रिश्ते निभाने से निभते हैं !!!


रिश्ते निभाने से निभते हैं
जो निभ गया, निभा लिया
रिश्ता बन गया ?
उम्मीदों की धरातल पर
इच्छाओं के बीज रोप दिए जाते हैं
आदेश से, कभी प्रेमादेश से
अंकुर फूटा,रिश्ता निभा
और यदि नहीं ! तो ?
खून के रिश्ते ,दिल के रिश्ते
विरासत के रिश्ते और इन
रिश्तों के रिश्ते
रिसते रहते हैं ज़िंदगी भर
कभी बारिश बन बरसते हैं
कभी बारिश से भीगते हैं
धूप से जलते हैं,जलाते हैं
मधुर छाँव से रिश्ते भी
गहन अन्धकार में विलुप्त हो जाते हैं
इक कहानी तो कभी इतिहास
और कभी इक पल को तरसते हैं
रिश्ते कितने रूप बदलते हैं।
जीवन निभाया नहीं जाता
जिया जाता है
रिश्तों को जिया नहीं जाता
निभाया जाता है, क्योंकि
रिश्ते निभाने से निभते हैं !!!

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18 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

18 responses to “रिश्ते निभाने से निभते हैं !!!

  1. Anand Dwivedi

    मैं रिश्तों को नकारात्मक रूप में देखता …क्या करूँ जैसा जाना है रिश्तों को उसी के अनुरूप कह रहा हूँ !

  2. लेन देन संसार निराला,
    सबके ऊपर ऊपरवाला।

  3. हर रिश्ता अपना अलग वजूद रखने के बावजूद निभाया जा सकता है ..कुछ अपवादों को छोड़ दिया जाए तो
    रिश्ते ऐसे ही होते हैं
    बहुत सकारात्मक सोच के साथ लिखी गई रचना ..सुन्दर

  4. यशवन्त माथुर

    बिलकुल सही बात कही आपने।

    सादर

  5. rishte nibhane se nibhate hai ,
    aapne bakhoobi apni kalam se sach ko bayan kiya hai , sarthak racvhna ke liye badhai

  6. suneel

    इंदु जी बहुत सुंदर भावों में समेटा है रिश्तों को ..कुछ खट्टा कुछ मीठा .फिर भी रिश्ते तो रिश्ते हें ….बस इतना ही की ….खुदा ने बनाया इंसान .इंसान ने बनाये रिश्ते ..रिश्तों से हारा खुदा क्योकि रिश्तों में जुड़ा प्रेम का सागर माँ बहन और बेटी का .

  7. आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 02/02/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

  8. जो निभ गया, निभा लिया
    रिश्ता बन गया ?
    बहुत सही कहा आपने ….

  9. बहुत बढ़िया रचना …
    जो निभ गया वही रिश्ता वर्ना एक जान पहचान ही कहा जाएगा इसे ..

  10. विचारपरख सुंदर प्रस्तुति ….
    शुभकामनायें …..

  11. anu

    बहुत सुन्दर…..
    मधुर छाँव से रिश्ते भी
    गहन अन्धकार में विलुप्त हो जाते हैं
    इक कहानी तो कभी इतिहास
    और कभी इक पल को तरसते हैं..
    वाह..
    अनु

  12. i agree with you .. rishtey nibhaane se rightey hai .. no matter kya, kaisa rishta hai .. agar nibhaao toh hi acha lagta hai ..

  13. जो निभ गया, निभा लिया
    रिश्ता बन गया ?
    बहुत सही कहा आपने ….!!!
    आज आपके ब्लॉग पर बहुत दिनों बाद आना हुआ अल्प कालीन व्यस्तता के चलते मैं चाह कर भी आपकी रचनाएँ नहीं पढ़ पाया. व्यस्तता अभी बनी हुई है लेकिन मात्रा कम हो गयी है…:-)

  14. रिश्ते निभाने से निभते हैं
    जो निभ गया, निभा लिया
    रिश्ता बन गया ?
    ठीक कहा आपने …

  15. बहुत बढ़िया रचना …
    जो निभ गया वही रिश्ता वर्ना एक जान पहचान ही कहा जाएगा इसे ..

  16. कुछ रिश्ते जो बेनाम रह जाते है
    दर्द उन्हीं रिश्तों के तमाम रह जाते है…

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