शुभ दीपावली


जीवन की व्यस्तताओं, परेशानियों और दुखों के बावजूद पर्व अपना आगमन नहीं रोकते क्योंकि हर पर्व का उद्देश्य एक ही होता है सदा जन हित। हर घर में, हर इंसान में खुशियाँ भरने की कोशिश करते हैं पर्व। सुख-दुःख ,जीवन-म्रत्यु सभी निश्चित है, मालूम भी है सभी को फिर भी हम भूल जाते हैं और यदि हम दुखी होते हैं तो सारे संसार को उसी नज़र से देखते हैं ,पर्व ऐसे हर पलों को हर किसी के जीवन से निकालने में मदद करते हैं। त्यौहार कभी अमीरी-गरीबी का भेद नहीं करते बल्कि दोनों को उनकी सामर्थ्य अनुसार भरपूर जीने का सन्देश देते हैं। त्यौहार कोई भी क्यूँ न हो सदा सभी लोग मुंह मीठा ही करते हैं कभी भी तीखा नहीं, फिर चाहे वो पिस्ता लौंज से किया जाये या गुड की ढली से फर्क नहीं पड़ता क्योंकि मुंह में जो घुलती है वो ‘ मिठास ‘ ही होती है। सभी व्यस्त हैं अतः पर्व आते ही घरों की साफ़-सफाई भी शुरू हो जाती है। त्यौहार के दिन घर-परिवार, रिश्तेदार,पड़ोसी सभी में एकजुटता और लगाव इतना भर जाता है कि शायद ही कभी और देखने को मिले। हर पर्व का असर उसके आगमन से पूर्व और पश्चात भी शेष रहता है, ज़रुरत बस इसे सहेजकर रखने की होती है जो कि हम समय के साथ भूलने लगते हैं और शायद तभी हमे याद दिलाने के लिए फिर से किसी दूसरे पर्व के आगमन की सूचना मिल जाती है। दुर्गा पूजा,दशहरा,बकरीद,दिवाली,क्रिसमस ,होली ,ईद आदि-आदि अनेक पर्व आते रहते हैं, हमे ये याद दिलाने कि प्रेम की निधि ही जीवन की अमूल्य निधि है और हम इसे संभाल कर रखें,बांटे एक दूसरे के साथ। हर पर्व अनगिनत संदेशों को समेटे हुए लाता है अपनी झोली में और हर सन्देश भरा होता है जीवन के विविध रंगों से। दीपावली का पर्व भी उन्ही में से एक है इस पर्व की खूबसूरती यही है कि सभी के जीवन को प्रकाशित करना है। जहां जितना हो सके दिए की लौ को जलना है। कोई फर्क नहीं पड़ता कि दिया शुद्ध घी से जलाया है या कि तेल से,या दिया है ही नहीं मोमबत्ती जलाई है,या वो भी नहीं है तो सबसे बड़ी लौ आशा और उम्मीद की जलाई है उद्देश्य जीवन रुपी दिए की जलाये रखना है, जिस तरह घर के कोने के अंधियारे को दिए की लौ ख़त्म कर देती है उसी तरह आशा और हिम्मत की लौ भी प्रकाशित कर देती है जीवन के अंधियारे को।

दिए जलें या न जलें अब,खुशियों की लौ को जलाना है
इस दिवाली लें शपथ अब मन का अंतरदीप जलाना है
हो जाएगा जगमग जीवन जिस दिन,इस जग में सबका
पर्व करेंगे अभिमान हम पर,यही मान हमें अब दिलाना है …

दीपावली की अनंत ज्योति भरी शुभकामनाएँ –

सादर-सस्नेह
आपकी इंदु

17 टिप्पणियाँ

Filed under अभिलेख

17 responses to “शुभ दीपावली

  1. आप को दीपोत्सव पर शुभकामनायें, हे प्रभो ! हम सब के अंतरंग और बहिरंग सदैव चेतना से आलोकित रहें..

    आपका एवम आपके परिवारजनों का जीवन सुख समृद्धि मय हो, परमात्मा से प्रार्थना है. शुभकामनाएं !

  2. दिए जलें या न जलें अब,खुशियों की लौ को जलाना हैइस दिवाली लें शपथ अब मन का अंतरदीप जलाना हैहो जाएगा जगमग जीवन जिस दिन,इस जग में सबकापर्व करेंगे अभिमान हम पर,यही मान हमें अब दिलाना है …
    Sunder………….

    From the desk of:
    Agarwal P.F.

    Date: Sun, 11 Nov 2012 04:27:22 +0000
    To: agarwal_pavan@hotmail.com

  3. यशवन्त माथुर

    बहुत ही अच्छा संदेश दिया है,
    दीपावली आपको भी सपरिवार शुभ और मंगलमय हो!

    सादर

  4. दीपोत्सव पर्व पर हार्दिक बधाई और शुभकामनायें ….

  5. बहोत खूब | आपको भी दिवाली की ढेर सारी शुभ-कामनाएँ |

  6. anju(anu)

    दीपावली की बहुत बहुत शुभकामनाएँ



  7. बनी रहे… त्यौंहारों की ख़ुशियां हमेशा हमेशा…

    ஜ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●ஜ
    ♥~*~दीपावली की मंगलकामनाएं !~*~♥
    ஜ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●ஜ
    सरस्वती आशीष दें , गणपति दें वरदान
    लक्ष्मी बरसाएं कृपा, मिले स्नेह सम्मान

    **♥**♥**♥**●राजेन्द्र स्वर्णकार●**♥**♥**♥**
    ஜ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●ஜ

  8. बहुत अद्भुत अहसास…सुन्दर प्रस्तुति ..आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये. मधुर भाव लिये भावुक करती रचना,,,,,,

    दीपावली की हार्दिक शुभकामनाये आपको और आपके समस्त पारिवारिक जनो को !

    मंगलमय हो आपको दीपो का त्यौहार
    जीवन में आती रहे पल पल नयी बहार
    ईश्वर से हम कर रहे हर पल यही पुकार
    लक्ष्मी की कृपा रहे भरा रहे घर द्वार..

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