ख़ामोश सी रहती हैं ….


ख़ामोश सी रहती हैं मेरे अन्दर की लौ आजकल
कब जलेगी और दिखेगी इंतज़ार बस उसका है !!!

वो जल रही निरन्तर, है ये भी मालूम मुझे
ताप से रूह के पकने तक इंतज़ार बस उसका है !!!

कुछ नया नहीं है अब खोजना मुझको यहाँ
परत दर परत शांति हो,बस ख्वाब उसका है !!!

हैं आवरण इतने न पहचान आता है कोई
बिन आवरण कोई चेहरा दिखे अरमान उसका है !!!

अब ‘मै’ न रहूँ अब ‘तुम’ न रहो न रहे कोई दंभ
हम जिएँ और हम रहें, प्रक्रति को इंतज़ार उसका है !!!

13 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

13 responses to “ख़ामोश सी रहती हैं ….

  1. yashoda agrawal

    आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 02/03/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

  2. suneel

    दर्द से भरे भाव …सुंदर रचना …बस इतना ही .. सामने देख दर्द ..बाट लाता हूँ.. किसी दर्द को मज़बूरी नहीं बनाता जिन्दगी की .इंसान को खोजता रहता हूँ खुद के लिए ..श्याद जरुरत है तेरी भी कुछ एसी ??

  3. shikha varshney

    बस एक लकीर सी है उसके मेरे बीच, मिट जाए बस इंतज़ार उसका है 🙂
    सुन्दर लिखा है.

  4. तनिक स्थिर हो उस लौ को जलने दें, गति आ जायेगी।

  5. इक दिन ऐसा भी आयेगा
    जब इंतज़ार पूरा हो जाएगा
    मन को सुकून मिल जाएगा
    …सुन्दर रचना ..लिखते रहे ..

  6. अदितिपूनाम

    बहुत खूबसूरत रचना ……
    बधाई

  7. हम जिएँ और हम रहें, प्रक्रति को इंतज़ार उसका है !!!

    दर्द में समाती,फिर भी उसे अभिवयकट करती, सुन्दर रचना

  8. हर पल मेरे अन्दर कुछ सुलग रहा है
    जल रहा हूं मैं और अच्छा भी लग रहा है…

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