सुनो !


सुनो ! चुप रहना अब
और बस
खुद को सुनो
देखो अभी-अभी कुछ
कहा तुमने
हाँ-हाँ ,शायद
नाम था कोई पुकारा तुमने
ध्यान… से सुनो
नाम क्या है वो ??
है जीवन या म्रत्यु
बताओ तो सही
सुनो !!!गहरे डूबकर
वो नाम खोज लाओ
सुना था मैंने, वो नाम
उसकी पुकार तुम भी तो सुनो….
सुनो !!!!
बस एक वही है सत्य
है तुम्हारे अन्दर
खुद को सुनो बस अब……

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25 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

25 responses to “सुनो !

  1. सुन्दर मंथन

    खुद के अन्दर झाँक लो
    खुद के बारे में जान लो
    आत्म मंथन कर लो
    सत्य का पता चलेगा
    तो खुद पर शर्म आयेगी
    यह बात भी जान लो
    मन ग्लानि से त्रस्त हो
    उस से पहले खुद को
    सुधार लो

  2. Wah Indu ji wah Kya baat hia

    Suno chup Rehna ab.
    Dekho Kuch na kehna ab.
    Bole to main Ro padungi””

  3. beautiful..

    on completely different tangent .. those who look inside themselves and listen to their heart’s call usually do great in the world ..

  4. aapne sahi kaha Indu, apne andar ki awaaz hi hai jo har insaan ko sun ni chaahiye..usi mein gehra rehesya chippa hai !

  5. Tanu

    ek yahi awaaz hai jise aaj sab sunne se katraate hain…bahut hi sundar rachna hai…badhayi Indu ji …….

  6. amitaag

    Wonderful mystic realization Indu and so beautifully composed…although it can only be experienced, not explained. As a Budhha told his disciples “जो सच है वो मैं बता नहीं सकता और जो बताऊंगा वो सच नहीं होगा”. Nice message..without any preaching. I liked the delicacy of your words.

  7. एक नाम …. जो सत्य है … खोज लाओ …
    बहुत सुन्दर ..खुद को तलाशती रचना ..

  8. खुदको सुनो , तो कई परतोंमे छूपी आत्मा की आवाज आएगी ,
    परमात्मा का अंश , परमात्मा से मिलन की पुहार लगाएगी |
    सुंदर प्रस्तुती | बधाई | धन्यवाद |

  9. waah indu ji ……sach hai suno man ki aawaj . wahin to chupa hai jeevan – jina ka raj , ……….badhai sunder rachna hai .

  10. बस एक वही है सत्य
    है तुम्हारे अन्दर
    खुद को सुनो बस

    अपने अन्दर ही सत्य छुपा हुआ है.. लेकिन हम सुन कहाँ पाते हैं… हम तो कस्तूरी मृग की तरह बस यहाँ वहां ही ढूंढते फिरते हैं…

  11. Khud ki awaaz sun paana hi jeevan ki satya ka uplabhdhi hai indu ji. Bohot hi oonda likha hai aapne

  12. सुनो !!!गहरे डूबकर
    वो नाम खोज लाओ
    बहुत खूब।

  13. संजय भास्कर

    पिछले कुछ दिनों से अधिक व्यस्त रहा इसलिए आपके ब्लॉग पर आने में देरी के लिए क्षमा चाहता हूँ…

    ,,,,,,,,,,,,, रचना के लिए बधाई स्वीकारें.

  14. वाह इंदु जी ! आप कैसे इतने क्षणभंगुर विचारों को इतनी गहराई से पकड़ पाती हैं?
    (मैं टिपण्णी करने से खुद को रोक नहीं पाया)

    हाँ सुना मैंने
    कोई था बहुत अपना सा मेरे अंदर
    जो था हमेशा से वहाँ
    वह तब भी था, जब मेरे पाँव में लगे थे पंख
    लेकिन वह था हमेशा से जमीन से जुड़ा
    और वह तब भी था मेरे साथ, मुझे दिलासा देता हुआ
    जब मैं था हताश सा जमीन पर पड़ा
    वह भटका मेरे साथ दर-बदर, जब मैं था तलाश में किसी की
    और जब वह मिला तो मैं रह गया हतप्रभ
    क्योंकि उसका चेहरा मिलता था उससे
    जो कि था मेरे अंदर हमेशा से …

  15. बस यही जान लो ,जीवन सार्थक है ….!!

  16. inducares

    True-we read piles & piles of books,but fail to understand ourselves.

  17. bhargav

    khud se pucha to jaana… tera pata kya hai…

    awesome… really loved it to the core…

  18. बस एक वही है सत्य
    है तुम्हारे अन्दर
    खुद को सुनो बस अब…

    ……एक शाश्वत सत्य…खुद को जान लिया तो खुदा को जान लिया…बहुत सारगर्भित रचना…

  19. very good !
    Suno sabaki karo manki………..
    અંતર્મન કી આવાજ સુનો …..
    http://tinyurl.com/cppev2t

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