वही तुम वही हम …


कुछ भी तो न बदला
वही तुम, वही हम
वही तुम्हारा बेपरवाह
रहना वही तुम्हारा
बिखरा-बिखरा मन।
आज फिर दिल चाहा
ठीक कर दूँ तुम्हारी
अस्तव्यस्त चीज़ें
आज फिर तुम्हे सँभालने
को मचला मेरा मन।
वही तुम-वही हम
सब वही नज़र वही
पर गुम गया अपनापन
न तुमने पहचाना
न हमने पहचान बताई
अद्रश्य थे हम
इक-दूजे के लिए
फिर भी ह्रदय हूक से भरा
नकारता रहा इस सत्य को
उसे दिख रहा था
ठीक सामने उसके
खड़े हो तुम।
हाँ ! वही तुम, वही हम !!!

14 टिप्पणियाँ

Filed under कविता

14 responses to “वही तुम वही हम …

  1. हाँ ! वही तुम, वही हम !!!……..सशक्त भाव

  2. अनाम

    यही कशमकश हमें जाने अनजाने बहुत कुछ भावनात्मक सत्यों और तथ्यों को नहीं आत्मसात करने देती और एक इमोसनल चक्रव्यूह में हम स्वयं को फंसा लेते हैं…इस कशमकश का बहुत सुन्दर चित्रण कर रही है यह कविता. पढ़ना अच्छा लगा.

  3. Vinesh Singh

    एक कशमकश जो चाहे अनचाहे, जाने अनजाने हमें एक इमोशनल चक्रव्यूह में स्वयं के द्वारा ही फंसवा देती है…बहुत सुन्दर चित्रण है इस कशमकश का यह कविता.

  4. Himanshu Shah

    वही तुम-वही हम…..Acchi Line Hai

  5. अनाम

    बंधन ..जरूरतों में सिमटा सुंदर ख्वाब न जाने कब तक निभे और न जाने कब तक निभाना है सामने खड़े है एक दूसरे के …हाँ ! वही तुम, वही हम

  6. यशवन्त माथुर


    दिनांक 18/03/2013 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है .
    धन्यवाद!

  7. बड़े अजब संबंधों के पथ,
    पल में गदगद, पल में लथपथ,
    सारा तो संसार वही है,
    दिन वैसा है, रात वही है,
    धरती वैसी, वही नील नभ
    वही रहे हम, बदले थे कब,
    यह रहस्य पर समझ न आये,
    कोई यह गुत्थी सुलझाये,
    हम भी हतप्रभ, तुम भी हतप्रभ,
    मन ने चाहा, सुधर गया सब।

  8. आपकी कविता से प्रेरित हो लिखा है यह

  9. बहुत सुद्नर आभार आपने अपने अंतर मन भाव को शब्दों में ढाल दिया
    आज की मेरी नई रचना आपके विचारो के इंतजार में
    एक शाम तो उधार दो

    आप भी मेरे ब्लाग का अनुसरण करे

  10. अनाम

    Sunder rachna….हम -तुम और सिर्फ हम तुम …कुछ न बदला हमारे बीच ..ये तो जरूरते हैं हम-. तुम के बीच ..हम -तुम के जुड़े रहने की ..सिर्फ और सिर्फ हम -तुम के बीच

  11. anju(anu)

    दो प्यार करने वालो के बीच कभी कुछ ना बदले …ये ही दुआ है

    मन के भावों सी कविता …बहुत खूब

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