रजनीगंधा ही पसंद है…


रजनीगंधा ही पसंद है वही न कोई लाया
ग़ुलाब की फुलवारियों ने कभी न रिझाया ।

हाँ ! अलग है रजनीगंधा से प्यार होना
कशिश ने उसकी,जब तक न बहकाया ।

मासूमियत पे उसकी बस बिछ ही जाते
कली की ख़ुशबू ने अरमानों को जगाया ।

फैला सुगंध अपनी मधु तरंग वो छोड़ती
है बार-बार उसने तन-मन को महकाया ।

ले आना इस बार संग रजनीगंधा का सुरूर
इक उसी ने घुल साँसों,में रूह को महकाया ।

15 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

15 responses to “रजनीगंधा ही पसंद है…

  1. rajtela1

    जो इतनी पसंद ,
    रजनीगन्धा आपको
    खुदा से दुआ है
    उसकी तरह मुस्काराते रहो
    महक दुनिया में फैलाते रहो

  2. इक उसी ने घुल साँसों,में रूह को महकाया ।
    वाह … बहुत खूब

  3. Cant help but recite the famous line-
    “रजनीगन्धा फूल तुम्हारे महके यूं ही जीवन में…”
    Very Nice!!

  4. शनिवार 30/06/2012 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. आपके सुझावों का स्वागत है . धन्यवाद!

  5. What a “fragrant” poem with verses that transport us to a different world!

  6. यशवन्त माथुर

    बेहतरीन

    सादर

  7. ले आना इस बार संग रजनीगंधा का सुरूर
    इक उसी ने घुल साँसों,में रूह को महकाया ।

    जो भी प्रेम लिखता है वो मेरा कृष्ण है …इंदु जी नमन आपको !

  8. dr dayal

    aapke liye rajnigandha k pholo ke saath dher sari shubhkamnaaye..

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