दोपहर हूँ मैं….


माना की बहुत सख्त बहुत तेज़ हूँ मैं
बढ़ते हुए जीवन का आवेग हूँ मैं।

जब ढूंढ़ते सब सुबह-शाम को सदा
उस वक्त के बीच का गर्म जोश हूँ मैं।

जीवन है जटिल न छाँव मिलती है सदा
हर जटिलता को यहाँ परिभाषित करती हूँ मैं।

आ के मुझसे मिल गर जीना है जीवन को
मृगतृष्णा न दिखाती बस,प्यास बुझाती हूँ मैं।

जानती हूँ हर कोई चाहे,रहना मुझसे दूर
निभाती हूँ साथ फिर भी,न कभी घबराती मैं।
दोपहर हूँ मैं…….

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26 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

26 responses to “दोपहर हूँ मैं….

  1. rajtela1

    भूल जाती हूँ
    कभी शाम भी आयेगी
    गर्मी मेरी भी कम हो
    जायेगी
    जब तक जीवन मेरा
    खुशी से जीती हूँ

  2. Munish

    do-pahar hun main, har ek ki jeevan ki,
    ucchatam uchai hai jeevan ki,
    jahaan aveg hai, trishna hai kush kar dikhaane ki
    choo loo unchainyoon ko abhi
    saanjh aanae waali hai jeevan ki.

    great Induji as ever.. keep it up….

  3. बहुत सुन्दर रचना इंदु जी
    बधाई स्वीकारे

  4. nuktaa

    जीवन है जटिल न छाँव मिलती है सदा
    हर जटिलता को यहाँ परिभाषित करती हूँ मैं।

    आ के मुझसे मिल गर जीना है जीवन को
    मृगतृष्णा न दिखाती बस,प्यास बुझाती हूँ मैं।

    Bahot sundar Rachna

  5. नमस्ते इंदु जी ,
    गर्मी की इस दुपहरी में आपकी रचना पढ़कर आनेवाली लू के थपेड़ों का अहसाह जगा गयी ………

  6. no i dont want ot be away from it , We desperately need that here in uk send some this way pleaseeeeeeeeeee

  7. वाह … बहुत ही बढि़या लिखा है आपने …

  8. Prashant Rai

    bahut khoobsurat hai Mam,
    realy its gr8….

  9. bhattbhargav

    na thehrti subah hoon,.. na thehrti saam hoon..
    bas kuch pal rukti, par sada muskurati… doopahar hoon main..
    na waqt se pyar hai mujhe…
    na kisika intejaar…
    har pal ..phir bhi muskurati… doopahar hoon main…

  10. yashwant009

    आ के मुझसे मिल गर जीना है जीवन को
    मृगतृष्णा न दिखाती बस,प्यास बुझाती हूँ मैं।

    बेहतरीन पंक्तियाँ

    सादर

  11. जब धूप संग ही भाग्य लिखा,
    तब तपते तन जीना होगा।

  12. JayadevM

    Hi Indu

    Not so good at Hindi – have not done much reading since school. Seeing the number of comments you have received the poems you write must be good. Best wishes

  13. avibration

    Good one & encouraging..
    High self-esteem.

  14. anupampatra

    Hi,

    I know you’ve got appreciations before, but guess you deserve it again and again 🙂

    please check http://anupampatracontemplates.blogspot.in/2012/05/non-stop-generosity.html

    Regards,
    Anupam

  15. नीरजा

    आ के मुझसे मिल गर जीना है जीवन को
    मृगतृष्णा न दिखाती बस,प्यास बुझाती हूँ मैं।..वह इंदु जी …बहुत करीब से पढ़ लेती हैं ह्रदय के भावों को …..नीरजा
    आप के क़दमों की आहाट सुनने का इन्तजार है ..http://.http://neerjaarora.blogspot.in/

  16. ajaykumarjha

    खूबसूरत पंक्तियां …भोर सांझ से इतर दोपहर से मुलाकात अच्छी लगी

  17. sujith03

    Great, you should compile all this wonderful poems into a book.

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