जीवन साथ-साथ…


औंधे मुंह बिस्तर पे खिंचे हुए हाँथ
इक आह! थी निकली,आई तेरी याद।

बंद आँखें फ़ैल गई,लबों पे मुस्कान
छुअन का अहसास था,गहरा गई साँस।

लगा की हवाओं ने है छेड़ा कोई राग
उड़ रहे संग आसमां में,ले के तेरी याद।

वीरानगी तन्हाई भी अब भाने लगी है
न कोई देख पाता,उस वक्त हमारा साथ।

हम-तुम थे जब मिले सदियाँ गुज़र गई
लिया हर सदी में हमने जीवन साथ-साथ।

18 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

18 responses to “जीवन साथ-साथ…

  1. rajtela1

    मैं डूब गया सुखद अहसास में….
    पहुँच गया फिर तुम्हारे पास मैं ……
    भावों की सुन्दर अभिव्यक्ति,सशक्त रचना,

  2. nuktaa

    Behatareeen rachna
    just the right mix of fragrance and color

  3. yashwant009

    कल 27/04/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

  4. भावों की सुन्दर अभिव्यक्ति !

  5. lovely expression Indu…..
    जो लम्हा तुमने दर्शाया है … शायद सभी ने कभी न कभी महसूस किया होगा …
    उसे शब्दों में कह पाना मुश्किल है पर तुमने बहुत गहराई से लिखा है…

    वैसे ये सिर्फ कल्पना थी या तुमने महसूस भी किया है ऐसा ?
    🙂

  6. वाह! कविता का प्रवाह कमाल का है|

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