अनुभूति को एक व्यापक और समग्र दृष्टिकोण से उसकी सम्पूर्णता में आत्मसात करते हुए अभिव्यक्ति के अवसर उपलब्ध कराये जाएँ | इतना ही कहना चाहता हूँ कि
    प्यार ,प्यार को,प्यार प्यार से
    प्यार जब करता है
    प्यार को देना प्यार
    प्यार को ,प्यारा लगता है
    प्यार मेरे तुम ,प्यार से दूँगा
    तुम्हे प्यार ही प्यार
    प्यार कि दौलत बांटों जितना
    बढ़ता उतना प्यार

    • आदरणीय दिव्यांश जी,

      प्यार के अनेकानेक रूप हैं,सही कहा आपने। शीघ्र ही किसी और रूप पर आप हमारी रचना अवश्य पायेंगे। एक रचनाकार के रूप में अलग-अलग रूपों को समय-समय पर हम प्रस्तुत करते हैं क्योकि किसी विषय विशेष पर सोच कर हम नहीं लिखते,हाँ जब जो जैसा अपने आस-पास महसूस किया वह स्वतः ही कलम से बह निकला।माँ के प्रेम से ऊपर कुछ नहीं संसार में, और ये भ्रम नहीं सत्य है।

      सादर

      • MKG

        Agar koi aaj yeh kahe ki mujhe pyaar ho gaya hai, to sabse pahle ham dusre pyaar ko sochte hai…………… maa ka pyaar nahi. Aur yeh 100% sach hai. Aap kya bolti ho??

        Waise pyaar ek aisi shabd hai jo dushman ko bhi dost bana leti hai. aur yeh shabd sir mehsoos karne ki hoti hai…aur bhaanp lene ki hoti hai…ki yeh kaisa pyaar hai, kyon hai na?

  6. जब तक मन को भाता रहता,
    भ्रम का क्रम यूँ बना रहेगा।

  7. न जाने क्‍यों भ्रम मान बैठे हैं प्‍यार को,

    लगता है उन्‍हें अबतलक इश्‍क न हुआ। ——-आदित्‍य शुक्‍ला

  8. Pallavi Malviya

    इंदु जी,आपने खूब लिखा है लेकिन मेरी नज़र से ,प्रेम को भ्रम नही कहा जा सकता,क्योंकि जो व्यक्ति माया मोह से परे होकर यह कहता है की मै मोह के बंधन में नहीं पड़ सकता और सन्यासी बन जाता है,लेकिन वह भी प्रेम के ही वश में सन्यासी बनता है.वो बात अलग है की वो इंसानों से नहीं, भगवान से प्रेम करता है.और इंसान भी इस भ्रम जाल को समझते हुए भी इसमें पड़ जाता है,क्योकि प्रेम जैसी भावना पर हमारा बस नहीं चल सकता .

  9. सार्थक लेख है पर यह प्यार का एक पक्ष है लेकिन आधुनिक युग में प्यार का हर क्षेत्र कमोवेश प्रभावित हुआ है ..मूल्यहीनता की आंधी में कोई कम तो कोई ज्यादा प्रभावित हुआ है ….प्यार पर मैंने भी बहुत क्षणिकाएं लिखी हैं कुछ पंक्तियाँ आपके लिए दे रही हूँ ….निरंतर लेखन के लिए शुभकामनाएं ……
    १- आधुनिक प्यार के ,
    मायने बदल गए हैं,
    प्यार अब निष्ठा विश्वास
    का नाम नहीं,
    प्यार अब दिल बहलाने का
    झुनझुना बनकर रह गया है।

    २- प्यार नाम है बस,
    कुछ पल के आकर्षण का,
    प्यार नाम है
    सहूलियत का,
    आदमी को तलाश है बस ,
    कुछ पल के प्यार की ।

    ३- प्यार बस लम्हों में
    जन्म लेता है,
    प्यार का वो लम्हा,
    जीने के बाद ही,
    दम तोड़ देता है ।

    डा. रमा द्विवेदी

  10. प्यार खुदा है और परमेश्वर भ्रम नहीं हो सकता | हम अक्सर प्यार और माया ( कलयुग की करतूद ) मे फ़र्क नहीं कर पाते और माया को प्यार का रूप मानकर धोका खा जाते है | आपसे ऐसी निराशा भरी प्रस्तुती की उम्मीद नहीं थी , पर यह भी जीवन का दूसरा पहलू है जो सोचने को मजबूर कर देता है | यह अनुभव आपसे कोंसो दूर रहे , यही हमारी शुभ कामना |

  11. आप प्यारको भ्रम तभी कह शकते है, जब आप सहि सत्यको जान लेते हो । वह सत्य जो हंमेशा सत्य है,बदलता नहीं । अगर सत्य भी बदलता दिखे तो वह सत्य नहीं । अध्यात्मकी टोच पर पहुचा हुवा व्यक्ति ही सही सत्य को जान शकता हैं ,बाकी के सभी मानव भ्रममें जीते हैं ,चाहे प्यार हो या कुछ और । जब तक सत्य जान न ले तब तक भ्रममें जीना ही पडता हैं क्योकि वही जीवन का आधार हैं । बीना आधारर्के कोई मनुष्य जी नही शक्ता। भ्रमित आधार या सत्यका आधार। प्रेमका सही स्वरुप सत्यमें है,प्रेम वह है जहा निर्मल प्रेम हो ,हम जीसे प्यार समजते हैं वह आशक्ति हैं । इसिलिए इस कलियुगमें कोई आपको प्यार कर रहाहै मानना ही भ्रान्ति हैं । प्यार या प्रेम मूल स्वरुपमें भ्रांत नही ,हमारी मान्यता हमारा व्यवहार उसे भ्रांन्त कर देता हैं।
    मेरी बात मात्र मेरा एक विचार मात्र है, मेरी सामान्य सोच है किसीको स्वीकार्य हो शक्ति है ,किसीको अस्वीकार्यभी हो शक्ति है।
    लेख चिंतन मनन करने को मजबूर करता है।
    धन्यवाद।

  12. सब बदलता है।
    बालस्तावत क्रीड़ासक्त:
    तरुणस्तावत: तरुणीसक्त: !
    व्रद्धस्तावत चिंतासक्त: …

  13. प्यार का बहुत अच्छा चित्रण किया हैा आपने मैं सोचता हूँ यह केवल अहसास होता हैा

  14. प्यार से बड़ा वायरस आज तक नहीं फैला जो दिखता तो नहीं लेकिन आपको कब डस लेता है आप समझ ही नहीं पाते…
    बड़ा मस्त सा लिखा है🙂 लेकिन प्यार में पड़े लोग पढेंगे तो कहीं बुरा न मान जाएँ😉

  15. सुन्दर अभिलेख .
    प्यार भ्रम हो या फिर सच्चाई, आज के ज़माने में तो प्यार एक जरुरत सा है. ना हो तो लगता है कुछ कमी सी है, मिल जाए तो लगता है सब कुछ मिल गया, फिर बिछड़ जाए तो लगता है जैसे सब कुछ साथ लेकर चला गया हो. अजब सा है, पर गज़ब का है.

  16. सच्चा प्यार एक आग की तरह है | पहले यह दिलों को आकर्षित करती है| पास जाओ तो यह दिलों को जलाती है, और हमारे दिलों में, जो भी अशुद्धियाँ है उन्हें भस्म कर देती है और हमें एक अच्छा इंसान बना देती है|
    कभी किसी से सच्चा प्यार कर के देखिए, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि अंत में वह आपको मिला कि नहीं| प्यार जिंदगी के प्रति आपका नजरिया हमेशा के लिए बदल देता है

  17. pritpal singh

    First love anyone by heart than feel it. what is the power of love what can it do for anyone . Even God itself is full of love . called pyar ka sagar.

  18. प्यार के बारे में हटकर बिलकुल ही अलग तरीके से लिखा है! लिखने का तरीका, प्रस्तुतीकरण रोचक है!
    शुभाकांक्षी
    डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’

  19. bakul lalla

    प्यार करना यथार्थ है पर उसका प्यार करना भ्रम है….इसलिए यह सच है|

  20. असहमत. प्रेम कदापि भ्रम नहीं है. प्रेम जीवन का मूल स्वर है. सारी विभीषिकाओं का एक मात्र समाधान, मानवता की उत्कृष्टतम उपलब्धि, सौंदर्य का चरम, अनुभूति की अनन्यता का बोध, मार्मिक वेदना का शांतिदायी मरहम, निसर्ग की अदभुत निधि. प्रेम ही है अनवरत संघर्ष का एकमात्र प्रेरक कारक, भ्रम के पर्दे के धुँधलके के पार विराट सत्य का साक्षात्कार. प्रेम गूंगे का गुड़ है और अनहद का नाद. चरम आनन्द का अनुपम स्रोत प्रेम ही है. प्रेम का कोई विकल्प है ही नहीं.

  21. हर एक ने अपनी टिप्पणी दी है, जिसमें हर किसी ने अपना मंतव्य प्रकट किया है! लेखिका ने भी बीच में अपने मत और उद्देश्य को बखूबी स्पष्ट किया है कि-

    ” एक रचनाकार के रूप में अलग-अलग रूपों को समय-समय पर हम प्रस्तुत करते हैं क्योकि किसी विषय विशेष पर सोच कर हम नहीं लिखते, हाँ जब जो जैसा अपने आस-पास महसूस किया वह स्वतः ही कलम से बह निकला। माँ के प्रेम से ऊपर कुछ नहीं संसार में, और ये भ्रम नहीं सत्य है।”

    उक्त टिप्पणी लेखिका के चिंतन के स्तर और वैचारिक धरातल को समझने और समझाने के लिए अपने आप में प्रत्यक्ष प्रमाण है!

    कुल मिलकर लेखिका सत्य और ईमानदार विचार अभिव्यक्ति करती रही हैं और इस प्रकार के विचारों को-“ढोंगी तथा खोखले आदर्शों में दिखावटी आस्था रखने वाले समाज के कथित आदर्शवादी लोगों”-से समर्थन मिलना संभव नहीं! लेखन सत्य पर आधारित हो, अपने आप में इतना ही बहुत कुछ है! लेखिका को बधाई और शुभकामनाएँ!
    डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’

  22. Prakash joshi

    he ma tu kitni dayalu hai tu kabhi bhi gusse me nahi dikhi meri ma tuje ye tera bachha pukar raha hai me

    muje tera sahara chahiye

    i love my mom

  23. Prakash joshi

    Aap Jab Saamne Se Gujar Jate Hain
    Armaan Dil Ke Saare Ubhar Aate Hain
    Dekh Kar Aapki Pyari Surat
    Sehme Hue Se Phool Bhi Muskura Jate Hain…GM

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