मुमकिन होता नहीं


चाहे कोई आपको,आपकी तरह
मुमकिन होता नहीं
सुने अनकहे लफ़्ज़ों के जज़बात
मुमकिन होता नहीं
क्यूँ नहीं ये ज़िंदगी,उन्हें उन से मिलाती
जो पूरे कर सके सारे ख़्वाब
मुश्किल तो नहीं,फिर भी
मुमकिन होता नहीं
न परवाह है कोई,कि चाहे कोई क्या
जब दर्द उठे दिल में,फिर चुप रहना
मुमकिन होता नहीं
शिकायतों का दौर थमता नहीं
फिर भी उसे बयाँ करना
मुमकिन होता नहीं
गहरी सूनी आँखे न जाने क्या-क्या खोजतीं
फिर उन्हे सूखा रख पाना
मुमकिन होता नहीं
गज़ब है ये ज़िंदगी,गज़ब हैं ये चाहते
इनके बिन भी जीना
मुमकिन होता नहीं
ठीक उस तरह जैसे रात के बिना
सुबह का आना
मुमकिन होता नहीं।

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42 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

42 responses to “मुमकिन होता नहीं

  1. gairmumkin ko mumkin karnaa hee fitrat insaan kee
    lage raho munnaa bhaai kee tarah

  2. sada

    चाहे कोई आपको,आपकी तरह
    मुमकिन होता नहीं
    सुने अनकहे लफ़्ज़ों के जज़बात
    मुमकिन होता नहीं
    बिल्‍कुल सच …

  3. मुमकिन होता नहीं! आप उसे बयाँ कर मुमकिन कर सके फिर भी !:)

  4. गज़ब है ये ज़िंदगी,गज़ब हैं ये चाहते
    इनके बिन भी जीना
    मुमकिन होता नहीं
    ठीक उस तरह जैसे रात के बिना
    सुबह का आना..वाह वाह

    Induji,
    Subah subah bahut sundar chij padha di
    Maza aa gaya 🙂

  5. I do not have much Hindi, but got drawn into this poem, and though I might have not been able to appreciate the nuances to the fullest extent, I liked the intensity of feeling that you have expressed. I do try and read your poems whenever I can with my limited Hindi reading skills and vocabulary.

  6. …. ! दर्द को रेश्मी जामा पहना दिया आपने इंदु जी
    ~
    जब दर्द उठे दिल में,फिर चुप रहना
    मुमकिन होता नहीं
    शिकायतों का दौर थमता नहीं
    फिर भी उसे बयाँ करना
    मुमकिन होता नहीं
    गहरी सूनी आँखे न जाने क्या-क्या खोजतीं
    फिर उन्हे सूखा रख पाना
    मुमकिन होता नहीं

  7. तभी तो मुमकिन होते हैं भाव …

  8. बहुत कुछ मुमकिन नहीं होता। पर बावजूद उसके चलती है जिन्दगी। अज़ूबा है यह?

  9. दिल को छू लेने वाले भावों से ओतप्रोत और संवेदनाओं को बखूबी चित्रित करती भावाभिव्यक्ति!
    बहुत खूब!

  10. The whole creation is beautiful, but I liked the most:
    जब दर्द उठे दिल में,फिर चुप रहना
    मुमकिन होता नहीं
    शिकायतों का दौर थमता नहीं
    फिर भी उसे बयाँ करना
    मुमकिन होता नहीं
    Keep it up!
    amitaag.blogspot.com

  11. bahut sundar likha hai sach me jindagi me bahut kuch namumkin hota hai.

  12. punam

    गज़ब है ये ज़िंदगी,गज़ब हैं ये चाहते
    इनके बिन भी जीना
    मुमकिन होता नहीं

    sahi kaha …bahut namumkin hai…

  13. anju(anu)

    बहुत बढिया ….

    गज़ब है ये ज़िंदगी,गज़ब हैं ये चाहते
    इनके बिन भी जीना
    मुमकिन होता नहीं……………………..ये ही जिंदगी के एहसास हैं …

  14. ये सुन्दर अभिव्यक्ति देख कर कुछ न कहे मुम्किन नहीं,,सुन्दर..

  15. सुने अनकहे लफ़्ज़ों के जज़बात
    मुमकिन होता नहीं…
    जिंदगी का सबसे बड़ा सच… बहुत कुछ नामुमकिन है परन्तु फिर भी जिंदगी चलती जाती है… बेहतरीन प्रस्तुति…

  16. इस ख़ूबसूरत प्रस्तुति के लिए बधाई स्वीकार करें.
    कृपया मेरे ब्लॉग “meri kavitayen” पर भी पधारने का कष्ट करें, आभारी होऊंगा /

  17. अपनी तरह से चाहे जाने की चाह में ही डूबी जा रही हैं, सबकी प्रेम आकाक्षायें…

  18. आपने प्यार को rok pana .. मुमकिन नहीं होता

    Loved the poem.. very very nice … 🙂

  19. Dear Indu, Beautiful poems as always. I am sure the pain is deep and it comes as lovely words on paper.

    I loved these lines very much:
    गहरी सूनी आँखे न जाने क्या-क्या खोजतीं
    फिर उन्हे सूखा रख पाना
    मुमकिन होता नहीं

    ham jo cheej chahe, jaroori nahi hame voh mil jaye. Kabhi kabhi jindagi mai kuch paana mushkil nahi hota magar namumkin ban hame nahi mil paata. Jindagi ajeeb hi hai Indu, hame shabd diye to unhe bikherne ke liye dard bhi 😦
    Take care and keep writing

  20. sada

    कल 01/02/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्‍वागत है, कैसे कह दूं उसी शख्‍़स से नफ़रत है मुझे !

  21. theek usi tarah, hamaara is blog per na aana, mumkin hota nahi!!!

    bahut achi kavita Indu.

  22. अक्सर आँखे बहुत कुछ कह जाती हैं …

  23. नामुमकिन को कह पाना ही तो कविता है,बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति

  24. Sanjay Mishra Habib

    बढ़िया प्रस्तुति…

  25. बिलकुल मुमकिन है….. बेहतरीन….

  26. रात के बिना
    सुबह का आना
    मुमकिन होता नहीं।

    याद आने के लिए जैसे दूर जाना जरूरी होता है,वैसे ही सुबह के आने के लिए रात का आना भी जरुरी होता. बहुर सुंदर ख़याल !!!

  27. kya baat hai. aapki lekhni ka anokhpan bahut sundar ubhar ke aaya hai is kavita mein.

  28. ठीक उस तरह जैसे रात के बिना
    सुबह का आना
    मुमकिन होता नहीं।…heart wrenching…..still beautiful…

  29. Just too beautiful and vivid thoughts in action here !! Great going indeed !

  30. Woah this weblog is excellent i really like reading your posts. Stay up the great work! You realize, many individuals are searching round for this info, you could help them greatly.

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