तेरी ये मुस्कराहट


इक कहानी बनेगी तेरी ये मुस्कुराहट
की देखकर इसे जी जाने को जी चाहता है ।

इक फ़साना बनेगा फ़िसल लबों से तेरे
सुन आवाज़ तेरी गुनगुनाने को जी चाहता है ।

श्वेत मोती फीके पड़ गए तेरी दंत पंक्तियों में
देख इनकी ये चमक इन्हें पिरोने को जी चाहता है ।

खनक तेरी हंसी की जब उठती है जोर से कहीं
मंदिर की कोई धुन सी सुनने को जी चाहता है ।

है कोई कमल खिला सा ये रूप तेरा
भर आँखों में तुझे निहारने को जी चाहता है ।

आ मिल देखूं ज़रा तुझे और करीब से
की हर नज़र तेरी नज़र करने को जी चाहता है ।

21 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

21 responses to “तेरी ये मुस्कराहट

  1. Loved that line laughter is like the ringing bells of a temple !! Lovely ..

  2. दिल तेरे लिए जीने को
    तेरे लिए मरने को चाहता है

    बहुत उम्दा रचना ,

  3. यशवन्त माथुर

    बहुत ही बढ़िया

    सादर

  4. dnaswa

    श्वेत मोती फीके पड़ गए तेरी दंत पंक्तियों में
    देख इनकी ये चमक इन्हें पिरोने को जी चाहता है ..

    वाह क्या बात है … माला में पिरोने को जी चाहता है … हर शेर नया अंदाज़ लिए ..

  5. खनक तेरी हंसी की जब उठती है जोर से कहीं
    मंदिर की कोई धुन सी सुनने को जी चाहता है ।

    है कोई कमल खिला सा ये रूप तेरा
    भर आँखों में तुझे निहारने को जी चाहता है ।

    आ मिल देखूं ज़रा तुझे और करीब से
    की हर नज़र तेरी नज़र करने को जी चाहता है ।

    इंदु जी हमेशा की भांति लाजवाब रचना!

  6. क्या खूब | काश…. , यह अफसाना हकिकत होता , मै इसका चाश्मदित गवाह बन जाता |

  7. “इक कहानी बनेगी तेरी ये मुस्कुराहट
    की देखकर इसे जी जाने को जी चाहता है ।

    इक फ़साना बनेगा फ़िसल लबों से तेरे
    सुन आवाज़ तेरी गुनगुनाने को जी चाहता है ।”

    वाह! सुकून का एहसास कराती हुई कविता|

  8. इक कहानी बनेगी तेरी ये मुस्कुराहट
    की देखकर इसे जी जाने को जी चाहता है ।
    बहुत खूब लिखा है.

  9. खनक तेरी हंसी की जब उठती है जोर से कहीं
    मंदिर की कोई धुन सी सुनने को जी चाहता है ।

    है कोई कमल खिला सा ये रूप तेरा
    भर आँखों में तुझे निहारने को जी चाहता है ।waah bahut sundar indu ji ..hansi pe teri fida hai , bas niharne ko ji chahata hai ,
    dosti aisi ki dil se jude dil
    chupchap nibhane ko dil chahata hai

  10. anju(anu)

    दिल की चाहत और लबों की हँसी यूँ ही कायम रहे …

  11. excellent,awesome,superb just loved it…your writng sytle is new and very unique….

  12. तेरी ये मुस्कराहट गजल को पढ़कर इंदु जी ,
    आज आपकी तारीफ़ करने को जी चाहता है !
    बहुत बढ़िया
    वैसे इसका शीर्षक अगर आप ‘जी चाहता है ‘ रखते तो और भी अच्छा लगता ,लेकिन ये मेरी सोच है !
    पुनः साधुवाद ……
    डॉ. नीरज
    http://achhibatein.blogspot.in/

  13. खूबसूरत अंदाज खुद की मुस्कुराहट के साथ ..खूबसूरत रचना ख़ूबसूरती से भरी आदाओं के साथ …..

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