बस तुम्हारी हो गई मै…


अल्हड़ नदी समझते रहे तुम,
और मै…. समंदर हो गई .
चाहा तुमने समझूँ गहराई प्यार की
और मै…. पाताल हो गई.
कहा, बहुत बोलती हो तुम ,
और मै….ख़ामोशी की परछाई हो गई.
रहती हर घड़ी मिलने को बेताब तुम
और मै….रूहमय हो गई .
हूँ तुम्हारा ये जान लो अब
बस,न मिलूंगा कभी
और मै….धरती हो गई.
…..अब तुम समझ लो ये,
कह रही हूँ मै ….
जो भी दिया है रूप तुमने,
बस तुम्हारी हो गई मै…

28 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

28 responses to “बस तुम्हारी हो गई मै…

  1. rajtela1

    “बस,न मिलूंगा कभी
    और मै….धरती हो गई.”
    कैसे कह दिया नहीं मिलोगी तुम
    क्या मिलन को अधूरा रखोगी तुम ?
    ह्रदय की प्यास नहीं बुझाओगी तुम

  2. अल्हड़ नदी समझते रहे तुम,
    और मै…. समंदर हो गई … क्या बात है !

  3. amitaag

    अल्हड़ नदी समझते रहे तुम,
    और मै…. समंदर हो गई …kya baat kah di hai aapne…bahut hi khoob!!

  4. bhargav

    ” jo bhi dya hai roop tumne… bas tumhari ho gai…”

    what to say… so so so awesome and pure… content…
    yes… ise hi to pyar kehte hai… selfless..

    awesome induji… seriosuly what a depth in that last line…

  5. चाहा तुमने समझूँ गहराई प्यार की
    और मै…. पाताल हो गई.

    Really the depth of Love is Intimate
    { Intimate (a.) Innermost; inward; internal; deep-seated; hearty.}

  6. अल्हड़ नदी समझते रहे तुम,
    और मै…. समंदर हो गई .
    क्‍या बात है … बहुत खूब ।

  7. आपकी अमूल्य टिप्पड़ी सदा ही हमारा हौसला बढ़ाती है,आप सभी की तह-ए-दिल से शुक्रगुजार हूँ की आप लोग अपनी-अपनी व्यस्तताओं के बावजूद हमेशा ही हमारा मनोबल बढ़ाते रहें हैं .सदैव अपना स्नेह यूँ ही बनाये रखियेगा.और समय-समय पर हमे उचित मार्ग भी दिखियेगा….आप सभी की…

    सादर
    इंदु

  8. Pravin Shah

    और मै…. समंदर हो गई .
    बहुत खूब !

  9. स्वीकार करने को मन बन जाये तो हृदय समुंदर हो जाता है..

  10. लोग तुझे मेरा समझते रहे,
    और मैं, तुम्हारी हो गयी !

  11. ashutosh lohumi

    amazing……really i loved itttt…………………

  12. चाहा तुमने समझूँ गहराई प्यार की
    और मै…. पाताल हो गई.
    कहा, बहुत बोलती हो तुम ,
    और मै….ख़ामोशी की परछाई हो गई.

    वाह! तारीफ़ के लिए शब्दों का चुनाव करना कठिन है|

  13. जो भी दिया है रूप तुमने,
    बस तुम्हारी हो गई मै……
    pyar ki parakashtha…. ..bahut sundar rachna…

  14. KAMLESH KUMAR CHOUDHARY

    KYA PRAKRTI OR PURUSH KA MILAN HI PYAR KI PARIBHASA HAI YEA KUCH ES SE ALAG YEA KUCH OR

  15. anju(anu)

    वाह बहुत बढिया …इस प्रेम की पाती के क्या कहने

  16. Oh my God …Indu…you are really a wonderful person….excellent poem….I am really happy to meet a sweet person like you.Thank you so much for this sweet poem.Pls check my new art work.

  17. …..अब तुम समझ लो ये,
    कह रही हूँ मै ….
    जो भी दिया है रूप तुमने,
    बस तुम्हारी हो गई मै………………wow thumhara pyar to hamen maar hi jayega …….yah thumhe kab samajh aayega . mai to thumhari hi ho gayi ……….sweet si pyari rachna ….pyari si badhai indu ji ………:))))))))

  18. अल्हड़ नदी समझते रहे तुम,
    और मै…. समंदर हो गई .
    चाहा तुमने समझूँ गहराई प्यार की
    और मै…. पाताल हो गई.
    what emotion indu ji. Mujhe nahi maloom ye kavita mujhe kahan se mili , aaj google search kiya tu aap se baat karne ki ichha hui. I am Classical Kathak Dancer. Would like to do the portrayal if you allow.

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