ये कैसा यथार्थ !!!


कुल्टा कुलच्छिनी
सोई आज,
हम उम्र चचेरे चाचा के साथ
मिटा दी मर्यादा
कटा दी नाक ।
उफ़ ! उम्र का ये बढ़ता बोझ
संभाला न गया
न कर सकी इंतज़ार बाप
की खोज का !!!
पीट-पीट कर माई ने
जब डाला अन्दर हाँथ
सौ रुपए के नोट ने
फाड़ दिए जज़्बात ।
पसीने से कुछ गीला
मुड़ा-तुड़ा वो नोट
ले गया साथ अपने
बेटी का जिस्म नोच ।
कल ही तो रो रही थी मै
इस नोट के लिए
मिल जाये गर तो जाऊँ
किसी डॉक्टर के पास
ले आऊँ दवा जिससे
हो जाये गर्भपात !
चार-चार बच्चे हैं
और अब न चाहिए
रोटी इनकी अटती नहीं
जान मेरी मिटती नहीं
कहते हुए जब खानी चाही थी
गोली मैंने धतूरे की
रोक लिया था मेरा हाँथ
न करो माँ ऐसा,
सब ठीक हो जायेगा ।
न समझी थी दिलासा का
मतलब उस वक्त मै
सोचा था उठा लूंगी कोई
भार खुद से भारी
न सोचा था मगर
बेटी न रहेगी कुँवारी ।
अब क्या करूँ इस नोट का
ये सोचते हुए
पकड़ कुलच्छिनी बेटी का हाँथ
ले जाती है खींच वो अपने साथ
कराने होंगे अब
दो-दो गर्भपात !!!

22 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

22 responses to “ये कैसा यथार्थ !!!

  1. stunning…new territory for you or have I been missing something? Will check out the posts I missed in my preoccupation with other matters. Well done!

  2. Imran

    Indu Singh ji kamal kar diya is baar to aapne awesome post….bahut kadva aur nanga yatrath hai ye……haits off for this.

  3. Wow! very courageous and stunning. Finding, no appropriate words to explain.

  4. दिल दहला देनेवाली प्रस्तुती |

  5. abhishek

    different from your usual style, but very sombre and effective. i liked it!

  6. anju(anu)

    इस गरीबी का सच ……..मार्मिक

  7. निःशब्द हूँ ….यह एक यथार्थ है ….यह स्वीकारना होगा हमें …गरीबी का यथार्थ ….मजबूरी का यथार्थ …..स्वार्थ का यथार्थ ….समाज की विडंबनाओं का यथार्थ ….बहुत सुन्दर लिखा आपने इंदु जी …साधुवाद आपको इस यथार्थ का चित्रण करने के लिये

  8. .

    कराने होंगे अब
    दो-दो गर्भपात !!!

    उफ़्फ़ऽऽ…! सभ्य समाज का एक वीभत्स यथार्थ …
    😦
    इंदु जी , आपने कविता के माध्यम से विद्रूपता पर सोचने को विवश करने में सफलता पाई है…
    नमन आपकी लेखनी को …
    ऐसे ही समाज के हित में सृजन होता रहे …

    शुभकामनाओं सहित…
    राजेन्द्र स्वर्णकार

  9. एक कविता जिसने पूरी कहानी कह दी… वाह!!

  10. subodh

    कड़वी सच्चाई……. कैसे इसान ने इंसान को इन हालातों मे धकेल दिया , सोचकर रूह कांपती है ….

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s