आज तुलसी जयंती है,पूरे देश में लोग रामचरिमानस क पाठ करते हैं किन्तु कहीं कोई तुलसीदास जी को न ही फूल चढ़ाता है न ही कही उनकी कोई तस्वीर पर फूल-माला…

हृदयानुभूति

वरेण्य वाणी पुत्र गोस्वामी तुलसी दास के साहित्य पर सर्वाधिक शोध कार्य हुए हैं,परंतु यह विडम्बना है कि इस महापुरुष का जीवन आज तक निर्विवाद नहीं है उनकी जन्म तिथि तथा पुण्य तिथि भी निर्विवाद नहीं है कुछ लोग उनका निधन श्रावण शुक्ल
सप्तमी को मानते हैं तो कुछ लोग उनका निधन-सावन कृष्णा तीज शनि को।
इसी प्रकार उनका जन्मस्थान भी निर्विवाद नहीं है। राजापुर(बाँदा चित्रकूट),राजापुर पसका(गोंडा)तथा सोरों(सूकर क्षेत्र जिला एटा)
नामक तीनों स्थान इस बात का सर्वाधिक दावा करते हैं कि तुलसी दास का जन्म उन्हीं के यहाँ हुआ था और सबके पास अपने-अपने अकाट्य तर्क और प्रमाण हैं।इन सभी स्थानों पर तुलसी दास द्वारा आरोपित तथा स्थापित बट वृक्ष तथा बजरंग बली की मूर्तियाँ हैं,सूकर क्षेत्र ,तुलसी की ससुराल या ननिहाल भी निकट है।मानस की हस्तलिखित प्रतियाँ है तथा उनके गुरु नरहरि दास का आश्रम या पाठशाला भी है।एटा,गोंडा तथा बाँदा के जिला गजेटियर में भी किसी न…

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8 टिप्पणियाँ

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8 responses to “

  1. rajtela1

    Induji,chhup jaate hein heere taraashne waalee heere ke chamak ke peechhe.saarthak prashn

  2. dnaswa

    आपकी बात से सहमत हूँ … पता नहीं क्यों हमारे समाज में क्यों ऐसी प्रवृति आ गयी की महान लोगों को किसी न किसी बात पे बदनाम करने या उनको नज़र से गिराने की कोशिशें होती रहती हैं … तुलसी दार जी के साथ भी अन्याय हुवा है जिसको समझने की जरूरत है …

  3. बहुत ही सुन्दर आलेख, तुलसीदासजी ने भारतीय जनमानस को जो सांस्कृतिक भेंट दी है, वह अतुल्य है।

  4. लगा पढता ही जाऊं मगर यह पोस्ट तो अचानक ही समाप्त हो गयी -बहुत अच्छा लिखा है आपने और उनके जीवन से जुड़े कुछ अनर्गल प्रलापों को भी इंगित किया है आपने!
    “परन्तु-दिये सुकुल जन्म शरीर सुंदर। के हिसाब से” इस अंश को पुनः संपादित करें -बीच से पूर्ण विराम हटा लें और पूरे वाक्य को कामा इनवर्टेड कामा में करना चाहें!

  5. aise insaanon ko phool nahi chadaaye jaate .. aise insaanon ka mann mein smaran kiya jaata hai .. aur yaad rakha jaata hai !

  6. ओम प्रकाश शर्मा

    रामचरित मानस को जन साधारण रामायण ही कहता है लेकिन इसके नाम से पहले तुलसीकृत जरूर कहा या लिखा जाता है कवि तो प्रभु के नाम से पूर्व स्मरण हो जाता है। जहाँ तक उनके जीवन से जुड़े कुछ अनर्गल प्रलापों का प्रश्न है उससे गोस्वामी जी का जीवन बदनाम नहीं होता बल्कि मेरे विचार से उन किंवदंतियों से पाठ्क को उनके जीवन में आए आध्यात्मिक परिवर्तन को समझने में सुगमता ही होती है।इन अतिश्योक्तियों का अभिप्रायः उनकी पत्नी के प्रति अत्यासक्ति को दर्शाना ही है। लेख अति सुन्दर है लेकिन अधूरा सा लगता है

  7. ओम प्रकाश शर्मा

    वर्तमान समय में लेखक अपने जीवन के बारे में स्वयं ही सब कुछ बता देता है लेकिन उस काल में लेखक या कवि अपने बारे में बताना उचित नहीं समझते थे` अतः जीवनी लेखक अंतः साक्ष्य और बाह्यः साक्ष्य का सहारा लेना पड़ता था साथ ही साथ अतिश्योक्ति क प्रयोग भाव में स्पष्टता लाने के लिए किय जाता था।अतः उसे ‘गोस्वामी जी के जीवन को बदनाम करने वाले प्रचार’ की संज्ञा देना मुझे समाचीन नहीं लगा। भावनाओं को ठेस पहुँचाना मेरा उद्देश्य नहींथा।

  8. Rahul Vashishtha

    सूकरक्षेत्र सोरों में गोस्वामी जी की जयन्ती बङे ही धूमधाम से मनाई जाती है।

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