पानी वाला…


पानी पिलाता हूँ भरी गरमी में
जाड़ों में भी और बरसते मेघों में
बुझाता हूँ प्यास,अपने जीवन की।
मिनरल वाटर या पैकेज्ड वॉटर
नहीं है मेरे पास….
पास है ठंडी मशीन,लाल घड़ा
नींबू और चंद पत्तियाँ पुदीने की
उसी ताज़गी में डूबता हूँ,हर दिन
काला नमक और बंटा सोडा
ही बुझाते मेरे जीवन की खटास।
है यही कारोबार,है यही मेरा सच
हर सुबह हूँ निकलता,ले संग पानी
और  चंद अपनी प्यास की तलाश….

16 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

16 responses to “पानी वाला…

  1. rajtela1

    इंदुजी,
    आपसे निवेदन है ,बुरा नहीं मानना ,आपकी एनी कविताओं के आस पास भी नहीं है
    ,कुछ कमी कहो या खालीपन का अहसास होता है ,पढ़ कर ,शायद मेरा भ्रम हो ,आशा
    है आप सपरिवार सकुशल और स्वस्थ होंगे .अभी ब्लॉग पर टिप्पणी नहीं कर रहा
    हूँ ,प्रयत्न करिए ये रचना मेरी कलम से नहीं इंदु की कलम से लगे

  2. प्रवीण पाण्डेय

    पानी वाले के कितने उपकार हैं, गर्मी से आकुल जनों को।

  3. oooh i rememebr the times .. in delhi everyplace the paani wala .. and it tasted so tasteful ..
    lovely poem

  4. avibration

    Well done! this one, even previous..
    Cooling effect. Be happy.

  5. anju (anu)

    सड़क पर खड़े …लाल कपडे में लिपटे मटके की याद दिला दी आपने ….बहुत खूब

  6. Chalo Indu ….aapki is kavita ki wajeh se kitne sare logo ne pani walo ko yaad kiya…….ise kehte hai kavita ka jadoo..

  7. theconfidentguy

    bahut khoob
    paani vala ko aaj bhi main ujjain station par dekhta hun

  8. never drank water from a paani waala..but remember the bunta soda that we used to love while in delhi

  9. woooow…bahut khooob…Indu

    mazaa aa gaya padkar…khaskar woh pat jismein bante paani ka zikar kiya hai…..bachpan yaad aa gaya!

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