तीखा है प्यार


तीखा है प्यार,असर कितना मीठा
घुलती हुई गुड़ की ढली के जैसा
न सख़्त है बहुत न बेहद नरम
ज़रा सी ताप-पिघल जाता है प्यार।
जाने कहाँ से उपजता,अहसास है
बीज है न बेढ़,न कोई खाद है
फिर भी लहलहाती फसल है प्यार।
ग़म आँखें भी हैं,कभी खुशी नम
हर ज़ख़्म पे लगे चाहत का मरहम
तासीर वेदना की घटाता है प्यार।
तूफ़ाँ भी कम है,हलचल-ए-इश्क में
रूह से जिस्म तक बवंडर का रुख़
एक क्षण में बदल देता है प्यार।
तीखा है प्यार-असर कितना मीठा…

34 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

34 responses to “तीखा है प्यार

  1. rajtela1

    kitnaa bhee teekhaa ho pyaar
    hrady ko lubhaataa hai pyaar
    zakhmon par marham lagaataa hai pyaar
    man ko sukoon detaa hai pyaar

    keep going on and on…..reach greater heights
    bahut aashirvaad aur snah ke saath
    rajendra

  2. happy valentine’s day indu ji 🙂 …..I hope this is V-day special ..isn’t it?

  3. कभी तीखी कभी मीठी … प्यार की कशिश ही होती है ऐसी

  4. बहुत ही बढ़िया।

    प्रेम दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।

    सादर

  5. तीखा है प्यार,असर कितना मीठा
    घुलती हुई गुड़ की ढली के जैसा
    न सख़्त है बहुत न बेहद नरम
    ज़रा सी ताप-पिघल जाता है प्यार

    bahut khoob shaandar

  6. कल 15/02/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्‍वागत है !
    क्‍या वह प्रेम नहीं था ?

    धन्यवाद!

  7. मीठा है प्यार गुड़ की डली जैसा.
    शशि परगनिहा

  8. रूह से जिस्म तक बवंडर का रुख़
    एक क्षण में बदल देता है प्यार।
    तीखा है प्यार-असर कितना मीठा……….thika kitna bhi ho pyar kam nahi hoti uski mithas .

  9. एक बार फिर से बहुत ही सुन्दर कविता.. बहुत बहुत बधाई..

  10. anju(anu)

    वाह …आज के दिन के मुताबिक लेखनी

  11. ग़म आँखें भी हैं,कभी खुशी नम
    हर ज़ख़्म पे लगे चाहत का मरहम
    तासीर वेदना की घटाता है प्यार।

    too Good.

  12. Jise ho pyar kisi se vahi to jane,
    jisne anubhav hi na kiya ho prem ko
    vaha prem ka arth kya jane ?

    badhiya rachna hai Aapki,
    ABHINANDAN

  13. very good poem.

    તીખા હોતા પ્યારકા ઇજહાર….
    http://tinyurl.com/8ayeggr
    Happy Valentine’s Day

  14. सुखद अहसास … लिखते रहें ऐसे ही
    सादर

  15. तीखा – मीठा खट्टी मीठी चटनी सा प्यार!
    प्यारी कविता !

  16. तीखा है प्यार,असर कितना मीठा
    घुलती हुई गुड़ की ढली के जैसा
    न सख़्त है बहुत न बेहद नरम
    ज़रा सी ताप-पिघल जाता है प्यार।

    Beautiful

  17. vibha rani

    तासीर वेदना की घटाता है प्यार।
    तूफ़ाँ भी कम है,हलचल-ए-इश्क में
    रूह से जिस्म तक बवंडर का रुख़
    एक क्षण में बदल देता है प्यार।
    बहुत सुन्दर….. !!

  18. सच में प्यार ऐसा ही होता है…बहुत सुंदर

  19. Sanjay Mishra Habib

    बहुत खुबसूरत रचना….
    बधाइयां…

  20. प्यार के बारे में बहुत सुन्दर रचना

  21. प्यार की खुबसूरत अभिवयक्ति……..

  22. बेहतरीन ..प्यार ..एक शब्द ..कितनी भी व्याख्या कर लो…हो नहीं पाती…शब्दों में ढल नहीं पाती..पर दिल है कि मानता नहीं…

  23. वाह – वाह , क्या एहेसास है , बहोत ही सुंदर प्रस्तुती , धन्यवाद |

  24. vidya

    बहुत सुन्दर…
    गुड नाल इश्क मीठा….
    🙂
    शुभकामनाएँ..

  25. PUSHPENDRA VIR SAHIL

    एक क्षण में बदल देता है प्यार… बहुत सुन्दर !

  26. Tikhepan ka ehsaas chahte hai sabhi
    zyada jo khate hai
    wo rote hai sabhi
    Phir bhi chahiye unhe kuch tikha
    baad mein ye mitha nikle ya pheeka:)

    Nicely written and Loved the way you wrote it:)

  27. तासीर वेदना की घटाता है प्यार….
    यह बात तो एक दम सही कही इंदु जी…. वेदना को कम करने में प्यार औषधि का काम करता है..
    सादर
    मंजु

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