छोटी सी लहर


तालाब में उठी वो छोटी सी लहर
चली जाती है बहुत दूर तक
लेकिन बहुत शांत
समुद्र की तरह वह शोर नहीं मचाती
बरबस ही ध्यान खींच नहीं पाती
फिर भी जीवन से पहचान करा जाती है
वह छोटी सी लहर …
हर हाल में है शांत न कोई कौतूहल
हर बात को कितने आराम से समझाए
द्रढ़ निश्चयी है वह
लेकिन हर बात
जीवन की कोमलता से कह जाए
हो कितना भी विशाल समुद्र
समेटे लाखों झंझावात
लेकिन यह तालाब /समुद्र इस गाँव का
यह लहर है एक गिलहरी दौड़ती उस पर
यह छोटी सी लहर
पानी में एक लिखी हुई पंक्ति
यहाँ से वहाँ तक
दौड़ती हुई .

 

31 टिप्पणियां

Filed under कविता

31 responses to “छोटी सी लहर

  1. लेकिन,बहुत शांत!!!
    देती है गहरी खोह,’अब’तलाशो खुद को
    So true…its difficult to find self in an Ocean but a lot easier to find one is A Wave 🙂
    जीवन है शांत,यूँ ही गुज़र जाना
    फिर क्यूँ भला हम,न ये जान पाए
    हर बात को कितने,आराम से समझाए
    वो छोटी सी लहर
    Ahha…enjoyed it and amazed by it thourghly…keep AMAZING US

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  2. rajtela1

    jo bhee hrady ko khush kare
    man ko chain de
    har wo lahar
    achhee lagtee

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  3. I do not read hindi well, but these are short words and I am really loving it. Have spend like the last 2 hrs and 20 mins..going through your poems… love them 🙂

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  4. लहरे जीवन की हृदयानुभूति करा रही है

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  5. very nice, bahut achche! The use of ‘khoh’ barbas’ ‘thapedon’ …beautiful, very very nice

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  6. Mystic realization…wow Indu!
    so beautifully penned!! so typically yours!

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  7. हर बात को कितने,आराम से समझाए
    वो छोटी सी लहर…
    sums it all .very nice flow dear
    keep writing.

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  8. مشكوور والله يعطيك العافيه

    goood thenkss

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  9. Thanks to all of you,coz aap sabki chahat hi humey likhne ka hausala deti hai,kuch aur behter likhne ka…..always needed for your wishes………….

    regards
    indu

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  10. हो कितना भी विशाल,गहरा समंदर
    समेटे है लाखों,तूफान अपने अंदर
    हर लहर है थपेड़ा,किसने ये जाना
    जीवन है शांत,यूँ ही गुज़र जाना… बिल्कुल

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  11. Really! excellent,
    Carry on with the same spirit..Good wishes

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  12. एक सुंदर जीवन अनुभूति | धन्यवाद |

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  13. लहर तो बस उठती ही है फैलने के लिये।

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  14. दृढ़ निश्चय है जीवन,कोमलता से कह जाए
    वो छोटी सी लहर…
    बेहद प्रेरणा देने वाली पंक्तियाँ हैं!
    सच है जीवन की छोटी-छोटी चीजों में ही जीवन के अमूल्य सबक छिपे होते हैं|

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  15. I read a Hindi poem after a long time, and really enjoyed it. And I loved the way you put it across – gentle does it, says the ripple 🙂

    Cheers!

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  16. Dil ko choo liya in shabdon ne. Padhne ke baad kehne toh bahut kuch chahta tha.. par shabdo se is ehsaas ko baya kar paana mushkil hi hoga.

    keep up the good work Indu 🙂

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  17. kitni gehraai ki baat kitne aasaan shabdon mein aapne keh daali…waah

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  18. Beautiful!!!!
    For me, this is one of your best…So true and so intense.
    I am reminded of a line from Sylvia Plath’s poem,
    Placid exterior turbulent interior!

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  19. bahut hi badhiyaaa haiii 🙂
    chothi cheezen aksar hamen bahut kuch sikhati hain 🙂

    Bikram’s

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  20. फैल जाती है जिस्म-ओ-जिगर पर
    लेकिन,बहुत शांत!!!
    देती है गहरी खोह,’अब’तलाशो खुद को।

    achchhi lagi aapki soch in panktiyon mein.

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  21. Ankit Solanki

    suddenly stopped at your blog today…these are indeed wonderful poems here (including this one)…its a pleasure to read …Thanks !

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