बाती….


रात भर जल चुकी मैं, अब न कुछ शेष
फिर जलाने के लिए कुछ नया खोजिये ।

दौर है ये आंधियो का,देखो ज़रा ध्यान से
जलूं रात-दिन मैं दिया और गहरा कीजिये।

तेज़ धूप और जलन, फैली है चारों ओर
गहराई के साथ थोड़ी नमी और दीजिये ।

उलझनों की पूँछ है, बढ़ रही हर दिन तेज़
जलूँगी मै रात-दिन भरोसा थोड़ा लम्बा कीजिये।

जल रही हूँ सदियों से, है यही मेरा काम
फिर अंधेरों में फँस न निराश हमे कीजिये ।

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29 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

29 responses to “बाती….

  1. shashi

    फिर जलाने के लिए कुछ नया खोजिये ।

    दौर है ये आंधियो का,देखो ज़रा ध्यान से
    जलूं रात-दिन मैं दिया और गहरा कीजिये।……………….waah bahut khoob indu ji .jajbato aur jeevan ke bich ki naiya ko khubsurti se abhivyakt kiya hai aapne hardik badhai

  2. rajtela1

    जल रही हूँ सदियों से, है यही मेरा काम
    फिर अंधेरों में फँस न निराश हमे कीजिये
    बहुत गुजर चुका है वक़्त
    अब खुद को बदल डालिए
    ज़हन के अँधेरे को उजाले से भर दीजिये

    अंग्रेज़ी में आपके लेखन को कहते हैं Evergreen…………

  3. nuktaa

    तेज़ धूप और जलन, फैली है चारों ओर
    गहराई के साथ थोड़ी नमी और दीजिये ।

    उलझनों की पूँछ है, बढ़ रही हर दिन तेज़
    जलूँगी मै रात-दिन भरोसा थोड़ा लम्बा कीजिये।

    Baati ka sundar aatm kathan

  4. Prashant Rai

    बहुत ही सुन्दर लिखती हैं आप मैम. आप की इस कविता से अनेको अर्थ निकलते हैं …

  5. kya baat hai…mazza aa gaya…

    दौर है ये आंधियो का,देखो ज़रा ध्यान से
    जलूं रात-दिन मैं दिया और गहरा कीजिये।

    तेज़ धूप और जलन, फैली है चारों ओर
    गहराई के साथ थोड़ी नमी और दीजिये ।

    bahut sundar panktiyan hai….

  6. बेहतरीन भाव संयोजन लिए उत्‍कृष्‍ट प्रस्‍तुति।

    कल 18/04/2012 को आपके इस ब्‍लॉग को नयी पुरानी हलचल पर लिंक किया जा रहा हैं.

    आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!

    … सपना अपने घर का …

  7. फिर जलाने के लिए कुछ नया खोजिये …..verrrry nice:)

  8. क्या बात है इंदु जी बहुत ही बढ़िया लिखी है

    फिर जलाने के लिए कुछ नया खोजिये ।

    सचमुच अद्भुत !!!

  9. बहुत सुन्दर रचना….ऐसे ही लिखते रहिये इंदु जी…..बधाई….

  10. वाह-वाह | जिंदगी के उतार-उतार और प्रगति का समर्पक चित्रण | बस् ! दुआ यही है की किसी की भी आशा ज्योति की बात खत्म ना हो जाए |

  11. Such a simple subject – बाती….
    उसे लेकर भी कितनी गहरी बातें व्यक्त करती है ये कविता…..
    तेज़ धूप और जलन, फैली है चारों ओर
    गहराई के साथ थोड़ी नमी और दीजिये…
    I love this line…….

    और अंत तो बहुत ही खूबसूरत है …..
    जो ये दर्शाता है की ज़िन्दगी में कैसे भी अँधेरे हों …. उम्मीद और आस हमेशा रहती है … बस भरोसा रखने की बात है….

  12. अनु

    बहुत सुंदर इंदु………………..
    कुछ अनकहा सा…………

    अनु

  13. जीवन में स्मृतियों की राख तो रह रहकर जलती है।

  14. दौर है ये आंधियो का,देखो ज़रा ध्यान से
    जलूं रात-दिन मैं दिया और गहरा कीजिये।

    बहुत खूबसूरत गजल

  15. Gr8,Indu,you are towards a path of epitome in Hindi Kavitha. My all good wishes with you.Keep writing my love.

  16. Munish

    It was great to come across with such a great talent. I never knew i am travelling with the person of such calaber and great thinker. I am able to read few and must say GREAT.

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