प्रकृति विषयक हाइकु


1-सुगंधित भू
देती हमें,जीवन
नव दर्पण।

2-पुष्पों की माला
ये धरती है सारी
पहने हुए।

3-फैली है गूँज
कल-कल की,देखो
चारों तरफ।

4-इतराया भी
सूरज,आज यूँ ही
शरमाया भी।

5-माँ की गोद में
सर रख दिया,है
खुद को पाया।

6-बौर आ गए
देखो फलने का है
मौसम आया।

7-फैली है दूर
सुगंध सुबह की
तेजी से आज।

8-हमारी माँ है
वरदान धरती,
मनोरम है।

9-प्रकृति से ही
जीवन का सबके
है उदगम।

10-होना तुम्हरा
ह्रदयानुभूति का
सुखद पल।

11-हमें बताती
सुबह हो गई है,
चीँ-चीँ गौरैया।

12-फैली रौनक
खेत-खलिहान में
किरणें फैली।

13-फूली सरसों
लगे मनभावन
कितनी आज।

14-जैसे जीवन
पोखर किनारे यूँ,
बैठे हैं हम।

15-मधुरतम
कोमल अहसास
प्रकृति-साथ।

16-सबने माना
जल ही जीवन है
न दूजा कोई।

17-आओ बचाएँ
धरा को अपनी
वृक्ष लगाएँ।

18-हरियाली है
देन,धरा की हमें
इसको जानें।

19-जड़ है कहाँ
दिखती हैं लताएँ
चारों तरफ।

20-बरबस ही
करती आकर्षित
गोधूलि बेला।

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14 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

14 responses to “प्रकृति विषयक हाइकु

  1. यशवन्त माथुर

    बेहतरीन

    सादर

  2. yashoda

    शनिवार 23/06/2012 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. आपके सुझावों का स्वागत है . धन्यवाद!

  3. rajtela1

    बरबस ही
    करती आकर्षित
    गोधूलि बेला।

    खुशनुमा अहसास
    ह्रदय को
    संतुष्टी मन को

  4. सभी हाइकु बहुत बढ़िया हैं…

  5. बहुत ही सुन्दर
    सभी बेहतरीन है…
    🙂

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