निरुद्देश्य जीवन न रह जाए, ज़रा देखना सभी


निरुद्देश्य जीवन न रह जाए, ज़रा देखना सभी
इंसानियत मर जाए ना, ज़रा संभालना मेरे यार ।

हर लब पे ख़ुशी, ना कोई ला सका है जहाँ में
कुछ लबों को खिलाना तो, ज़रूरी है मेरे यार ।

जब-जब भी आँधियाँ अंधकार की चलें बहुत
ले हौसला जुगनुओं से,टिमटिमाना है मेरे यार ।

माना की झूठ उछलता मृगशावक सा तीव्र
सच्चाई की डोर से इसे, बाँध लाना है मेरे यार ।

वतन के वास्ते न मिट सकें अगर सभी
जीवन फिर वतन के लिए,सजाना है मेरे यार ।

अब तक गर न समझे हैं जीवन क्यूँ मिला
धूल बन शहीदों के पथ ,बिछ जाना है मेरे यार ।

12 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

12 responses to “निरुद्देश्य जीवन न रह जाए, ज़रा देखना सभी

  1. यशवन्त माथुर

    वतन के वास्ते न मिट सकें अगर सभी
    जीवन फिर वतन के लिए,सजाना है मेरे यार ।

    बेहतरीन रचना

    सादर

  2. जब-जब भी आँधियाँ अंधकार की चलें बहुत
    ले हौसला जुगनुओं से,टिमटिमाना है … बहुत ही प्रेरणात्‍मक पंक्तियां … बधाई सुन्‍दर सृजन के लिये

  3. suneel yamdagni

    माना की झूठ उछलता मृगशावक सा तीव्र
    सच्चाई की डोर से इसे, बाँध लाना है मेरे यार ।अब तक गर न समझे हैं जीवन क्यूँ मिला
    धूल बन शहीदों के पथ ,बिछ जाना है मेरे यार ……आपकी कविता के इतने सुंदर भाव है की शब्द छोटे पड़ गए इंदु जी ..हृदयस्पर्शी

  4. waah indu ji , bahut khubsurat khayal ,
    nahi ruk rahe hai kadam , jara sambhalna mere yaar
    kaaton se bhari rahoon me jara phool khilana mere yaar …..badhai sundar srajan ke liye

  5. अनाम

    सच्चाई की डोर से इसे, बाँध लाना है मेरे यार …..waah! kavita ki sabhi panktiyan dil ko chu gai, hardik badhai Indu ji

  6. ARIF AKHTAR KAKVI

    Lovely…induravisinghj….Just no words….wonderful creation….:))

  7. बहुत ही प्रेरणादायक और सन्देश देने वाली कविता |

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s