तेरी यादों का मौसम …


तेरी यादों का मौसम हर मौसम पे भारी
हुई बारिश भी हैराँ, क्यूँ बारिश है हारी ।

हाँ जिया था जीवन जब हुए थे तुम ‘हम’
फिर मिले हैं सीने को, ज़ख्म तेज धारी ।

समेटने में तुमको खुद ही बिखर गए हम

आज खुद की तलाश में,है ये कैसी लाचारी ।

घेरा तेरी बाँहों का तेरी यादों से जो छूटा
रुक गई है ज़मीं,गहरे हलचल है जारी ।

अब खुद को खोजना है पर कैसे,कब,कहाँ से
हर टुकड़े में तेरा अक्स,तलाश फिर भी जारी ।

टूट कर बिखर गए हैं अब जुड़ें कैसे भला
बह गए मोती,नयनों का समंदर है जारी ।

तोड़ दिया तुमने जिसे ना तोड़ सका कोई
ताकत पे अपनी है तुम्हे,तभी ये खुमारी ।

16 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

16 responses to “तेरी यादों का मौसम …

  1. सब मौसम मिलजुल कर आते,
    तेरी यादों में कुम्हलाते।

  2. कल 31/08/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

  3. तेरी यादों का मौसम हर मौसम पे भारी
    हुई बारिश भी हैराँ, क्यूँ बारिश है हारी ।bahut sundar indu ji waah shabdo ka jkamal sundar rachna badhai aapko

  4. yaadon ke sundar ahsaason se bharee,ek bahut sundar rachnaa
    समेटने में तुमको खुद ही बिखर गए हम

    आज खुद की तलाश में,है ये कैसी लाचारी
    yahee jeevan hai …..

  5. यादों की फुहार में नहाई सुंदर अभिव्यक्ति

  6. तेरी यादों का मौसम है सब पे भारी ,बढिया प्रस्तुति ……हुए हम भी हैंरा क्यों इतनी खुमारी .यहाँ भी पधारें –
    ram ram bhai
    बृहस्पतिवार, 30 अगस्त 2012
    लम्पटता के मानी क्या हैं ?

  7. My favourite lines in this poem are-
    “समेटने में तुमको खुद ही बिखर गए हम
    आज खुद की तलाश में,है ये कैसी लाचारी”

    beautifully written.

  8. आपने तो मेरी पीड़ा को शब्द दे दिए

  9. बहुत ही खूबसूरती से आप ह्रदय के भावों को संवेदना के साथ लेखनी से रंग देती हैं……उन्मुक्त रचनाशीलता है आपमें….वाह।

  10. बहुत शानदार ग़ज़ल शानदार भावसंयोजन हर शेर बढ़िया है आपको बहुत बधाई

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