चलते जाना है …


माना कि तम घनघोर घिरा
है निशा से संसार भरा
चंहु ओर अमावस का पहरा
फिर भी चलते जाना है ।

आशा की कोई किरण नहीं
इस रात का कोई अंत नहीं
इन बुझे दियों की नम लौ में
फिर मन का दीप जलना है ।

पाषाणों ने रोका रस्ता
पथ ने भी ना साथ दिया
मंज़िल जब खुद नज़र न आए
आत्म शक्ति तक जाना है ।

तोड़ सारे बंधन इस मन के
पथिक न कोई कभी भी भटके
लें ज्ञान इसे ही जीवन में अब
स्वयं को नहीं भटकना है ।

चलते जाना है रे मानव
चलते जाना है ….

16 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

16 responses to “चलते जाना है …

  1. तोड़ सारे बंधन इस मन के
    पथिक न कोई कभी भी भटके
    लें ज्ञान इसे ही जीवन में अब
    स्वयं को नहीं भटकना है ।……

    सजगता का सन्देश देती यह कविता मुझे अपने सोचों के बहुत करीब महसूस हो रही है. अच्छा लगा पढ़ना.

    • अनाम

      आशा की कोई किरण नहीं
      इस रात का कोई अंत नहीं
      इन बुझे दियों की नम लौ में
      फिर मन का दीप जलना है, चलते जाना है रे मानव
      चलते जाना है . Very very highly inspirational . it touched me like any thing, mesmerized with it. From my bottom line of heart thanks it too much near to my heart. Congrate very wise human being .

  2. यशवन्त माथुर

    पाषाणों ने रोका रस्ता
    पथ ने भी ना साथ दिया
    मंज़िल जब खुद नज़र न आए
    आत्म शक्ति तक जाना है ।

    प्रेरणा दायक कविता।

    सादर

  3. आशा की कोई किरण नहीं
    इस रात का कोई अंत नहीं
    इन बुझे दियों की नम लौ में
    फिर मन का दीप जलना है ।
    very nice …………….

  4. यशवन्त माथुर

    कल 04/11/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

  5. सुंदर भाव ..चलते जाना है रे मानव…इस लम्बी मानव हीन रात से निकल एक दिन को मानवता के उजाले मे जाना है

  6. ashish rai

    अच्छी कविता है , प्रेरित करती हुई . बस एक जगह कुछ खटका. बुझे दिए में लौ कैसे?

    • धन्यवाद आशीष जी, ” इन बुझे दियों की नम लौ में,फिर मन का दीप जलना है ”
      जीवन की गहराई की बात कही है ,कि परिस्थितियाँ कैसी भी हों आशा बनाये रखनी है ….यहाँ बुझे दियों कि नम लौ अर्थात दिया बुझ ज़रूर गया है किन्तु बाती अभी भी गीली है , है… …आशा की एक किरण सदा ही मौजूद है यही बताना चाहा है..

      सादर

  7. आशा की कोई किरण नहीं
    इस रात का कोई अंत नहीं
    इन बुझे दियों की नम लौ में
    फिर मन का दीप जलना है ।
    …बस यही जीवन है ..जितना जल्दी स्वीकार लें…राह उतनी सरल हो जाती है …!

  8. काफी प्रेरनादायी कविता है | जीवन के हर मोर पर मनुष्य को अपने धैर्य और विवेक को खोना नहीं चाहिए और मुसीबतों का सामना डट कर करना चाहिए |
    very inspiring and motivational poem mam… 🙂

  9. bahut hi khoobsurat kavita hai Indu ji .. belwated diwali wishes to you and your family ..apologies for the late reply…

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s