क्या पाए मीरा…


क्या पाए मीरा जग न ये जाना
हर साँस पे उसकी है कान्हा दीवाना .

लोग कहते दिखा, है कहाँ तेरा कान्हा
लगता है न अब तलक मीरा का रूप जाना.

श्वेत रंग-श्याम रंग मिल गया है जब से
भाता है मीरा को तन्हा ही मुस्कुराना.

दुनिया रही खोज जिसे खोजती रहे
मीरामय हुआ कान्हा भी ये किसने जाना.

नयनन में है रूप बसा चित्त हुआ एक
कान्हा-कान्हा करते है मीरा को मिट जाना.

29 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

29 responses to “क्या पाए मीरा…

  1. प्रवीण पाण्डेय

    न जाने वह कैसा अमृत , प्रेम सदा ही पीता आया।

  2. rajtela1

    “किया पूर्ण समर्पण मीरा ने
    बनाया आशियाना कृष्ण का
    दिल में
    बता दिया सारे दुनिया
    कैसे पाते हैं प्रेम को ”
    सदा की तरह आपकी कलम से मन को खुश करने वाली एक बेहतरीन रचना

  3. Arun Sharma

    बेहतरीन रचना ! हृदय को सुख की प्राप्ति हुई पढकर

  4. Prashant Rai

    श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम, मीरा का भी श्याम वो तो राधा का भी श्याम
    bahut badhiya likha hai mam aap ne …..
    bahut pyara …

  5. bhattbhargav

    its lyk ” tum ho pooja, main pujari”
    ” baansuri bhi meera hai..
    baansuri ke sur bhi meera hai..”

    ek man, ek hraday, ek aatma hai…
    aur aatma ka milan jab parmatma se hota hai, tab sarir koi maine nahin rakhta….

    adbhut… ye anubhuti hai… jo karle , wo sab paale, use jivan me kisi baat ki khoj nahin rahegi…

    sun le e insaan dhun apne dil ki…
    aasman wahi hai… bas bhar le apni saanson me , khusbu us “dev” ki..

  6. वाह-वाह | ‘ मीरामय हुआ कान्हा भी , यह किसने जाना | ‘ यह सोच और अनुभूति हमने भी कभी महसूस की नही थी | इस दिव्य अनुभूति के लिए बहोत -बहोत धन्यवाद |

  7. मीरा और कान्हा, प्रेम और प्रार्थना

  8. gopalm

    bahut sundar prastuti….कान्हा-कान्हा करते,है मीरा को मिट जाना.

  9. एक राधा एक मीरा दोनों नो श्याम को चाहा…..अंतर क्या दोंनों की तृप्ति में बोलो……एक जीत न माने…..एक हार न माने………अदभुत रचना….

  10. श्वेत रंग-श्याम रंग मिल गया है जब से
    भाता है मीरा को,तन्हा ही मुस्कुराना

    मीरा को तनहा ही मुस्कुराना भाता है. पर मीरा तो कभी तनहा है ही नहीं…. कान्हा तो उसके ह्रदय में है…. 🙂
    मीरा को तो वोही समझ पायेगा तो प्यार को समझ पाए…. और ऐसे खुशनसीब बहुत कम होते हैं….
    और वोही समझ पाते हैं की क्या पाए मीरा ……

  11. “भाता है मीरा को,तन्हा ही मुस्कुराना.” love this line 🙂

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s