प्यार


खींचा भर आगोश में
जब पहली बार
ज़मीं न थी
था सिर्फ प्यार !
स्वछंद उड़ान वो
खिंची सी मुस्कान वो
पलकें न उठीं
अधर पर था फैला संसार !
आए क़रीब कुछ इस तरह
बिन बुलाये नसीब की तरह
बाकी रहा न कुछ
हर सांस में था फैला
ख़ुशबू-ए-यार का प्यार …

30 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

30 responses to “प्यार

  1. rajtela1

    रहेगा ख्यालों ख़्वाबों में
    प्यार से मुलाक़ात का लम्हा वो हमेशा याद

    very nice 🙂

  2. After listening to your voice in ‘Yaadein’, yeh poem padte vakt bhi aisa laga jaise tum recite kar rahi ho. I will wait for this one too on soundcloud….

    Very romantic and full of love..beautiful words Indu.

  3. बहोत ही सुंदर अनुभूति का वर्णन | बधाई | धन्यवाद |

  4. प्रवीण पाण्डेय

    प्रेम की अनुभूति विशेष है

  5. avibration

    A sensational emotion..
    Exceptional! Beautiful writhing. BOL.

  6. yashwant009

    कल 09/04/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

  7. saras darbari

    और उस प्यार का इज़हार भी बहुत खुबसूरत !

  8. आए क़रीब कुछ इस तरह
    बिन बुलाये नसीब की तरह
    बाकी रहा न कुछ अब…..waah bahut khoob . lovely .:))))))))))

  9. //खींचा भर आगोश में,जब
    पहली बार
    ज़मीं न थी,था सिर्फ प्यार //
    bahut sundar rachna hai

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