एकांत


एकांत कभी-कभी सर्वाधिक भाता है
सिवा खुद के जब पास कोई नहीं होता
एकांत खुद की पहचान कराता है ।

एकांत कभी-कभी बिल्कुल नहीं भाता
जब पास दूसरी कोई आवाज़ नहीं होती
एकांत जीने की हर चाह को खाता है ।

खतरनाक कैदी को देते सजा एकांत की
जो न डरा,न टूटा,कभी किसी और से
एकांत की मार से वो भी चटक जाता है ।

एकांत ले आता है मुस्कुराहट भी कभी-कभी
नटखट बालपन हो या दस्तक किसी प्यार की
तन्हाई में भी होठों को खीँच ले जाता है ।

एकांत – आत्म मंथन, जीवन, असीमित -अनंत….

30 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

30 responses to “एकांत

  1. और एकाँत में ही तो इतनी सुन्दर पंक्तियाँ लिखी जा सकती हैं!

  2. सही कहा इंदु जी|
    एकांत हर आवाज को उसकी पहचान देता है, खुद के होने का एहसास कराता है|

  3. rajtela1

    jisne dekhaa hai ekaant ,bhugtaa hai ekaant ,wo hee samajh paataa ,
    ekaant hee ek sahaaraa bhee hotaa
    hameshaa kee tarah induji aapki kalam se ek achhee rachnaa

  4. yes Indu though at times i dread solitude bt at the same time it has its own charm ,

  5. Aapne sundar likha. Kabhi ekant sach mein bahut bhata hai aur kabhi kaatne ko aata hai. Zindagi bhi aisi hi hai — kabhi sukh, kabhi dukh!

  6. यशवन्त माथुर

    कल 20/07/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

  7. शनिवार 21/07/2012 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. आपके सुझावों का स्वागत है . धन्यवाद!

  8. sukh-dukh to jevan ka sathi hai–bas yunhi chale chal-na hai :)) Bahut khubsoorat rachna hai!

  9. manojjaiswalpbt

    बहुत खूबसूरत रचना है

    manojjaiswalpbt

  10. anu

    एकांत में सुना जा सकता है खुद को…..
    सुन्दर रचना
    अनु

  11. स्वयं से मिलना हो तो एकांत ज़रूरी है …..सुंदर प्रस्तुति

  12. anita

    एकांत के कई रूप व उसके भावों का खूबसूरत वर्णन!
    पहली बार पढ़ी आपकी कविता और सीधे दिल में उतर गयी !
    ” एकांत तब भी बिल्कुल नहीं भाता है…
    जब चारों ओर अपनों के खेले ‘खेले’ हों…
    और दिल की गहराइयों में तन्हाईओं के मेले हों…”

  13. स्वयं की भी प्रतिध्वनि होती है परन्तु एकांत में | बहुत सुन्दर रचना |

  14. शिवनाथ कुमार

    एकांत – आत्म मंथन, जीवन, असीमित -अनंत….
    बहुत सही बात कही आपने ..
    एकांत कभी अच्छा भी लगता है तो कभी बिल्कुल ही नहीं भाता …
    सुंदर रचना !!

  15. एकांत का सुन्दर सार्थक चित्रण ..
    सुन्दर प्रस्तुति ..

  16. Ekant hi atmamanthan ka ekmave sadhan Hai……….
    Ekant he Tapasye he………..

    Very NIce,

  17. वाह … बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

  18. saras darbari

    एकांत अपने भीतर झाँकने का…खुद को खुद से मिलाने का एक बढ़िया मौका…! सुन्दर रचना !!

  19. “एकांत” hi hoo mei,
    aur एकांत hi bhata hai mujhe…
    shayad issliye ki..
    teri yaad lata hai ye 🙂
    [I am gud yaar 🙂 🙂 ]

  20. Deepak Tak

    Indu jee.bahut achchha likhti ho mera hindi se thoda lagaav kam ho gaya tha par lagta hai ab badh jaega…apki kavita ke bare me kahu toh AAPNE NIRJEEV EKAANT ME BHI JAAN DAAL DI.THANKS PLEASE LKIHTI RAHIE.

  21. जब गुजरा इस रास्ते तब एकांत था,
    आस पड़ोस मेरा सुनसान था,
    हर शब्द सही जान पड़ते थे,
    हर भाव ह्रदय पर चोट करते थे,
    क्या आप भी एकांत मैं थी लिखते वक़्त,
    या एहसास एकांत का चुरा लिया था?

    Nice One Indu! Keep up the amazing work 🙂

  22. अनाम

    स्वयं से मिलना हो तो एकांत ज़रूरी है …

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