साँसों का लम्हा रुका सा रहा


काँधे पे सर कुछ झुका सा रहा
साँसों का लम्हा रुका सा रहा।

बंद पलकें रूह में कुछ समा सा रहा
कपकपाते लबों का फ़साना रहा।

खुशबू-ए-जिस्म की मदहोशियत न पूछो
साँसों में तेरी साँसों का पहरा सा रहा।

परछाइयां भी हसीन लगने लगीं
इश्क का कुछ ऐसा नशा सा रहा।

गहराइयाँ थीं इतनी-सागर भी कम
था लम्हा मगर,जीवन जिया सा रहा।

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23 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

23 responses to “साँसों का लम्हा रुका सा रहा

  1. yashwant009

    खुशबू-ए-जिस्म की मदहोशियत न पूछो
    साँसों में तेरी साँसों का पहरा सा रहा।

    क्या बात है….वाह!

    सादर

  2. rajtela1

    वो लम्हा इतना हसीन था !!!!!!!!!!

  3. खुशबू-ए-जिस्म की मदहोशियत न पूछो
    साँसों में तेरी साँसों का पहरा सा रहा।… waah , bahut badhiya

  4. वाह …बहुत खूब कहा है आपने …
    कल 04/04/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.

    आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!

    … अच्छे लोग मेरा पीछा करते हैं …. …

  5. बहोत ही सुंदर अनुभूति का वर्णन , इस अनुभूति मे हर कोई बार-बार डूबना चाहेगा | धन्यवाद |

  6. Tanu

    खूबसूरत लफ़्ज़ों से बनी एक खूबसूरत सी पेशकश………:)

  7. woow..mazaa aa gaya padkar…khaaskar last 3 para’s toh bahut hi badiya hai Indu !

  8. इश्क का नशा सर चढ के बोलता है….

    परछाइयां भी हसीन लगने लगीं
    इश्क का कुछ ऐसा नशा सा रहा।

  9. अनु

    वाह!!!!
    काँधे पे सर कुछ झुका सा रहा
    साँसों का लम्हा रुका सा रहा।
    बहुत सुन्दर………

  10. परछाइयां भी हसीन लगने लगीं
    इश्क का कुछ ऐसा नशा सा रहा।
    ..bahut khoob! hota hai isq ka nasha aisa..
    sundar prastuti

  11. anju (anu)

    खूबसूरत लम्हों की ये यादे

  12. punam

    परछाइयां भी हसीन लगने लगीं
    इश्क का कुछ ऐसा नशा सा रहा।

    खूबसूरत लफ़्ज़….
    खूबसूरत पेशकश…

  13. “काँधे पे सर कुछ झुका सा रहा
    साँसों का लम्हा रुका सा रहा।”

    ~ Wah !!! You reminded me of how Gulzar saheb writes !

  14. “परछाइयां भी हसीन लगने लगीं
    इश्क का कुछ ऐसा नशा सा रहा। ”
    बहुत खूब इंदु जी, बेहतरीन नग़मा.. सादर,
    मधुरेश

  15. yashwant009

    आज 15/05/2012 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.com पर पर लिंक की गयी हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

  16. punam

    सांस कुछ देर से थमीं सी है……

  17. अति सुन्दर रचना ….
    सुन्दर अभिव्यक्ति….

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