मिल जाओ गर तन्हा…


मिल जाओ गर तन्हा बस एक बार
भर आगोश में बताऊँ, है कितना प्यार ।

गर्दन के ठीक नीचे सीने के बीचोंबीच
जमा दूँ लबों को, कर दूँ बेक़रार ।

कर लूँ बंद पलकें शर्मो-हया को दूँ ताक
बह जाऊँ संग तेरे, जैसे बहे है बयार ।

देखो अब जब मिलना,ज़रा संभलना मेरे यार
धडकनें हुई बेकाबू न रहेगा  इख़्तियार ।

हर ख़ता को करना माफ़ बस यही जान के
लिया सदियों से जनम,पा सकूँ तुम्हारा प्यार ।

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19 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

19 responses to “मिल जाओ गर तन्हा…

  1. हर ख़ता को करना माफ़ बस यही जान के
    लिया सदियों से जनम,पा सकूँ तुम्हारा प्यार ।

    behad khoobsoorat ajfazon aur zazbaaton se bharee rachna
    jeete raho ,yun hee likhte rahoo

  2. Very nice…………….

    From the desk of:
    Agarwal P.F.

    Date: Mon, 13 Aug 2012 05:24:13 +0000
    To: agarwal_pavan@hotmail.com

  3. प्रशांत वर्मा

    रूमानी जज़बातों से लबालब …बेझिझक …शर्म-ओ-हया से दूर ……कितनी चाहत से भरी …बहुत सुन्दर ..Indu जी

  4. anju(anu)

    ज़रा संभाल कर यार …इतना आवेश ठीक नहीं हैं :)))

  5. “………………बस यही जान के लिया सदियों से जनम, पा सकूँ तुम्हारा प्यार।”

    हमेशा की भांति शानदार प्रस्तुति!
    शुभकामनायें!
    डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’

  6. Deepak Tak

    i have no words to explain your poerty, normally in our Indian society women never show their romantic side may b becaue of shy nature or so called male dominated thinking..but you are awesome here…salutes to your courage and your pure love.

  7. अनाम

    Geet jis din muhabbat ke mar jayenge, tutkar ham usi din bikhar jayenge, man – se – man mil gaya to kabhi ek din- dil ki gaharaeo me utar jayenge.,.,.,/.,..;.

  8. anju (anu)

    हर बार की तरह प्यार से भरी हुई लेखनी …बहुत खूब

  9. अनाम

    गर्दन के ठीक नीचे सीने के बीचोंबीच
    जमा दूँ लबों को, कर दूँ बेक़रार ।……. वाह……..

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