शायराना अंदाज़-9


“तन्हाइयों की आदत अब हो गई हमें
तुम्हारा पास आना,अब भाता नहीं
यूं फैले हमारी चाहतों के फासले,
अब किसी चाहत से,कोई नाता नहीं”

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20 टिप्पणियाँ

Filed under शेरो-शायरी

20 responses to “शायराना अंदाज़-9

  1. लेकिन मैं और मेरी तन्हाई तो अक्सर बातें किया करते हैं…

    जय हिंद…

  2. तनहाई भी अपनी लगने लगे तो वही आश्रय संबल दे जाता है।

  3. Good One!,Luv it Dear. A Liebster Award awaits U at my space.Will be delighted if U Come and Collect it.

  4. जब मन दुखी दिल परेशां होता है
    ख्यालों का सैलाब आता है
    चाहतों से मन भर जाता है
    तन्हाइयों का साथ अच्छा लगता है

  5. anu

    भीड़ में साथ चलते चलते …यूँ ही अकेले हो गए

  6. बहोत अच्छा अंदाज | लेकिन हम तो कहेंगे –
    ‘ हमारे प्यार को ठुकराया कोई गम नहीं ,
    सच्चा प्यार पाना तुम्हारी किस्मत मे नहीं |’

  7. इंदु जी ख़याल उम्दा है … आगे ले जायें
    सादर भरत

  8. tanhai & chahat, I think they can co exist, sorry for that realistic view here and let me get back to the business, the words are really intense. keep the good work

  9. Kya baat hai tanhaai ho ya kisis ka saath jisme bhi dil ko sukoon mile bas wahi rah chun le

  10. indu

    aisa lagaa ki agar aap sirf title daal kar bhi yeh post aise blank chod dete…tab bhi comments aatey .. woh kehtey hai na ki aap mitti bhi chuuulo toh sona ban jaaye … bus waisa hi kuch aapke saath hai….

    bahut achi shayari thi….

    rahul

  11. जिसने सहा नहीं वो ह्रदय कैसा ?
    शब्दों का ये ताना बाना वास्तविकता का एहसास कराता है …

  12. Shiv

    Tumhari chahat ne sikha diya tanha rahana,
    mahiflo ki jaan the hum kabhi …

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