जब भी होते खुश बहुत तुम


जब भी होते खुश बहुत तुम
मिलता अजब सुकूं सा हमको
पर देख तुम्हें परेशाँ कभी
दिल का हर कोना दुखता है
बस एक यही तो  न चाहा था।
बरसों बीते ये साथ न छूटा
अरमा बिखरे विश्वास न टूटा
हाँ हिस्से के सुख तु्म्हे न मिले
जब भी सोचा ये न चाहा था।
है उलझा जीवन,हो उलझन में तुम
सिलवट सा जीवन सोचा न था
दर्द तुम्हारे,हैं छलनी करते
चुभ-चुभ कर सीने को सदा हमारे
दिल है रोता सोच-सोच कर
तुम नाखुश हो,चाहा न था।
इक मुस्कान तुम्हारी अपनी,
लगे नए जीवन की ओढ़नी
सिवाय तुम्हारी खुशियों के बस
और कभी कुछ चाहा न था
जब भी होते खुश,हो बहत तुम
मिलता एक सुकूं सा हमको
जीवन में बस,यही चाहा था।

22 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

22 responses to “जब भी होते खुश बहुत तुम

  1. wow , what a poem , jeevan me bus yahi chaha tha , sums it all !!!
    so deep , yet so simply written !!!
    aweome !! I am a fan !! I cant say more !

  2. jab bhee man miltaa aisaa hee hotaa
    ek kee khushee mein
    doosraa bhee khush hotaa
    ek kaa gam doosre ko bhee rulaataa
    tum se behtar is baat ko kaun jaantaa

  3. जब भी होते खुश बहुत तुम
    मिलता अजब सुकूं सा हमको
    पर देख तुम्हें परेशाँ कभी
    दिल का हर कोना दुखता है
    बस एक यही तो न चाहा था।… शांत स्नेहिल ख्याल

  4. Well done Induji, aapki toh main pehle se hi Fan hoon, ab lag raha hai A/C banna padhega 🙂

  5. पर देख तुम्हें परेशाँ कभी
    दिल का हर कोना दुखता है
    बस एक यही तो न चाहा था।
    बरसों बीते ये साथ न छूटा
    अरमा बिखरे विश्वास न टूटा
    हाँ हिस्से के सुख तु्म्हे न मिले..
    जब भी सोचा ये न चाहा था।………………………..baas gam ko thumhare pina chaha tha .jindagi ka behintiyan pyar lootana chaha tha ……..bahut sunder hradaye ko bhavo ki prastuti . hardik badhai indu ji

  6. समपर्ण ! रिश्तों का खोया मूल भाव !

  7. है उलझा जीवन,हो उलझन में तुम
    सिलवट सा जीवन सोचा न था
    दर्द तुम्हारे,हैं छलनी करते
    चुभ-चुभ कर सीने को सदा हमारे
    दिल है रोता सोच-सोच कर
    तुम नाखुश हो,चाहा न था।

    Ahha BEAUTIFUL WORDS

  8. किसी की आँखों में पायी खुशी हमें उतनी ही खुशी दे जाती है..

  9. Really nice. Didn’t get time to read the posts for a while. .. browsing through the posts today.

  10. यही खुशिया महत्वपूर्ण हैं …
    शुभकामनायें !

  11. sm

    जीवन में बस,यही चाहा था
    बहुत ही बढि़या

  12. सिवाय तुम्हारी खुशियों के बस
    और कभी कुछ चाहा न था
    जब भी होते खुश,हो बहत तुम
    मिलता एक सुकूं सा हमको
    जीवन में बस,यही चाहा था

    woow so beautiful…loved this poem Indu

  13. Very touching, feeling that come deep from the heart are the most touching

  14. very nice site!! Man .. Excellent .. Amazing .. I will bookmark your website and take the feeds additionally?I am glad to seek out so many helpful info right here within the put up, we need work out extra strategies on this regard, thanks for sharing.

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