साँवरिया काहे को इतना मुस्काए


साँवरिया काहे को इतना मुस्काए,
हर मुस्कान पे तेरी राधा मिट जाये ।

ओढ़ ली चुनरिया भी नाम की तेरे
बस तेरी ही धुन, है पाजेब गाये ।

तू करे दिल लगी ,गोपियों के संग
क्यूँ न दिल राधा का धड़का जाए।

तू रहे संग महल में,जब किसी और के
इस दर्द को भी राधा बिन प्यास पी जाए।

इक तेरे ह्रदय से जब नाम निकले राधे !
उन निकली साँसों में है राधा,जी जाये ।

साँवरिया काहे को इतना मुस्काए
राधे के होठों की ,प्यास बढ़ जाए ।

18 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

18 responses to “साँवरिया काहे को इतना मुस्काए

  1. yashwant009

    बहुत ही बढ़िया।

    सादर

  2. nuktaa

    साँवरिया काहे को इतना मुस्काए
    राधे के होठों की ,प्यास बढ़ जाए

    Behad sundar rachna, Radhe Radhe!!!

  3. rajtela1

    कृष्ण का राधा प्रेम
    इंदुजी अच्छी तरह समझाए …….

  4. प्रवीण पाण्डेय

    साँवरिया सब जाने, तभी मुस्कराये…..

  5. Rakesh Jain

    Sawaria ki hansi pe radha ka mar mitna prem ki parakashtha h. bhavo ki utkrasth chintan ke liye apka kavya sarahniya h.

  6. सच्चे प्यार की सच्ची कहानी | बहोत खूब | धन्यवाद |

  7. साँवरिया काहे को इतना मुस्काए
    राधे के होठों की ,प्यास बढ़ जाए ।nice

  8. radhika somani

    राधे के बिना तो आधे है मोहन….
    राधे को पाकर ही ये इतना मुस्कुराए…

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